देवी भागवत कथा यज्ञ के छठे दिन कथावाचक आचार्य भोगी झा ने कहा,
‘आध्यात्मिक क्रांति से ही विश्व में आएगी शांति’

मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत टटुआर पंचायत के बिशौल गांव में स्थापित प्राचीन बाबा सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय देवी भागवत कथा यज्ञ के छठे दिन कथावाचक आचार्य भोगी झा ने भक्तों को विश्व शांति का मंत्र देते हुए कहा कि यह आध्यात्मिक क्रांति से ही संभव है। रविवार को उन्होंने मां जगत जननी भगवती के कई चरित्रों व उनकी महिमा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने महालक्ष्मी की लीला का विश्लेषण करते हुए कहा कि धर्म के आधार के बिना अर्जित धन किसी काम नहीं आता। यही कारण है कि मौजूदा समय में लोग धन कमाने के लिए मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन धर्म के आधार को भूलने के कारण समाज में अनेक तरह के विकार उत्पन्न हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आत्मज्ञान की कमी के कारण मानव समाज काफी आहत है। नतीजा हुआ है कि मनुष्य ने अपने जीवन के भौतिक, शारीरिक और बौद्धिक विकास को भले ही आसमान की ऊंचाई तक पहुंचाया हो, लेकिन आध्यत्मिक विकास नगण्य है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने अन्दर की आत्म शक्ति को पहचानना होगा। आत्म शक्ति से अशांत मन को शांत कर एक बेहतर मानव समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने गुरु शिष्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्य को अज्ञानता रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश में ले जाता है। जबकि ज्ञान के बिना मनुष्य दिशाहीन हो जाता है और बुराई के रास्ते पर चलने लगता है, लेकिन दिशाहीन मानव को दिशा देने का काम गुरु ही करते हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान की कमी के कारण रावण, कंस और दुर्योधन इस धरती को रसातल में भेज देता, लेकिन गुरु की कृपा से धरती को पाप से मुक्त किया जा सका।
कथा श्रवण करने वालों में गांव के बुजुर्ग योगेंद्र झा, पूर्व मुखिया प्रो जीवकांत मिश्र, मंदिर कमेटी के विद्यानंद झा, नारायण राय, साहब राय, प्रफुल्ल मिश्र चुन्नू, चंदन झा, शंभू झा, हर्ष मिश्रा, मोहन कुमर, अरुण कुमार झा, सीताराम झा, श्याम झा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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