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बिहार पटना बाढ़ और कोरोना की दोहरी मार झेलती उत्तर बिहार को आपदा क्षेत्र घोषित करे बिहार सरकार -आप 

 

बाढ़ और कोरोना की दोहरी मार झेलती उत्तर बिहार को आपदा क्षेत्र घोषित करे बिहार सरकार -आप

बिहार के प्रदेश अध्यक्ष सुशील सिंह ने उत्तरी बिहार के 12 जिलों (सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल,किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, खगड़िया, सारण, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण एवं समस्तीपुर )को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग बिहार सरकार से की है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बाढ़ विकराल रूप धारण कर लिया है । खासकर कोसी, गंडक जैसी नदियों ने इन क्षेत्रों में तबाही मचाकर रख दी है। लोगों को न रहने का ठिकाना है और न ही खाने की कोई व्यवस्था। बाढ़ की स्थिति से मुकाबला करना इनके लिए सम्भव नहीं है। न जाने कितने दिनों से लोग भूखे हैं ? रात भर लोग हाईवे पर सोने को मजबूर हैं। बिहार के मुख्यमंत्री से उन्होंने अपील किया है कि आप खुद हवाई सर्वे कर वस्तुस्थिति का आकलन करें कितने लोग बाढ़ में फँसे हुए हैं ? उन्होंने बाढ़ राहत सामग्रियों के वितरण के लिए केंद्र की सहायता लेकर हेलिकॉप्टर से अविलंब पहुँचाने की माँग भी की है । साथ ही कहा है कि 10 लाख से भी ज्यादा लोग इस बाढ़ की तबाही से प्रभावित है। उन्होंने आशंका जताई है कि हजारों लोग फँसे हुए हैं, जिन्हें उचित ठिकानों तक नहीं पहुंचाई गई है । इन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुँचाने के लिए NDRF की ज्यादा से ज़्यादा टीमों को बुलाया जाय।

उन्होंने कहा कि लोग बेघर हो गए हैं । जान माल की काफी क्षति हुई है। बाढ़ में डूबने से 21 लोगों की मृत्यु हो गई है,जो काफी चिंता की बात है। मौतों की संख्या इससे भी कहीं ज़्यादा हो सकती है लेकिन सरकार इस आंकड़े को छुपाना चाहती है ।

किसानों के सारी फसलें बर्बाद हो गई है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा ने कितना चल अचल संपत्ति का नुकसान किया है ? इसका सही सही अनुमान लगाना मुश्किल सा हो गया है ।

सुशील सिंह ने आगे कहा है कि बाढ़ के आने से इन क्षेत्र के लोगों को विषैले सांपों के दंश भी  झेलना पड़ता है। इस क्षेत्र के लोगों को इन साँपों के काटने से कई लोगों के मौत होने की आशंका जताई है ।उन्होंने इन क्षेत्रों में जहरीले साँप और बिच्छू के दवाई की भी तत्काल उपलब्ध कराने की मांग बिहार सरकार से की है।

उन्होंने कहा कि एक तो कोरोना जैसी महामारी तो दूसरी ओर बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा। दो तरफा मुशीबत ये लोग कैसे झेल पाएँगे ? जो लोग बिना घर के हो गए हैं और जान माल को बचाने के लिए कम जगह में सामूहिक रूप से रहने को विवश हैं, वो सोशल डिस्टेंसिग का पालन कैसे करेंगे ?

इस समस्या के निदान के लिए विशेष रूप से केंद्र सरकार को दखल देने की मांग आम आदमी पार्टी बिहार करती है। अगर ऐसा नहीं होती है तो आम आदमी पार्टी,बिहार लॉक डाउन को नजरअंदाज कर जनता के हित में जनाक्रोश मार्च निकालने को बाध्य होगी ।

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