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दिल में छेद से ग्रसित बच्चे को सफल ऑपरेशन के लिए भेजा गया श्री सत्य साईं हॉस्पिटल

दिल में छेद से ग्रसित बच्चे को सफल ऑपरेशन के लिए भेजा गया श्री सत्य साईं हॉस्पिटल
•आरबीएसके की पहल से चिह्नित किया गया था बच्चा
•मुख्यमंत्री से मिल इंडिगो एयरलाइंस से भेजा गया अहमदाबाद
•पूरे प्रक्रिया में परिवार को नहीं होगा कोई खर्च, सरकार करेगी वहन

मधुबनी  बच्चे का जन्म पूरे परिवार के लिए खुशियों का नया आगमन की तरह होता है, पर जन्म से ही अगर बच्चा किसी जानलेवा रोग से ग्रसित हो तो परिवार के लिए यह सबसे मुश्किल घड़ी हो जाती है। जिले के राजनगर प्रखंड स्थित पिलखवार ग्राम में ऐसी ही बीमारी से ग्रसित 5 साल का बच्चा अविनाश कुमार, जिसे जन्म से ही दिल में छेद था जो समय के साथ बढ़ता ही जा रहा था। सही समय पर इसका ऑपरेशन नहीं करवाने की स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकता था। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके ) मोबाईल हेल्थ टीम राजनगर के द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों के जांच के क्रम में अविनाश को चिन्हित किया था। उसके बाद माननीय मुख्यमंत्री बिहार एवं स्वास्थ्य विभाग बिहार सरकार के पहल से दिनाँक 10.3.2021 एव 11.03.2021 को श्री सत्य साई अस्पताल अहमदाबाद के द्वारा विशेष शिविर में मधुबनी जिला के पूर्व से हृदय रोग से ग्रसित चिन्हित 11 बच्चों की जांच की गई जिसमें से अभी एक बच्चा (अविनाश) को इलाज के लिए बुलाया गया है। बच्चें को जिला से निशुल्क 102 एंबुलेंस उपलब्ध कराकर (आईजीआईएमएस) भेजा गया वहाँ से श्री साई हॉस्पिटल अहमदाबाद इंडिगो फ्लाइट से भेजा गया है भेजने से पूर्व बिहार के मुख्यमंत्री बच्चों से मुलाकात किया।

जन्म से ही बच्चे के दिल में था छेद :

बच्चे के पिता उमेश कामत ने बताया बच्चे का राजनगर से इलाज करवाया, उसके बाद बच्चे का इलाज डीएमसीएच से कराया। जहां मालूम हुआ बच्चे के दिल में छेद है। उसके बाद बेहतर इलाज के लिए पटना निजी नर्सिंग हॉस्पिटल में इलाज करवाया। जहां बच्चे के दिल के ऑपरेशन के लिए 3 लाख का खर्च बताया गया यह उमेश कामत के लिए संभव नहीं था। उमेश दैनिक मजदूरी कर अपना तथा परिवार का भरण पोषण करते हैं। तब आरबीएसके के टीम ने हम से संपर्क किया और आज हमारे बच्चे के दिल के ऑपरेशन के लिए सत्य साईं अस्पताल अहमदाबाद रेफर किया गया बच्चा के ऑपरेशन में होने वाले खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है।

आईबीएसके द्वारा किया गया मदद :
आरबीएसके के जिला समान्यवक डॉ कमलेश शर्मा ने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ऐसे बच्चों की सर्जरी बड़े सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में निश्शुल्क होती है। बच्चे का नाम आंगनबाड़ी केंद्र में या सरकारी स्कूल में दर्ज होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि बच्चा जब गर्भ में रहता है,अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से शिशु के दिल में छेद का पता चल जाता है। आरबीएसके के तहत जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की सर्जरी निश्शुल्क कराई जाती है। साथ ही दिल में छेद, कटे होठ और चिपके तालू भी शामिल हैं। दिल के छेद की सर्जरी महंगी है, एक से तीन लाख रुपये तक का खर्च आता है। आरबीएसके के टीएम 0 से 18 साल तक के बच्चों में 45 तरह के बीमारियों उपचार तथा ऑपरेशन
करवाती है।

नहीं होगा परिवार को कोई भी खर्च :

आरबीएसके जिला समान्यवक डॉ. कमलेश कुमार शर्मा ने बताया कि अविनाश के पूरे जांच और ऑपरेशन प्रक्रिया को आरबीएसके द्वारा ही करवाया जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन प्रक्रिया में परिजनों को किसी तरह का कोई भी खर्च नहीं करना होगा। ऑपरेशन के बाद भी बच्चे का फीडबैक के लिए आरबीएसके के टीम के द्वारा उनके घर जाकर नियमित जानकारी ली जाएगी। आरबीएसके टीम बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हमेशा नियमित रूप से कार्यरत है।

बच्चों में दिल के छेद के रोग के लक्षण :
•बच्चे का रंग नीला पड़ जाता है।
•नाखून और होंठ भी नीले पड़ जाते हैं।
•सांस लेने में दिक्कत होती है।
•शिशु को दूध पीने में दिक्कत आती है।
•पसीना आना, वजन कम और थकान।

बच्चों के दिल में छेद का कारण :

•ज्यादातर केस जन्मजात होते हैं।
•गर्भवती महिला को रुबैला-खसरा होना।
•कुछ मेडिसन का दुष्प्रभाव।
•गर्भवती महिला द्वारा शराब का सेवन।
•गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान, कोकीन सेवन।

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