विद्यापति सेवा संस्थान ने मनाई पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की 97वीं जयंती
भारत

रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 97 वें जन्म दिवस के अवसर पर विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में शुक्रवार को एमएमटीएम काॅलेज के सभागार में जयंती समारोह का आयोजन किया गया। एमएलएसएम काॅलेज के प्रधानाचार्य डॉ विद्यानाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ डाॅ सुषमा झा द्वारा गाये कवि कोकिल विद्यापति रचित गोसाउनि गीत ‘जय जय भैरवी…’ के साथ हुआ। मौके पर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने मिथिला मैथिली के विकास में स्व वाजपेयी के योगदानों की विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें मिथिला-मैथिली का सच्चा हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि हम मिथिलावासियों के लिए यह अत्यन्त गर्व का विषय है कि जिस सदन के पहले संविधान संशोधन प्रस्ताव के तहत पंडित नेहरू ने मिथिला में जमीनदारी उन्मूलन का प्रस्ताव लाया था, उसी सदन के 100वें संशोधन के रूप में अटल जी की सरकार ने करोड़ों मिथिलावासी के माँ की भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर गौरवशाली उपहार प्रदान किया। अपने संबोधन में उन्होंने अटल के सपनों का मिथिला बनाने के लिए पृथक मिथिला राज्य के गठन को जरूरी बताया।
वैद्य गणपति नाथ झा ने कहा कि राजनेता अटल जी का मानवीय चेतना संपन्न व्यक्तित्व काव्य जगत की ओर से राजनीति को दिया गया एक अनमोल उपहार था। नाम के अनुरूप विकट आंधी-तूफान जन्य परिस्थितियों से जूझ कर देश की मान-प्रतिष्ठा तथा संस्कृति के रक्षक भारत मां के इस सपूत पर समस्त भारतवासियों को आज भी गर्व है।
डाॅ राजकिशोर झा ने कहा कि वास्तव में सागर की गहराइयों में हिलोरें लेने वाला, आकाश की ऊंचाइयों को छू लेने वाला अटलजी का बहुआयामी व्यक्तित्व एक साथ कवि, लेखक, दार्शनिक, राजनीतिज्ञ सरीखे विविध आयामों को अपने में समेटे शोभायमान था।
हरेराम झा ने स्व वाजपेयी को भारतीय दर्शन एवं सांस्कृतिक चेतना को समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए मिथिला को सब कुछ देने की चाहत रखने वाला महान व्यक्ति बताया। डॉ गणेश कांत झा ने उन्हें राजनीति का मर्यादा पुरुषोत्तम बताते कहा कि सत्ता के खेल में राष्ट्रीय एकता का बिखराव उन्हें कतई पसंद नहीं था।
एमएमटीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य झा डाॅ उदय कांत मिश्र ने कहा कि छोटी सी अवधि में ही उन्होंने देश के नाम व मिथिला की मान के लिए जो कार्य किए, इतिहास में निर्विवाद रूप से स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। प्रवीण कुमार झा ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के करीब 17 साल बीत जाने के बाद भी मैथिली भाषा में प्राथमिक शिक्षा नहीं शुरू होने पर चिंता जाहिर करते हुए लोगों का आह्वान किया कि मैथिली को मिला संवैधानिक अधिकार अब 18वें साल में प्रवेश करते हुए बालिग होने को है, ऐसे में प्राथमिकता के आधार पर पाठशाला में मैथिली भाषा मे पढ़ाई शुरू किए जाने के लिए सभी मिथिला वासी का दृढ़ संकल्प होना समय की मांग है। प्रो चन्द्रशेखर झा बूढ़ा भाई ने अपने संबोधन में मैथिली को राज-काज की भाषा बनाये जाने पर बल दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ विद्यानाथ झा ने कहा कि अनेकता में एकता का संगम अटल जी के व्यक्तित्व की पहचान थी। इनके व्यक्तित्व में कभी उनका कवि रूप मुखरित हो उठता, तो कभी दार्शनिक रूप। कभी कठोर अनुशासन प्रिय शिक्षक के रूप में दिखते, तो कभी आज्ञाकारी कर्तव्य परायण छात्र के रूप में। एक योग्य राजनीतिज्ञ होने का प्रमाण उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ सरीखे खिताबों से मिल चुका था। यही कारण था कि उम्र के लंबे दहलीज पर पहुंचने के बाद भी उनका सफर समाप्त नहीं हुआ। उनके व्यक्तित्व का निखार कभी थमने का नाम नहीं लिया।
संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा के संचालन में आयोजित जयंती समारोह में धन्यवाद ज्ञापन हरि किशोर चौधरी ने किया। मौके पर स्व वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। समारोह में नन्द कुमार झा, नवल किशोर झा, आशीष चौधरी, जय नारायण साह, गनौर पासवान, दुर्गानन्द झा, मिथिलेश झा, गुड्डू झा, रामाज्ञा झा, आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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