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मधुबनी जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के ओर से इससे बचाव को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। रिपोर्ट (darbhanganews24.com)

जिले को मिला 1000 रैपिड एंटीजन कीट, अब 30 मिनट में मिल रही है रिपोर्ट

• अनुमंडल अस्पताल को दिया गया 450 एंटीजन किट
• पीएचसी को दिए गए 500 किट
• संदिग्ध मरीजों की चार तरीकों से की जाती है कोविड-19 का जांच

मधुबनी/23 जुलाई। जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के ओर से इससे बचाव को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है तथा नये-नये उपकरणों की भी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।जिले में अब रैपिड एंटिजन कीट से कोरोना का जांच की जा रही है। जिले को 1000 रैपिड एंटिजन किट उपलब्ध करायी गयी है. जिले में पहले ट्रूनेट मशीन तथा आरटीपीसीआर से जांच की जा रही थी. अब रैपिड एंटीजन कीट से भी जिले में जांच हो रही है। इसमें रैपिड एंटीजन किट को कारगर अस्त्र माना जा रहा है। यह ऐसी किट है जो 30 मिनट में टेस्ट का परिणाम दे रही है। यही कारण है कि जहां भी कोरोना वायरस का मरीज मिल रहे हैं, उसे क्षेत्र में इसी किट का इस्तेमाल कर वायरस के संक्रमण विस्तार को रोका जा रहा है।

कोरोना संक्रमण की कम समय में हो रही पुष्टि:

सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया ज्यादा पॉजिटिव मरीज मिलने का मुख्य कारण टेस्ट अधिक होना है। जिले में अब तक एक 11,000 संदिग्ध मरीजों की जांच हो चुकी है। रैपिड एंटीजन टेस्ट के कारण टेस्ट की रिपोर्ट भी जल्द आ रही है। जिले को रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए 1000 किट मिली है, जिसे तीन अनुमंडल अस्पताल में 150-150 तथा जिले के कुल 20 पीएचसी को 500 किट दिए गए हैं।रैपिड एंटीजन टेस्ट कोरोना संक्रमण की त्वरित जाँच में काफी कारगर साबित हो रही है।

रैपिड एंटीजन टेस्ट क्या है:

रैपिड एंटीजन कोरोना जांच की नई तकनीक है। इसमें संदिग्ध व्यक्ति की नाक में स्ट्रिप डालकर स्वैब का सैंपल लिया जाता है। किट में सोल्यूशन की तीन ड्राप डालकर फ्लूड के साथ मिलाया जाता है। इसमें केवल 30 मिनट में रिजल्ट आ जाता है। अगर रिपोर्ट में एक लाइन आती है तो रिपोर्ट नेगेटिव होती है।अगर लाइन दो हो जाए तो वह कोरोना पॉजिटिव माना जाता है। यह किट सबसे ज्यादा कारगार सिद्ध हो रही है।

अब जानिए कैसे होती है कोरोना वायरस की जांच:

कोरोना वायरस का संदेह है या फिर कोरोना के लक्षण जैसे बुखार, गले में खराश, बहती नाक, सांस लेने में दिक्कत है, तो सबसे पहले डॉक्टर से चेकअप कराना होगा। चेकअप किसी भी अस्पताल में करा सकते हैं। फोन पर भी सलाह ले सकते हैं। अगर डाक्टर को लगता है कि मामला कोरोना का है, तो वो जांच की सिफारिश करेंगे। कोरोना के संदिग्ध व्यक्ति का सैंपल घर से ही लिया जा रहा, जिससे वो किसी दूसरे के संपर्क में न आए। टेस्ट के लिए सैंपल लेने के दौरान भी सावधानी और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने की हिदायत दी गई है।

टेस्ट करने के चार तरीके:

• स्वाब टेस्ट: इस टेस्ट में एक कॉटन स्वाब से गले या नाक के अंदर से सैंपल लिए जाते हैं।
• नेजल एस्पिरेट: वायरस की जांच करने वाला आपकी नाक में एक सॉल्यूशन डालने के बाद सैंपल कलेक्ट कर उसकी जांच करता है।
• ट्रेशल एस्पिरेट: ब्रोंकोस्कोप नाम का एक पतला ट्यूब आपके फेफड़े में डालकर वहां से सैंपल लेकर उसकी जांच की जाती है।
• सप्टम टेस्ट: यह फेफड़े में जमा मैटेरियल या नाक से स्वाब के जरिये निकाले जाने वाले सैंपल का टेस्ट होता है।

30 मिनट के भीतर आ रहे नतीजे:

एंटीजेन टेस्ट में 30 मिनट के अंदर रिजल्ट मिल रहा है। वहीं आरटी-पीसीआर में रिजल्ट आने में 6 से 24 घंटे लग जाते हैं. तब तक तो संक्रमित व्यक्ति को पता नहीं होता कि वो पॉजिटिव है और वो कई लोगों को वायरस फैला चुका होता है। रैपिड एंटीजन में आधे घंटे के अंदर ही रिपोर्ट सामने आ जाती है, ऐसे में शख्स को आइसोलेट किया जा सकता है। संक्रमित शख्स को अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है।

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