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गोवा की पूर्व राज्यपाल व मिथिला की बेटी मृदुला सिन्हा के निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने जताया शोक

गोवा की पूर्व राज्यपाल व मिथिला की बेटी मृदुला सिन्हा के निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने जताया शोक

एडिटर अजित कुमार सिंह DN 24 LIVE

गोवा की पूर्व राज्यपाल व मिथिला की दुलरी बेटी मृदुला सिन्हा के निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने शोक जताया। बृहस्पतिवार को उनके निधन पर शोक जताते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने उनके निधन को देश के लिए अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा कि मिथिला की दुलारी बेटी मृदुला सिन्हा नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल होने के साथ ही जमीन से जुड़ी शख्सियतों में एक थी। अपने मिलनसार स्वभाव के कारण अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक में सर्वप्रिय मृदुला सिन्हा को आम मैथिलानी की तरह लोकगीत व लोकोक्ति से विशेष लगाव था। अनेक उच्च पदों पर आसीन होने के बावजूद जमीन से जुड़े नेता के रूप में वह हमेशा याद की जाएंगी।
मैथिली साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि लोकजीवन से गहरा लगाव रखने वाली सरल स्वभाव की विलक्षण महिला के रूप में वह हमेशा जीवंत बनी रहेंगी। संस्थान के सचिव प्रो जीव कांत मिश्र ने कहा कि राज्यपाल जैसे उच्च पद पर आसीन होने के बावजूद उनमें घमंड का लेश मात्र नहीं था। यही कारण रहा कि उन्हें अक्सर प्रोटोकॉल को तोड़कर लोगों से मिलते देखा गया।
वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि वह सिर्फ साहित्यकार भर नहीं थी बल्कि, उन्होंने अपने साहित्य के जरिए नारी के दर्द, प्रेम और उसके सशक्तिकरण के बारे में जमकर लिखने के साथ ही, आजीवन उनकी खुले मन से मदद करने के लिए तत्पर रहीं। मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने अपने शोक संदेश में कहा कि हमेशा स्त्री की दशा और दिशा को रेखांकित करने के लिए चलने वाली अपनी लेखनी से जनक नंदिनी सीता के शौर्य पूर्ण जीवन पर आत्मकथ्यात्मक उपन्यास ‘सीता पुनि बोली’ की रचना कर उन्होंने सीता के व्यक्तित्व के ऐसे पहलुओं को उजागर किया, जिसकी आमतौर पर कम ही चर्चा देखने को मिलती है।
महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने कहा कि असाधारण प्रतिभा की धनी मृदुला जी के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का अभूतपूर्व संगम था। अपने कृतित्व एवं व्यक्तित्व के लिए वे हमेशा याद की जाएंगी। शोक संवेदना व्यक्त करने वाले अन्य लोगों में कवि हरिश्चन्द्र हरित, डॉ गणेश कांत झा, विनोद कुमार झा, प्रो विजयकांत झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढा भाई, डॉ उदय कांत मिश्र, आशीष चौधरी, प्रो चन्द्रमोहन झा पड़वा आदि शामिल हैं।

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