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विद्यापति सेवा संस्थान ने मनाई गांधी, शास्त्री व मधुप की जयंती अजित कुमार सिंह की रिपोर्ट

विद्यापति सेवा संस्थान ने मनाई गांधी, शास्त्री व मधुप की जयंती

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री और मैथिली के मूर्धन्य साहित्यकार काशी कांत मिश्र मधुप की जयंती शुक्रवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में मनाई गई। एमएमटीएम काॅलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में तीनों महान विभूतियों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
मौके पर इन विभूतियों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि राष्ट्रपिता बापू ने सादगी, सच्चाई और अहिंसा के मार्ग पर चलकर जहाँ देश की आजादी के आंदोलन में अपनी ऐतिहासिक और निर्णायक भूमिका निभाई। वहीं शास्त्री जी ने युद्ध के कठिन हालात में देश का नेतृत्व संभालते हुए देशवासियों को जय जवान−जय किसान का प्रेरणादायी नारा देकर देश के सभी नागरिकों में राष्ट्रीयता का अभूतपूर्व संचार किया।
उन्होंने कहा कि आज जबकि देश और दुनिया में नक्सलवाद, आतंकवाद, युद्ध, हिंसा और प्रतिहिंसा के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे कठिन दौर में गांधी व शास्त्री के आदर्श और सिद्धांत सबके लिए प्रासंगिक हो गये हैं। इसी तरह मैथिली साहित्य जगत की अपनी रचनाओं से श्रीवृद्धि करने वाले मधुप जी हमेशा याद किए जाते रहेंगे।
जयंती सभा की अध्यक्षता करते हुए मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने कहा कि दो अक्टूबर का दिन भारत और मिथिला के लिए काफी खास मायने रखता है। क्योंकि इस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और मिथिला के लाल मधुप जी के रूप में भारत व मिथिला के तीन ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया, जिन्होंने देश व समाज को नया जीवन और नई पहचान दी। सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले इन तीनों महापुरुषों ने दुनिया को जता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वो कोई भी मंजिल बड़ी ही सहजता से पाई जा सकती है।
संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ बुचरू पासवान एवं साहित्यकार डाॅ महेन्द्र नारायण राम ने गांधी, शास्त्री व मधुप को सादगी की प्रतिमूर्ति बताते हुए उनकी जयंती पर उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। सचिव प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि महात्मा गांधी यदि त्याग और बलिदान की मूर्ति थे तो, सादा जीवन-उच्च विचार शास्त्री के जीवन का आदर्श था। वहीं मातृभूमि एवं मातृभाषा के प्रति विशेष अनुराग को लेकर मधुपजी आम जनमानस में सदैव प्रेरणा के स्त्रोत बने रहेंगे।
एमएलएसएम कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डाॅ अनिल कुमार झा ने कहा कि अहिंसा और सादगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व के प्रमुख अलंकार थे। वहीं साहित्य के माध्यम से समाज को आईना दिखाने में आजीवन लगे रहने वाले मधुप जी की रचनाएँ आज भी आमजन को एक गौरवशाली जीवन की प्रेरणा देते हैं।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि का गांधी, शास्त्री व मधुप-तीनों महापुरुषों ने अपने जीवन में कई आदर्श स्थापित किए हैं। गांधी ने यदि सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया तो शास्त्री ने हमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने की कला सिखाया। वहीं, मधुप की रचनाएं मैथिली साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।
महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने तीनों महान विभूतियों के प्रेरणादायी जीवन गाथा को देश, दुनिया और समाज के लिए अमूल्य विरासत बताया। मौके पर एमएमटीएम काॅलेज के प्रधानाचार्य डॉ उदय कांत मिश्र, प्रो विजय कांत झा, डॉ गणेश कांत झा, विनोद कुमार झा, डॉ सीएम झा पड़वा, प्रो चन्द्र शेखर झा बूढाभाई, आशीष चौधरी आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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