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डाॅ रामदेव झा एवं डाॅ लक्ष्मी नाथ झा की स्मृति में विद्यापति सेवा संस्थान ने की श्रद्धांजलि सभा

डाॅ रामदेव झा एवं डाॅ लक्ष्मी नाथ झा की स्मृति में विद्यापति सेवा संस्थान ने की श्रद्धांजलि सभा

अर्पण के आगामी अंक का प्रकाशन डॉ रामदेव झा के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर केंद्रित होने की घोषणा
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मैथिली साहित्य जगत के मूर्धन्य स्तंभ रामदेव झा एवं एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक डॉ लक्ष्मी नाथ झा के देहावसान पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए शुक्रवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। एमएलएसएम कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ विद्यानाथ झा की अध्यक्षता में महाविद्यालय के संगोष्ठी कक्ष में आयोजित सभा में उपस्थित लोगों ने दिवंगत पुण्यात्माओं के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि प्रदान की।
मौके पर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने दोनों महान व्यक्तियों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की विस्तार से चर्चा करते हुए डॉ रामदेव झा को जहां सरल व्यक्तित्व, विलक्षण कृतित्व एवं सामाजिक प्रवृत्ति का निष्नात विद्वान बताया। वहीं उन्होंने लक्ष्मी बाबू को प्रकृति संरक्षण का असीम अनुरागी करार दिया। मौके पर उन्होंने विद्यापति सेवा संस्थान की मुख पत्रिका ‘अर्पण’ के अगले अंक का प्रकाशन डॉ रामदेव झा विशेषांक के रूप में प्रकाशित करने के साथ ही उनके अप्रकाशित पांडुलिपियों को संस्थान के द्वारा प्रकाशित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि समुचित स्थल चयन होने के पश्चात अन्य विभूतियों की तरह डाॅ रामदेव झा की प्रतिमा की स्थापना भी विद्यापति सेवा संस्थान करेगा।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में पूर्णता हासिल करना रामदेव बाबू के जीवन का जहां मूल उद्देश्य था। वहीं लक्ष्मी बाबू प्रकृति एवं पर्यावरण से प्रेम करने वाले अद्भुत व्यक्ति थे। भारत निर्वाचन आयोग के दरभंगा जिला आइकॉन एवं वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि विभिन्न विधाओं में पारंगत रामदेव बाबू एक प्रबुद्ध साहित्यकार होने के साथ-साथ एक कुशल रंगकर्मी भी थे। अपनी कृतियों में वे सदा अमर रहेंगे। उन्होंने लक्ष्मी बाबू को पर्यावरण संरक्षण का असीम अनुरागी बताते कहा कि प्रकृति के प्रति उनका प्रेम सदैव पथ प्रदर्शक बना रहेगा।
डाॅ अमर कांत कुमर ने कहा कि रामदेव बाबू भारतीय मनीषा के एकमात्र ऐसे साहित्यकार हुए, जिनके पास मिथिला, मैथिली व मैथिल के विकास के चिंतन की समग्र सामग्री उपलब्ध थी। डाॅ सतीश सिंह ने दोनों विद्वानों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित शोध कार्य को बढ़ावा देने को उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने डाॅ रामदेव झा को मैथिली साहित्य के विकास की दिव्य दृष्टि से संपन्न कालजयी साहित्यकार बताते हुए मैथिली साहित्य के भंडार को भरने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। शोक सभा में डॉ चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, डॉ चंद्र मोहन झा पड़वा, डाॅ राम शुभग चौधरी, डॉ अशोक झा, डॉ अनिल झा, डॉ उषा चौधरी, डॉ साहिल, डॉ गणेश कांत झा आदि ने भी अपने विचार रखे। सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दोनों दिवंगत व्यक्तित्व के आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई।

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