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दरभंगा एमएलएसएम कॉलेज में 21 दिवसीय मिथिलाक्षर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

एमएलएसएम कॉलेज में 21 दिवसीय मिथिलाक्षर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ

किसी  लिपि को जीवंत बनाए रखने के लिए उसका निरंतर अभ्यास करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि ऐसा न हुआ तो उसका मृतप्राय होना निश्चित है। उक्त बातें मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ भीम नाथ झा ने बृहस्पतिवार को एमएलएसएम कॉलेज के मैथिली विभाग द्वारा आयोजित 21 दिवसीय मिथिलाक्षर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि मिथिला की धरोहर लिपि मिथिलाक्षर अब न सिर्फ पुन: जागृत हो चुकी है बल्कि इसे सीखने वाले लोग बड़े ही उत्साह एवं गौरव के साथ लिप्यांतरण के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अभ्यास में निरंतरता बनाए रखना समय की मूलभूत जरूरत है।
मौके पर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने भाषा एवं लिपि के महत्व को रेखांकित करते कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यशाला धरोहर लिपि को संरक्षित एवं संवर्धित करने में मील का पत्थर साबित होंगे। स्नातकोत्तर मैथिली विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो रमण झा ने मिथिलाक्षर की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस धरोहर लिपि को सीखने से प्राचीन पांडुलिपियों को पढ़े जाने के साथ ही रोजगार के अवसर भी सहज उपलब्ध होंगे।
साहित्य अकादमी में मैथिली भाषा के पूर्व प्रतिनिधि डाॅ प्रेम मोहन मिश्र ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा और मातृलिपि की अहमियत काफी बढ़ गई है। ऐसे में इस तरह के आयोजन जागरूकता के साथ-साथ धरोहर लिपि को संरक्षित एवं संवर्धित करने में सहायक साबित होंगे। अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ विद्या नाथ झा ने कहा कि मिथिलाक्षर को व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन एक प्रयोग के तौर पर किया जा रहा है। यदि यह सफल रहा तो मिथिलाक्षर में लिपिबद्ध प्राचीन एवं दुर्लभ ज्ञान को इस माध्यम से सहज ही उद्भेदित किया जा सकेगा।
इससे पहले अतिथियों का स्वागत करते हुए मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ रमेश झा ने कहा कि प्राथमिक स्तर पर मैथिली को सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए मिथिलाक्षर सीखना अत्यंत जरूरी है। हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ सतीश सिंह के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के आइक्यूएसी समन्वयक प्रो विनोद कुमार मिश्र ने किया। बतौर प्रशिक्षक सीएम साइंस कॉलेज के मैथिली विभाग के अध्यक्ष डॉ सत्येंद्र कुमार झा एवं प्रो अमलेन्दु शेखर पाठक उपस्थित हुए। जबकि कार्यक्रम के आयोजन में डाॅ शांतिनाथ सिंह ठाकुर ने महती भूमिका निभाई।

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