पाग शोभायात्रा के साथ प्रारम्भ हुआ दरभंगा महोत्सव
मुख्य

अतिथि की भूमिका में मुख्य अतिथि LNMU कुलपति, विशिष्ठ अतिथियों में डॉ मृदुल शुक्ला, गुंजन शुक्ला , मंचासीन थे
संगोष्ठी में अपना व्याख्यान रखते हुए शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ मृदुल शुक्ला ने कहा कि दरभंगा के इतिहास पर चिंतन आवश्यक है
दरभंगा, बिहार।
दरभंगा महोत्सव आयोजन समिति ने पाग शोभा यात्रा से उद्घाटन सत्र का आयोजन हुआ. पाग शोभा यात्रा झांकी की तरह मिथिला की संस्कृति को दिखाता हुआ MLSM से आयकरचौराहा होते हुए विश्वविद्यालय चौरंगी पर पहुंची.
इस पाग शोभा यात्रा का उद्देश्य मिथिला एवं दरभंगा की सांस्कृतिक परंपरा व पहचान को अक्षुण्ण रखना है. कामेश्वर नगर अवस्थित चौरंगी पर मुख्य अतिथियों ने महाराजधिराज रामेश्वर सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित और दीप प्रज्वलित कर दरभंगा के अतीत और वर्तमान के विषय पर संगोष्ठी का शुभारंभ किया.
मुख्य अतिथि की भूमिका में, विशिष्ठ अतिथियों में कुलपति LNMUडॉ एस पी सिंह , डॉ मृदुल शुक्ला, थे. कार्यक्रम के शुरुआत में मौनी बाबा के शिष्य के वेद ध्वनि से एव पसिद्ध शंखवादक बिपिन मिश्रा ने अपनी अनोखि प्रस्तुति से मनमोहाअतिथियों का मन मोहा ।
उसके बाद संतोष कुमार द्वारा लगाई गई चित्र प्रदर्शनी का निरीक्षण एवं अवलोकन मुख्य अतिथियों के द्वारा किया गया और उन्हें 150 वर्ष पूर्व खूबसूरत दरभंगा के तस्वीरों से रूबरू करा कर वर्तमान परिप्रेक्ष्य में धरोहरों की स्थिति से अवगत कराया गया.
संगोष्ठी में अपना व्याख्यान रखते हुए शहर के कुलपति एस पी सिंह कहा कि दरभंगा के इतिहास पर चिंतन आवश्यक है. परंतु चिंतन तक ही सीमित ना रहे . पुरानी तस्वीरों को देख भाव विभोर होते हुए उन्होंने कहा कि चित्र प्रदर्शनी अवलोकन के दौरान ऐसा लग रहा था, जैसे किसी अपने के खो जाने पर उसकी तस्वीरों से उसकी याद को मिटाया जाता है. ठीक आज ऐसा ही प्रतीत हो रहा था.
उन्होंने दरभंगा महोत्सव आयोजन समिति की भूरी भूरी प्रंशसा करते हुए कहा कि यह सुखद है कि दरभंगा की संस्कृति और विरासत को सहेजने का बीड़ा दरभंगा के युवाओ ने उठाया है. पूर्व कुलपति राजकिशोर झा ने अपने उद्बोधन में डंके की चोट पर कहा कि दरभंगा का विकास सामाजिक भागीदारी से ही संभव है.
डॉक्टर मृदुल शुक्लाने दरभंगा महोत्सव के युवाओं का हौसला अफजाई करते हुए कहा कि यह एक अच्छा आगाज़ है जिससे दरभंगा के संस्कृति और धरोहरों को सहेजने की आवाज़ बुलंद होगी. संगोष्ठी में अन्य सभी मंचासीन वक्ताओं ने चर्चा करते हुए कहा कि दरभंगा का अतीत अत्यंत गौरवशाली रहा है. लेकिन वर्तमान में शैक्षणिक क्रियाकलाप, सांस्कृतिक चेतना व समाजिक विकास जरूरी है. एक समय था, जब दरभंगा तालाबों औऱ गुलमोहर के पेड़ से जाना जाता था. लेकिन सभी को नष्ट कर दिया गया.
उन्होंने कहा कि दरभंगा की सुंदरता कुरूप होती जा रही है. जिसका प्रमाण दरभंगा लाल किला, लक्ष्मेश्वर विलास पैलेस, चौरंगी आदि है. जिसपर चिंतन मनन करने की आवश्यकता है. कार्यक्रम में मंच संचालन संतोष चौधरी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिषेक कुमार झा ने किया.
टैलेंट अभी तक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वह आयाम नहीं मिल पाया है जिसका वह हकदार है। ऐसे में यह हम सब का सामूहिक दायित्व बनता है कि हमारी प्रतिभा को उसका उचित सम्मान मिले और हमें इस पर गर्व करने का मौका मिले। उन्होंने कहा कि बिहार में युवाओं को जिला व राज्य स्तर पर मौका पाने के लिए उचित प्लेटफार्म प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतिभागियों से उन्होंने जीत-हार की ¨चता किए बिना अपने प्रतिभा को निखारने की सलाह दी।
वही डांस एकेडमी के बच्चों ने दरभंगा के लोकपरंपरा के गीतों पर नृत्य किया ।
इस कार्यक्रम में संयोजक विद्या भूषण राय ,अमित मिश्रा, अनीश चौधरी, अभिषेक कुमार झा, मिहिर, शिवांगी, निधि कुमारी , ऋतु,आयशा खान समेत दर्जनों लोगों ने अपनी सहभागिता दी
भवदीय
अमन सक्सेना
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