‘निरन्तर जारी है एमएसयू का बाढ़ राहत अभियान’
‘सरकारी लूट खसोट का उत्सव है बाढ़ -एमएसयू
महाशय
विदित हो कि मिथिला स्टूडेंट यूनियन जो कि पिछले 5 साल से संपूर्ण मिथिला क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन, क्षेत्र एवं छात्र के विकास के लिए संघर्षरत सँगठन है।
सालों से बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर मिथिला एक बार फिर से बाढ़ के आगोश में है। मिथिला क्षेत्र के दरभंगा मधुबनी सुपौल सीतामढ़ी जैसे जिलों के कई सारे प्रखंड बाढ़ से घिरे हुए हैं। एमएसयू का विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों में सामने आकर मिथिलावासियों के मदद करने और उनके लिए खड़े होने का इतिहास रहा है। बात चाहे 2017 के बाढ़ की हो या फिर 2019 के बाढ़ की या फिर कोरोना महामारी की, सँगठन सभी परिस्थितियों में आम मैथिलों के सेवार्थ सदैव तत्पर रही है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मिथिला स्टूडेंट यूनियन की टीम पूरे दमखम और ऊर्जा के साथ एकबार फिर से बाढ़ पीड़ित विभिन्न इलाकों में राहत अभियान में जुटी हुई है। संगठन लगातार लोगों से सहयोग लेकर भिक्षाटन कर दुरूह स्थानों पर जाकर विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए बाढ़ राहत अभियान चला रहा है।
दरभंगा जिला के केवटी, जाले, सदर, हायाघाट, घनश्यामपुर, किरतपुर, कुशेश्वरस्थान, मनीगाछी, अलीनगर, गौराबौराम के अनेक हिस्सों में बसे लोग बाढ़ से त्रस्त हैं। सरकार और सिस्टम पूरी तरीके से फेल हो चुका है। सँगठन के सेनानियों द्वारा पिछले 4 दिनों से केवटी प्रखंड के विभिन्न गाँव जहाँ बाढ़ की स्थिति गंभीर है यथा – नयागांव, बनसारा, रजौरा। हायाघाट प्रखंड के सिरनिया, रुस्तमपुर अकराहा, तथा सदर प्रखंड के बलहा, भूस्कौल, अतिहर गाँव मे बाढ़ राहत अभियान चलाया जा रहा है। शीघ्र ही इसे घनश्यामपूर, किरतपुर, जाले एवं मनीगाछी प्रखंड में भी शुरू किया जाएगा। राहत सामग्री के तौर पर चूड़ा-मुरही, गुड़, नमकीन, मोमबत्ती, माचिस, नमक, चीनी इत्यादि बाँटा जा रहा है। साथ ही मधुबनी के झंझारपुर, मधेपुर प्रखंड क्षेत्र के अनेक गाँवों एवं सुपौल जिला के निर्मली-मरौना प्रखंड क्षेत्र के गांवों में भी लगातार बाढ़ राहत अभियान चलाया जा रहा है।
संगठन के माध्यम से चल रहा है अभियान के संदर्भ में मिथिला स्टूडेंट यूनियन यूनियन के बिहार प्रभारी शिवेंद्र वत्स कहते हैं कि हमारे द्वारा दिए गए राहत सामग्री किसी परिवार को हुए बाढ़ से हुए परेशानी और नुकसान की क्षतिपूर्ति नहीं कर सकता है परन्तु पिछले 5 महीने से कोरोना महामारी संकट और अब बाढ़ से जूझ रहे लोग हताश हो चुके हैं, सरकार और सिस्टम की नीतिगत और ज़मीनी असफलताओं को देख इन सबों से उनका भरोसा उठ चुका है। इन परिस्थितियों में उनको सार्वधिक आवश्यकता मानसिक तौर पर सहारा-विश्वास दिलाने की है। हम लगातार क्षेत्र से लोगों से सहयोग इकट्ठा कर भिक्षाटन कर राहत सामग्री जुटा कर दुरूह परिस्थितियों का सामना कर गांव-गांव पहुंचा रहे हैं। यह अभियान निरंतर चलता रहेगा। वर्तमान में यह अभियान दरभंगा, मधुबनी और सुपौल जिला में चल रहा है, आवश्यकता पड़ने पर इसे और विस्तार दिया जाएगा।
वहीं एमएसयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरज कुमार झा कहते हैं कि बाढ़ हमारे यहाँ एक रूटीन घटना के रूप में घटित हो रही है। सरकार इसके स्थायी समाधान के लिए कोई दूरगामी नीति नहीं बना रही और प्रतिवर्ष बाढ़ राहत के नाम पर राशि से लेकर सामग्री तक का बंदरबांट और घोटाले का खेल किया जाता है। अयोग्य लोग सत्ता में काबिज हैं, इनके भीतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और दृढ़ता के अभाव के कारण आजादी के 70 साल बाद भी आज मिथिला क्षेत्र बाढ़ग्रस्त है। प्रतिवर्ष हजारों करोड़ के जानमाल का नुकसान होता है, सैकड़ों जाने जाती है, क्षेत्र का आधारभूत संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, सड़कें ध्वस्त होती है परंतु सरकार बाढ़ के आपदा को लूट खसोट के अवसर के रूप में देखती है और सिस्टम- सत्ता में बैठे लोग बाढ़ राहत के नाम पर हजारों करोड़ का घोटाला करने के लिए प्रतिवर्ष इस घोटाला-उत्सव रूपी बाढ़ को आमंत्रित करते हैं। साल दर साल बाढ़ आने की वजह से मिथिला के किसान दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं लेकिन सरकार बाढ़ के स्थायी समाधान करने में विफल रही है। यदि मजबूत इच्छाशक्ति और बेहतर कार्ययोजना हो तो बाढ़ का स्थाई समाधान कोई बड़ी बात नहीं है।
बाढ़ राहत अभियान में दरभंगा जिलाध्यक्ष अभिषेक कुमार झा, वरिष्ठ कार्यकर्ता सागर नवदिया, पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता विद्याभूषण राय, संत कुमार, सैयद जफर, अंकित झा, कुंदन कुमार, अभिषेक मिश्रा, विनीत शेखर, प्रवीण कुमार झा, अमित मिश्रा, दीपक झा, अभिजीत कश्यप , राजकिशोर झा अनीश चौधरी दीवाकर मिश्रा समेत दर्जनों कार्यकर्ता-पदाधिकारी निरन्तर जुटे हुए हैं।
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