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बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में गर्भवती महिला, बुजुर्ग, बच्चे का किया गया लाइन लिस्टिंग

बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में गर्भवती महिला, बुजुर्ग, बच्चे का किया गया लाइन लिस्टिंग

• 5.34 लाख से ज्यादा घरों का किया गया सर्वे
• बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में डायरिया को लेकर हाई अलर्ट
• ओआरएस पैकेट, सांप काटने की दवा, ब्लीचिंग पाउडर की करायी गयी उपलब्धता
• रैपिड रेस्पोंस टीम का हुआ गठन

मधुबनी/ : जिले में लगातार बारिश होने तथा नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो गई है स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिला, 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों, 5 साल तक के बच्चों तथा गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों का लाइन लिस्टिंग की गयी है तथा डायरिया की रोकथाम एवं लोगों को समुचित ईलाज उपलब्ध कराने की दिशा में विभाग द्वारा प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को डायरिया प्रबंधन के निर्देश जारी करते हुए उन्हें हाई अलर्ट पर रखा गया है. साथ ही इन केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक घोल ओआरएस पैकेट की उपलब्धता भी सुनिश्चित करायी गयी है.

रैपिड रेस्पोंस टीम हाई अलर्ट पर:

सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिला बुजुर्ग बच्चे के उचित देखभाल के लिए ऊंचे स्थानों पर मेडिकल कैंप का गठन कर इलाज करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसे ध्यान में रखते हुए पूर्व से ही डायरिया प्रबंधन की तैयारी की गई है. इसको लेकर जिला एवं प्रखंड स्तर पर रैपिड रेस्पोंस टीम का गठन किया गया है.

आपातकालीन स्थिति में डायरिया ग्रसित इलाकों का दौरा कर लोगों को जरुरी सुविधा मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी मेडिकल टीम को दी गयी है. इसको लेकर जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को विशेषकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के चिकित्सा प्रभारियों को जरुरी निर्देश दिए गए हैं. डायरिया की रोकथाम एवं इसके प्रबंधन में आशा एवं एएनएम का भी सहयोग लिया जाएगा. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ओआरएस के साथ सांप काटने की दवा, ब्लीचिंग पाउडर एवं चुना, हेलोजेन टेबलेट तथा अन्य जरुरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करायी गयी है. सभी आशा एवं एएनएम को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ओआरएस पैकेट का वितरण एवं डायरिया के विषय में जरुरी जानकारी देने की ज़िम्मेदारी दी गयी है.

सभी 21 प्रखंड के 5.34 लाख घरों का किया गया सर्वे

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिले के सभी प्रखंड के 5,34,903 घरों का सर्वे किया गया जिसमें 5 साल से कम उम्र के 1,63,846 बच्चे, 60 वर्ष से ऊपर के 1,15,502,गर्भवती महिला 26,633,मधुमेह के 4767, उच्च रक्तचाप के 5,238, हृदय रोग के 435, गुर्दा रोग के 29, कैंसर के 32, टी.वी. के 940 मरीजों का लाइन लिस्टिंग किया गया।

जागरूकता से बचाव संभव :
सिविल सर्जन ने बताया जागरूकता से डायरिया की रोकथाम की जा सकती है. अक्सर यह बीमारी बरसात के समय या फिर अत्यधिक गंदगी से होती है. इसके लिए लोगों को खाने से पूर्व हाथ जरुर साफ़ करना चाहिए एवं ताजा खाने का ही सेवन करना चाहिए. साथ ही साफ़ पानी एवं ताजे फ़ल एवं सब्जी का सेवन डायरिया से बचाव करने में सहायक होते हैं. उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान एकत्रित ज्यादातर पानी में बैक्टीरिया पैदा होते हैं जो डायरिया के साथ त्वचा संक्रमण जैसे रोग भी पैदा करते हैं।

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