देवी भागवत कथा के यज्ञ के आठवें दिन कथावाचक आचार्य भोगी झा ने कहा
‘व्यक्ति का अहंकार मिटने पर आत्मा की चेतना जागृत होती है’
मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत पंचायत के विशौल गांव में स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर में चल रहे देवी भागवत कथा के यज्ञ के आठवें दिन कथावाचक आचार्य भोगी झा ने कहा कि व्यक्ति का अहंकार मिटने पर आत्मा की चेतना जागृत होती है।

उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति के द्वारा ही मनुष्य का अहंकार समाप्त होता है और दूसरों के प्रति दया व प्रेम भावना जागृत होती है। जिससे आपस में भाई-चारा बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि जब हम प्रभु का ध्यान करते हैं तो मनो-विकारों से स्वत: मुक्त हो जाते हैं और विकारों के समाप्त होते ही दुखों का कम होना शुरू हो जाता है। जब मन के विकारों की गंदगी दूर होती है तो आत्मा से परमात्मा के मिलन की स्थिति बनती है। हमारे अंदर के चित्त, मन, बुद्धि और अहंकार जब चारों विकार शांत हो जाते हैं तो पांचवां चेतन आत्मा रह जाती है। जो व्यक्ति को अच्छे-बुरे का ज्ञान कराती है।
उन्होंने कहा कि जब प्रभु की भक्ति मन में जागृत होती है तो साधक की आराधना पूरी होती है। वह आत्म चेतन रूप की स्थिति में हो जाता है तब उसके सारे माया, मोह और दु:ख दूर हो जाते हैं। फिर उसे जन्म और मृत्यु का अहसास नहीं होता है और वह अपने आत्म स्वरूप में लीन होकर पूर्ण विश्राम पा जाता है। इसलिए सत्य विचार को महत्व देने वाला साधक पूर्ण निर्विकार होकर तारणहार हो सकता है। यह स्थिति पाना ही मानव जीवन का लक्ष्य है। मंगलवार को अनेक भक्तों ने दीक्षा भी ग्रहण की।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्रो जीवकांत मिश्र ने बताया कि बुधवार को महाआरती के साथ नौ दिवसीय देवी भागवत कथा यज्ञ का समापन होगा जबकि बृहस्पतिवार को हवन यज्ञ के उपरांत कुमारी भोजन एवं भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा। भक्ति संध्या कार्यक्रम में मिथिला रत्न पं कुंज बिहारी मिश्र, डॉ रामसेवक ठाकुर, माधव राय एवं जुली झा सहित मैथिली मंच के अनेक स्थापित कलाकार अपनी भक्तिमय प्रस्तुति देंगे।देवी भागवत कथा के यज्ञ के आठवें दिन कथावाचक आचार्य भोगी झा ने कहा
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‘व्यक्ति का अहंकार मिटने पर आत्मा की चेतना जागृत होती है’
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मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत पंचायत के विशौल गांव में स्थित सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर में चल रहे देवी भागवत कथा के यज्ञ के आठवें दिन कथावाचक आचार्य भोगी झा ने कहा कि व्यक्ति का अहंकार मिटने पर आत्मा की चेतना जागृत होती है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति के द्वारा ही मनुष्य का अहंकार समाप्त होता है और दूसरों के प्रति दया व प्रेम भावना जागृत होती है। जिससे आपस में भाई-चारा बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि जब हम प्रभु का ध्यान करते हैं तो मनो-विकारों से स्वत: मुक्त हो जाते हैं और विकारों के समाप्त होते ही दुखों का कम होना शुरू हो जाता है। जब मन के विकारों की गंदगी दूर होती है तो आत्मा से परमात्मा के मिलन की स्थिति बनती है। हमारे अंदर के चित्त, मन, बुद्धि और अहंकार जब चारों विकार शांत हो जाते हैं तो पांचवां चेतन आत्मा रह जाती है। जो व्यक्ति को अच्छे-बुरे का ज्ञान कराती है।
उन्होंने कहा कि जब प्रभु की भक्ति मन में जागृत होती है तो साधक की आराधना पूरी होती है। वह आत्म चेतन रूप की स्थिति में हो जाता है तब उसके सारे माया, मोह और दु:ख दूर हो जाते हैं। फिर उसे जन्म और मृत्यु का अहसास नहीं होता है और वह अपने आत्म स्वरूप में लीन होकर पूर्ण विश्राम पा जाता है। इसलिए सत्य विचार को महत्व देने वाला साधक पूर्ण निर्विकार होकर तारणहार हो सकता है। यह स्थिति पाना ही मानव जीवन का लक्ष्य है। मंगलवार को अनेक भक्तों ने दीक्षा भी ग्रहण की।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्रो जीवकांत मिश्र ने बताया कि बुधवार को महाआरती के साथ नौ दिवसीय देवी भागवत कथा यज्ञ का समापन होगा जबकि बृहस्पतिवार को हवन यज्ञ के उपरांत कुमारी भोजन एवं भक्ति संध्या का आयोजन किया जाएगा। भक्ति संध्या कार्यक्रम में मिथिला रत्न पं कुंज बिहारी मिश्र, डॉ रामसेवक ठाकुर, माधव राय एवं जुली झा सहित मैथिली मंच के अनेक स्थापित कलाकार अपनी भक्तिमय प्रस्तुति देंगे।
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