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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्लेगियरिज्म पॉलिसी एवं रेगुलेशन-2018 “ विषय पर कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों एवं शोध छात्रों की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

ललित नारायण  मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के जुबली हाॅल में ” ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्लेगियरिज्म पॉलिसी एवं रेगुलेशन-2018 “ विषय पर कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों एवं शोध छात्रों की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

दरभंगा news 24 live अजित कुमार सिंह

कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो सिंह ने कहा कि खुद का किया हुआ कार्य को लिपिबद्ध करें । दूसरों के किए कार्य का उल्लेख वगैर उद्धरण के न करें।पावर प्वाइंट प्रस्तुति के द्वारा प्रति-कुलपति प्रो0 डाॅली सिन्हा ने ल0 ना0 मिथिला विश्वविद्यालय में लागू किए जाने वाले प्लेगियरिज्म पॉलिसी का यूं जी सी द्वारा निर्धारित पालिसी से तुलना करते हुए विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने प्लेगियरिज्म के प्रकार, उसके रोकथाम के उपाय तथा इस हेतु दंड के प्रावधानों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एथिक्स का पालन करने वाले शिक्षकों, शोधार्थियों को इस तरह की समस्या नहीं आएगी। उन्होंने सेल्फ प्लेगियरिज्म से बचने की भी सलाह दी। कार्यक्रम का संचालन कर रहे संयोजक सह विकास पदाधिकारी प्रो के के साहु ने तकनीकि सत्र के संसाधन पुरुष डाॅ अशोक कुमार झा, प्राचार्य भौतिकी विभाग, पटना विश्वविद्यालय पटना का परिचय देते हुए विषय प्रवेश किया। संसाधन पुरुष डा झा ने प्लेगियरिज्म के छः स्टेप्स पर चर्चा करते हुए, इसके प्रतिशत को शोध प्रबंध तैयार करते समय कैसे कम किया जा सकता है, के तकनीकि पक्ष को कई उदाहरणों के साथ सामने रखा। यू जी सी स्तर पर अनुशंसित सोफ्टवेयर URKUND ( उरकुंड )को कैसे प्रयोग किया जाय, शोध पत्रों, थेसिस, डिसर्टेसन को किस फ्रोंट, आकार में टाईप कर अपलोड किया जाय आदि सभी विषयों की जानकारी दी गई। रिसर्च मेथोडोलोजी के कोर्स में रिसर्च एथिक्स को पेपर के रूप में जोड़ने की सलाह दी गई । उन्होंने बताया कि शोधगंगा पर थेसिस अपलोड होने से पूर्व विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग की विभागीय एकेडमिक इंटिग्रिटी कमिटी एवं विशवविद्यालय स्तर पर गठित विश्वविद्यालय एकेडमिक इंटिग्रिटी कमिटी से अनुमोदन के उपरांत शोध निर्देशक द्वारा दिए गए प्रमाण-पत्र की वैधता पर खरे उतरे शोध प्रबंध ही जमा हो पाऐंगे। अन्यथा पुनः विभिन्न प्रक्रिया से होकर शोध छात्र को शोध कार्य से गुजरना होगा। संसाधन पुरुष की विद्ववतापूर्ण प्रस्तुति के उपरान्त कई बिन्दुओं पर महत्त्वपूर्ण प्रश्न दर्शक दीर्घा से पूछे गए जिसे मुख्य वक्ता ने बड़े ही तकनीकी ढ़ंग से समझाया।

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