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मधुबनी फ्रंटलाइन कोविड 19 वर्कर का होगा रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट – आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक एलिसा अाईजीजी विधि से होगी जांच

फ्रंटलाइन कोविड 19 वर्कर का होगा रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट

– आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक एलिसा अाईजीजी विधि से होगी जांच

– टेस्ट के लिए जिले को 200 एलिसा एलजीजी किट हुए आवंटित

मधुबनी, 6 अगस्त

कोरोना संक्रमण के जोखिम के बीच अपना फर्ज निभा रहे लोगों (फ्रंटलाइन कोविड 19 वर्कर) की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में अब आईसीएमआर की गाइडलाइन के आधार पर इनकी एलिसा अाईजीजी विधि से रैपिड एंटीबॉडी जांच करने का निर्णय लिया गया है। इसमें हेल्थ केयर वर्कर, सरकारी कार्यालयों के कर्मी, बैंक कर्मी और अन्य जरूरी सेवाओं में कार्यरत कर्मी शामिल हैं। इस बाबत डॉ नवीन चंद्र प्रसाद, निदेशक प्रमुख रोग नियंत्रण लोक स्वास्थ्य पारा मेडिकल ने सभी जिलों के जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को पत्र लिखकर निर्देश दिया है।

जिले को 200 एलिसा अाईजीजी किट आवंटित:

राज्य के सभी जिलों में एलिसा अाईजीजी किट आवंटित किए गए हैं, जिसमें मधुबनी जिले को 200 किट उपलब्ध कराए गए हैं। सैंपल कलेक्शन, स्टोरेज एवं ट्रांसपोर्टेशन आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार किया जाएगा। टेस्ट किट के लिए 2- 8 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होगी। एलिसा टेस्ट के लिए संबंधित व्यक्ति का 5 एमएल ब्लड सैंपल के लिए लिया जाएगा। एलिसा जांच के लिए मधुबनी स्वास्थ्य विभाग को (आरएमआरआई) राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट पटना से टैग किया गया है। एलिसा टेस्ट के लिए लक्षित व्यक्तियों/ संस्थाओं को चिन्हित करने का कार्य जिलाधिकारी के आदेशानुसार किया जाएगा।

क्यों जरूरी है रैपिड एंटी बॉडी टेस्ट :

शोध करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि एक नए वायरस से लड़ने के लिए सबसे ज़रूरी संक्रमण का स्तर पता लगाना होता है। जब तक वायरस का इलाज नहीं मिल जाता, तब तक आंकड़े ही दवाई की तरह काम करते हैं। इसी के आधार पर वैज्ञानिक और सरकार फैसले लेते हैं कि उन्हें किस तरह के कदम उठाने हैं, क्या छूट देनी है, कहां-कितनी रियायत देनी है। कोरोना के संक्रमण के मामले में भी ठीक ऐसा ही है। यहाँ भी किसी भी तरह का फ़ैसला लेने के लिए आंकड़ों की बहुत ज़रूरत है। सिविल सर्जन सुनील कुमार झा ने बताया कि एलिसा किट से यह स्पष्ट होगा कि किसके शरीर में संक्रमण पूर्व से हो चुका है और किस में संक्रमण होने की संभावना है। यह एक नई विधि है। जैसे ही किट उपलब्ध होगी, निर्देशानुसार जांच शुरू कर दी जाएगी।

कैसे किया जाता है एलिसा अाईजीजी टेस्ट :

इसमें मरीज की उंगली में सूई चुभोकर खून का सैंपल लिया जाता है, जिसका परिणाम भी 15 से 20 मिनट में आ जाता है। एंटीबॉडी टेस्ट को ही सेरोलॉजिकल टेस्ट कहा जाता है। यह जेनेटिक टेस्ट के मुकाबले काफी सस्ता होता है। रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेस रीयल-टाइम पोलीमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) यानी जेनेटिक टेस्ट में नौ घंटे में रिजल्ट मिलता है। पीसीआर टेस्ट शुरुआती दौर में संक्रमण का पता तभी लगा सकता है, जब वायरस के संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी डेवलप हो चुका हो। इसलिए एंटी बॉडी टेस्ट में जो पॉजिटिव आते हैं, उनमें संक्रमण का सही से पता लगाने के लिए जेनेटिक टेस्ट यानी पीसीआर टेस्ट के लिए भेजा जाता है।

विशिष्ट आवश्यकता के आधार पर संभावित समूहों के लिए भी होगा टेस्ट :

पत्र में बताया गया है कि एलिसा टेस्ट का उपयोग डॉक्टर, नर्स एवं सहायक कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मी, फार्मासिस्ट, क्लर्क, थर्मल स्क्रीनिंग करने वाले, प्रेस रिपोर्टर, दैनिक कार्य करने वाले मजदूर, प्रवासी मजदूर, निगम कर्मचारी, एंबुलेंस ड्राइवर, बैंक कर्मी, डाक कर्मी, कूरियर स्टाफ, कैदी, टीवी मरीज, डायलिसिस मरीज की भी प्राथमिकता के आधार पर टेस्टिंग करनी है। बफर एवं कंटेंटमेंट जोन में भी जांच करने हैं।

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