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समस्तीपुर गोदभराई रस्म: सुपोषित माँ से गूंजेगी आँगन में स्वस्थ शिशु की किलकारी • गृहभ्रमण कर एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों पर हुई गोदभराई की रस्म • संवाददाता अजित कुमार सिंह

गोदभराई रस्म: सुपोषित माँ से गूंजेगी आँगन में स्वस्थ शिशु की किलकारी

• गृहभ्रमण कर एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों पर हुई गोदभराई की रस्म

• कोविड 19 सुरक्षा मानकों का किया गया अनुपालन

समस्तीपुर। जिले के आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बुधवार को गोदभराई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सात से नौ महीने की गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गयी। कोविड 19 के संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों का सख्ती से अनुपालन किया गया और उत्सवी माहौल में गोदभराई की रस्म जिले में आयोजित की गयी। इस दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों के देखभाल को लेकर कई जानकारी भी दी गयी।

उत्सवी माहौल में की गयी गोदभराई:
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के केन्द्रो पर गर्भवती महिलओं को लाल चुनरी ओढा कर एवं माथे पर लाल टीका लगा कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महिलओं को विभिन्न व्यंजनों में शामिल सतरंगी फल, सूखे मेवे भी भेंट दी गयी। इस दौरान पोषक आहार में फल और मेवे का वितरण हुआ। साथ ही गर्भावस्था के दौरान पोषक आहार सेवन के विषय में गर्भवतियों को भी जागरूक किया गया।

बेहतर पोषण एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में सहायक:
डीपीओ ममता वर्मा ने कहा कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए पांच सूत्र बताए गए हैं। पहले सुनहरे 1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। जिसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म से दो साल तक की उम्र तक की अवधि शामिल है। इस दौरान बेहतर स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा एवं तनाव मुक्त माहौल तथा सही देखभाल बच्चों के पूर्ण विकास में सहयोगी होता है। उन्होंने बताया गोदभराई का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के आखिरी दिनों में बेहतर पोषण की जरूरत के विषय में गर्भवतियों को अवगत कराना है। माता एवं गर्भस्थ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य एवं प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं में कमी लाने लाने के लिए गर्भवती के साथ परिवार के लोगों को भी अच्छे पोषण पर ध्यान देना चाहिए। बेहतर पोषण एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में सहायक होने के साथ गर्भवती महिलाओं में मातृ मृत्यु दर में कमी भी लाता है।

आखिरी महीनों में जरुरी है बेहतर पोषण:
पोषण अभियान के जिला समन्वयक निशू कर्ण ने बताया गर्भ के आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा होना जरुरी होता है। इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है। इसके साथ महिलाएं अपने घर में आसानी से उपलब्ध भोज्य पदार्थों के सेवन से भी अपने पोषण का ख्याल आसानी से रख सकती हैं। हरी साग-सब्जी, सतरंगी फल, दाल, सूखे मेवे एवं दूध के सेवन से आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति आसानी से की जा सकती है।

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