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• विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डॉ मोना शर्मा हुई “मिथिला रत्न” से सम्मानित 

 

• विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डॉ मोना शर्मा हुई “मिथिला रत्न” से सम्मानित

 

• संस्कृत विभाग में हर्ष का माहौल, सहकर्मियों ने दी बधाइयां, मिठाई खिलाकर दी शुभकामनाएं

पंडित हरि नारायण झा तथा पं. शिव नारायण झा शैक्षणिक एवं सामाजिक न्यास द्वारा समिति, हाटी, सरिसपाही, मधुबनी के वार्षिकोत्सव के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत की प्राध्यापिका डॉ मोना शर्मा को “मिथिला रत्न” से सम्मानित किया गया। इस सम्मान से संस्कृत विभाग में हर्ष का माहौल बन गया, सहकर्मियों ने उन्हें बधाई दी तथा मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दी। डॉ मोना शर्मा की शिक्षा-दीक्षा तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से हुई। एम ए, नेट, पीएचडी एवं साहित्याचार्य से विभूषित डॉ मोना शर्मा को उनके शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए न्यास द्वारा “मिथिला रत्न” से विभूषित किया गया। डॉ शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “मिथिला रत्न सम्मान” को प्राप्त करके बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। अब मेरा कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व और भी अधिक बढ़ गया है। मिथिलावासियों का जो अपार प्रेम, स्नेहाशीष एवं सौहार्द्रता की भावना और विश्वास मुझको मिल रहा है, उसे बनाए रखने के लिए अपने कार्य क्षेत्र के प्रति मैं और भी कटिबद्ध रूप से संलग्न रहुंगी। यह मिथिला नगरी जो विदेहराज राजर्षि जनक, माता जानकी की भूमि, दार्शनिक महर्षि याज्ञवल्क्य, गार्गी, मैत्रेयी, कात्यायनी, उदयनाचार्य, वाचस्पति मिश्र, मण्डन मिश्र, भारती, महर्षि कपिल, विद्यापति, नागार्जुन जैसी महान् विभूतियों से विभूषित है, इस पावन धरती का मैं सदैव वन्दन एवं नमन करती हूं। मैं अपने बाल्यकाल से ही अपने कर्म के सिद्धांतों पर ही चलती रही हूं। इस सफलता से मेरे माता-पिता, गुरुजन प्रो लक्ष्मीश्वर झा, भाई-बहन सोनी कुमारी, ज्योतिन्द्र कुमार, दीपक कुमार एवं कोमल कुमारी ने भी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। संस्कृत विभाग में भी खुशी की लहर दौड़ गई और सबने बधाइयां दी। विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकान्त झा ने बधाई देते हुए कहा कि मैं डॉ मोना शर्मा के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना देता हूं। डॉ आर एन चौरसिया ने भी बधाई देते हुए कहा कि डॉ मोना बहुत ही कर्मठ व्यक्तित्व की हैं जो अपने कर्म का निर्वाह भली-भांति कर रही हैं। डॉ ममता स्नेही ने भी बधाई देते हुए कहा कि मैं अपनी सहकर्मी के उत्कर्ष की सफलता पर इन्हें बहुत बधाइयां देती हूं। ये आगे इसी तरह जीवन में उन्नति करते रहे यही शुभकामना है। विभागीय कर्मियों में मंजू अकेला, योगेन्द्र पासवान, उदय कुमार उदेश ने भी बधाइयां दी। राजनीतिशास्त्र के डॉ मनोज कुमार, मैथिली विभाग की डॉ सुनीता कुमारी, जी डी कॉलेज के प्रो लाल बहादुर सिंह, डॉ सहर अफरोज, डॉ शशिकांत पांडे, प्रो दिनेश, डॉ रीना, डॉ प्रेमविजय, डॉ श्रवसुमि, डॉ अमरदीप, डॉ अमिय कृष्ण, डॉ प्रीतम, डॉ ममता सुमन एवं डॉ माहताब सहित कॉलेज के समस्त कर्मियों ने बधाईयां दीं। वहीं एसबीएसएस कॉलेज, बेगूसराय से भी बधाइयां देने वालों में प्रधानाचार्य डॉ अवधेश सिंह, दीपक कुमार विश्वकर्मा, डॉ कुमारी रंजना, डॉ गुड़िया, डॉ रोली, डॉ स्वाति, डॉ महालक्ष्मी, डॉ रुचि, डॉ सोनाली, डॉ आरुणि, प्रो धनंजय, डॉ सुमित, डॉ विवेक आदि शामिल हैं। डॉ मोना शर्मा के साथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो देवनारायण झा तथा विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ शिवानंद झा की सुपुत्री एवं जूनियर जज, सिविल कोर्ट, भागलपुर की शिल्पा रानी को भी यह सम्मान दिया गया।

ज्ञातव्य है कि उक्त सम्मान विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो जीवानन्द झा तथा संस्कृत-प्राध्यापिका डॉ ममता स्नेही को भी मिल चुका है।

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