ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के अनुपयोगी, निर्मित, अर्द्धनिर्मित, अपूर्ण भवनों का कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा निरीक्षण किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में करोड़ों की लागत से बने लगभग एक दर्जन भवनों का निरीक्षण के उपरांत अपनी प्रतिक्रिया ब्यक्त करते हुए कुलपति प्रो सिंह ने कहा कि भवनों की स्थिति देखकर मन अत्यंत दुखी है। वर्षों से भवनों की कमी से जूझ रहे इस विश्वविद्यालय के पास लगभग पच्चीस करोड़ रुपए की लागत से दर्जन भर भवनों का निर्माण तो हुआ परन्तु एक भी भवन काम का नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकांश भवनों की अनुमानित राशि का पचहत्तर से शत प्रतिशत तक खर्च हो चुकी है, शिलापट्ट पर नाम लिखा कर उद्घाटन तक हो चुका है परन्तु भवनों में खिड़की, दरवाजे नहीं लगे हैं , बिजली के लिए वाईरिंग का कार्य नहीं हुआ है, कई के फर्स नहीं हैं तो कई के छत नहीं। 2014 ई से इनका निर्माण प्रारंभ हुआ परन्तु अद्यतन इसमें से एक भी भवन वर्तमान में उपयोग लायक नहीं है। किसी भवन में न तो पहुंच पथ है , न ही चारदिवारी ।श्यामा मन्दिर के पीछे बन रहे शिक्षक आवास की स्थिति अति दयनीय है। बिहार सरकार इन्फ़्रास्ट्रक्चर द्वारा निर्मित परीक्षा भवन की नारकीय स्थिति देखकर उन्होंने कहा कि एक ओर इस भवन का निर्माण स्थल , पहुंच पथ आदि पर बगैर ध्यान दिये ही भवन खड़ा कर दिया गया दूसरी ओर इसका रखरखाव बिल्कुल ही घटिया है। उन्होंने आश्चर्य ब्यक्त किया कि भवनों को उपयोग में आने लायक बनाये बगैर उसका उद्घाटन कैसे किया गया? लगता है भवन निर्माण से अधिक शिला पट्ट पर नाम लिखवाने में रुचि रही। इन भवनों का नक्शा भी सही ढंग का नहीं बनाया गया। निरीक्षण से पूर्व सभी भवनों का डाटा बेस बनाया गया जिसमें अनुदान देने वाली संस्था का नाम, कार्य करने वाले ठेकेदारों का नाम, कुल अनुमानित राशि,कुल भुगतान की गई राशि और भवन की वर्तमान स्थिति को सम्मिलित किया गया । कुलपति के साथ निरीक्षण के दौरान उनके साथ कुलसचिव डा मुश्ताक अहमद, कुलानुशासक प्रो अजय नाथ झा, निदेशक दूरस्थ शिक्षा निदेशालय प्रो अशोक मेहता, निदेशक ए पी जे ए के महिला प्रोद्योगिकी संस्थान के निदेशक डा यू के दास, भू सम्पदा पदाधिकारी प्रो विजय कुमार यादव, कनीय अभियंता द्वय श्री एस एम एच ईकवाल एवं श्री केशव कुमार , कुलपति के निजी सचिव डा के एन श्रीवास्तव मौजूद थे। मौके पर ही कुलपति महोदय ने दोनों कनीय अभियंताओं को निर्देशित किया है कि इन सभी भवनों को उपयोग में लाने लायक बनाने हेतु कितनी राशि की आवश्यकता होगी उसका आकलन दिनांक 10-01-2021 तक समर्पित करें। साथ ही उन्होंने कुलसचिव डा अहमद को निर्देश दिया कि आकलन प्राप्त होने के बाद इस पर अग्रतर कारवाई हेतु अभिषद की एक आकस्मिक बैठक आहूत करने का प्रस्ताव दें।
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