डब्ल्यूएचओ ने कहा, कोरोना पॉजिटिव मां के दूध से बच्चे को ख़तरा नहीं
जांच रिपोर्ट में मां के दूध में वायरस के कोई लक्षण नहीं
स्तनपान नहीं कराने से बच्चा दूसरी बीमारी का हो सकता है शिकार
मधुबनी/
24 जुलाई
कोरोना वायरस को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह के भ्रम हैं. इस वजह से लोग बहुत सारे आवश्यक काम भी डर-डरकर कर रहे हैं. एक भ्रम यह भी है कि स्तनपान कराने से बच्चे को कोरोना हो सकता है. मौजूदा प्रमाण के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कोरोना पॉजिटिव मां के दूध से बच्चे को खतरा नहीं है. इसलिए नवजात को स्तनपान कराना मां को नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से दूसरी समस्या हो सकती है। जिससे बच्चों को अधिक ख़तरा हो सकता है जिन्हें नियमित स्तनपान के जरिये रोका जा सकता है.
जांच रिपोर्ट में मां के दूध में वायरस के कोई लक्षण नहीं: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है, अब तक हम मां के दूध यानी ब्रेस्टमिल्क में किसी लाइव वायरस का पता नहीं लगा पाए हैं. इस कारण मां से बच्चे में कोरोना संक्रमण फैलने का जोखिम साबित नहीं किया जा सका है. डबल्यूएचओ का मानना है कि जिन माओं के कोरोना संक्रमित होने का शक है या फिर जिनके संक्रमित होने की पुष्टि हो गई है उन्हें बच्चे को दूध पिलाने के लिए उत्साहित किया जाना चाहिए. अगर मां की तबीयत वाकई में बहुत ख़राब नहीं है तो नवजात को मां से दूर नहीं किया जाना चाहिए.
मां का दूध सर्वोत्तम आहार: सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया जन्म के शुरुआती 1 घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान कराना जरूरी होता है. इसके बाद 6 माह तक शिशु को केवल माँ का ही दूध दिया जाना चाहिए. उसके अलावा पानी भी नही देना चाहिए. इससे शिशुओं के रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है और वे स्वस्थ्य रहते हैं. 6 माह के बाद शिशुओं को ऊपरी आहार दिया जा सकता है.
स्तनपान से पहले माँ लगाए मास्क: सिविल सर्जन डॉ. झा ने बताया कोरोना पॉज़िटिव मां अगर नवजात शिशु को दूध पिलाना चाहे तो शिशु को छूने से पहले उसे अच्छे से हाथ धोने तथा मुंह ढंकने के लिए कहा जाना चाहिए और नियमित रूप से आसपास की सतहों को साफ और संक्रमणमुक्त करना चाहिए जिससे बच्चे का संक्रमण से बचाव हो सके.
बच्चों के खानपान से जुड़ी इन बातों का जरूरी रखें ध्यान:
• जन्म के शुरुआती 1 घण्टे में नवजात को कराएं स्तनपान
• 6 माह तक सिर्फ शिशु को कराएं स्तनपान (ऊपर से कुछ भी न दें। पानी भी नहीं).
• स्तनपान को कम से कम 2 साल तक जारी रखें.
• 6 माह पूर्ण होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ संपूरक आहार देना शुरू करें.
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