दरभंगा मानव अधिकार युवा संगठन भारत के बिहार प्रदेश कानूनी सलाहकार सह अधिवक्ता उदय लाल देव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि डीएमसीएच में लोगों के जान के साथ हो रहा एक खिलवार
। बिहार प्रदेश के अस्पतालों में से एक डीएमसीएच दरभंगा भी अपने आप में संस्थान हैं। लोग आंख मूंदकर पूरे विश्वास के साथ जीवन बचाने के लिए डीएम से आ जाते हैं। लेकिन यहां की चरमराई व्यवस्था एवं डॉक्टरों की अनुपस्थिति और उदासीनता यहां आए लोगों की जान ले रहा है। साधारण एवं अन्य किसी से बीमारी का इलाज कराने आए व्यक्ति को आंख मूंदकर कोरोना ग्रसित बता कर उसके संबंधित आइसोलेशन सेंटर में भेज दिया जाता है। तथा जब रिपोर्ट आता है तो उस व्यक्ति का समुचित इलाज के अभाव में जान चली जाता है। जो डॉक्टर की अनुपस्थिति उदासीनता लापरवाही चरमराई व्यवस्था साबित हो रहा है। जैसे दरभंगा बाजार समिति के कृष्णा ट्रेडर्स के प्रोपराइटर मिथलेश कुमार अपने डायबिटीज से संबंधित बीमारी जिन्हें हल्का बुखार भी था इलाज कराने आए थे। उनकी एक भी बात नहीं सुनी सस्पेक्ट वार्ड में रख दिया गया तथा उन्हें समुचित इलाज और दवा नहीं दी गई। और उनकी मृत्यु 27 जुलाई 2020 को हो गई। जबकि पूरा रिपोर्ट बाद में नेगेटिव आई। पता नहीं इस तरह के कितने आम लोगों की जान गई होगी ठीक उसी प्रकार उचित देखभाल एवं व्यवस्था के अभाव में ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से एक व्यक्ति ने डीएमसीएच में छटपटा कर दम तोड़ दिया। जिससे मानव अधिकार के साथ साथ जीवन जीने की स्वतंत्रता का भी अधिकार हनन खुलेआम हो रहा है। सरकार और अस्पताल प्रशासन को इस तरह के हो रहे घटना का संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करनी चाहिए और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने के लिए आश्वस्त किया जाना चाहिए।
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