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दरभंगा बरसात में संक्रमण का खतरा ज्यादा, गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानी

बरसात में संक्रमण का खतरा ज्यादा, गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानी

– साफ-सफाई और खानपान में लापरवाही से बच्चे की सेहत पर भी पड़ सकता है असर

– कोरोना संक्रमण के दौर में बरतें सावधानी,
स्वास्थ्य समस्या होने पर लें डॉक्टर की सलाह

दरभंगा। 6 अगस्त

गर्भावस्था में एक महिला की जिम्मेदारी दोहरी हो जाती है। सेहत का ख्याल सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का भी रखना पड़ता है। इसलिए खानपान से लेकर रहन-सहन तक में संयम बरतना जरूरी होता है। अभी बरसात का मौसम है। इस समय हर तरफ नमी के कारण बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है, जो महिला और उसके शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। खानपान के अलावा पीने के पानी की शुद्धता के मामले में ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।

डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं :

डीएमसीएच के वरीय चिकित्सक डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि पीने के पानी की स्वच्छता के मामले में यदि कोई असावधानी होती है, तो कई तरह के रोग शरीर को घेरने में देर नहीं लगाते। ज्यादातर चिकित्सकों का भी यही कहना है कि गर्भवती महिलाओं को स्वच्छ पानी ही पीना चाहिए। मानसून में दूषित जल से कई बीमारियों का खतरा होता है। इसलिए हमेशा पानी को अच्छी तरह से उबाल कर , ठंडा कर ही पिएं । गर्भावस्था में महिलाओ को डिहाईड्रेशन यानि निर्जलीकरण की समस्या भी आम होती है। इसलिए कुछ कुछ अंतराल पर पानी पिएं।

गर्भावस्था में लें स्वच्छ और पौष्टिक आहार :

बरसात के मौसम में गर्भवती महिलाओ को अपने खानपान की स्वच्छता का विशेष ध्यान देना चाहिए। खाने-पीने में की गई लापरवाही जोखिम भरा हो सकती है। इस मौसम में गर्भवती महिला को जरूरी विटामिन, खनिज, कैल्शियम, प्रोटीन और कैलोरी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। दूषित स्ट्रीट फूड से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जहां तक हो सके स्ट्रीट फ़ूड से दूर रहें। गर्भावस्था में इम्यूनिटी आमतौर पर सामान्य से कम हो जाती है, इसलिए महिलाएं बड़ी आसानी से संक्रमण का शिकार हो जाती हैं। गर्भावस्था में ताजे फल और घर का बना ताजा खाना ही खाना चाहिए।

कोरोना काल में ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत :

कोरोना संक्रमण के दौर में गर्भवती महिलाओं को और भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। इस समय घर से बाहर निकलना खतरनाक साबित ही सकता है। जरूरी काम से या चिकित्सक से मिलने बाहर जाना पड़े तो, मास्क पहनकर निकलें। लोगों से 2 गज की दूरी बनाकर रखें, खासकर अस्पताल में बीमार व्यक्तियों से दूर रहें। बारिश के गंदे पानी से इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है, इसलिए हाथ और पैरों की सफाई का भी खास ख्याल रखना चाहिए। सारे काम हाथों से शुरू होते हैं। इसलिए उसका साफ रहना बहुत जरूरी है, ताकि वह गंदगी पेट में जाकर बच्चे को नुकसान ना पहुचाएं। बाहर आने-जाने पर सेनिटैजेर भी साथ रखना चाहिए। घर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना जरूरी है।

आरामदायक कपड़े पहनें :

मानसून के दौरान हवा में नमी के कारण बारिश के बाद आद्रता बढ़ने लगती है, जिससे ज्यादा पसीना आता है। गर्भवती महिलाओ में ज्यादा पसीना आने से डिहाईड्रेशन की समस्या हो सकती है। इसीलिए ढीले-ढाले आरामदायक कपड़े पहनने चाहिए। सिंथेटिक कपड़े पहनने से भी ज्यादा पसीना आ सकता है, इसीलिए ऐसे पहनावे से बचें। भूलकर भी नंगे पाव बाहर ना जाएं। रबड़ के जूते पहनने से फिसलने का डर होता है, इसलिए हमेशा अच्छी ग्रिप वाले चप्पल-जूते पहनने चाहिए।

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