टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नवोदय विद्यलय में लगाया गया कैप, तीन छात्रों का लिया गया स्पुटम

 

टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नवोदय विद्यलय में लगाया गया कैप, तीन छात्रों का लिया गया स्पुटम .
•2025.तक जिला को टीबी मुक्त करने का है लक्ष्य.
•दो सप्ताह से लगातार खांसी होने पर कराएं टीबी की जांच
•जनवरी से मार्च तक 1103 मरीज टीबी के चिन्हित

मधुबनी जिले को यक्ष्मा मुक्त बनाने के लिए एनटीईपी (नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमेशन कार्यक्रम,) के तहत प्रत्येक माह के दूसरे सोमवार को टीबी जागरूकता को लेकर यक्ष्मा विभाग द्वारा निश्चय दिवस मनाया जाता है इस अवसर पर जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रांगण में हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यालय के 67 छात्र तथा 18 शिक्षक तथा कर्मचारियों का स्क्रीनिंग किया गया। जिसमें 3 छात्र में सर्दी- खांसी के लक्षण पाए गए जिन्हें स्पुटम जांच के लिए कंटेनर दिया गया। जिनका विभाग द्वारा बलगम जांच किया जाएगा।

वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य:
जिला योजना समन्वयक पंकज कुमार ने बताया भारत में टीबी को नियंत्रित करने के लिए पिछले लगभग 60 वर्षो से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, फिर भी यह एक गंभीर समस्या बनी हुई है। वर्ष 1962 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। 30 वर्ष बाद इस कार्यक्रम की समीक्षा में यह पाया गया कि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। अत: 1993 में पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) प्रारंभ किया गया। 30 दिसंबर, 2019 को इस कार्यक्रम का नाम राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया। इसकी भयावहता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से टीबी को 2025 तक समाप्त करने की घोषणा की है। देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या टीबी के जीवाणुओं से प्रभावित है, लेकिन देश में टीबी रोगियों की संख्या 27 लाख ही है। क्योंकि जिनकी इम्युनिटी एवं पोषण अच्छा होता है, उनको संक्रमण के बाद भी टीबी रोग नहीं होता है। अत: पोषण और इम्युनिटी टीबी को रोकने में मददगार साबित होती हैं।

दो सप्ताह से लगातार खांसी होने पर कराएं टीबी की जांच-

जिला संचारी रोग पदाधिकारी (यक्ष्मा) टीबी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है। सामूहिक भागीदारी से इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी की शिकायत हो तो उन्हें तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर अपने बलगम की जांच करानी चाहिये। बलगम जांच की सुविधा जिला के सभी पीएचसी में उपलब्ध है। टीबी संक्रमण की पुष्टि होने पर पूरे कोर्स की दवा रोगी को मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। जांच से इलाज की पूरी प्रक्रिया बिल्कूल नि:शुल्क है। टीबी मरीजों के लिए जरूरी है कि वे खांसते समय अपने मुंह को कपड़ा व रूमाल से ढक कर रखें इससे संक्रमण के फैलने की संभावना कम होती है। टीबी के मरीजों को नियमित रूप से दवा खाने की जरूरत होती है बीच में दवा छोड़ देने से बीमारी लाइलाज होने की संभावना हो जाती है। मरीजों के लिए एचआईवी की जांच जरूरी है। एमडीआर टीबी मरीज को 9 से 11 और 18 से 21 माह नियमित रूप से दवा खाना पड़ता है। निक्षय पोषण योजना के तहत सभी टीबी मरीजों को 500 रुपये प्रतिमाह निक्षय पोषण सहायता राशि देने का भी प्रावधान है।

जनवरी से मार्च तक 1103 मरीज चिन्हित:

जिले में जनवरी 2021 से 3 अप्रैल 2021 तक 1,103 टीबी के मरीजों को चिन्हित किया गया। जिसमें 427 मरीज सरकारी संस्थान तथा 676 मरीज प्राइवेट क्लिनिक से चिन्हित किया गया। वहीं वर्ष 2020 में 1443 मरीज सरकारी संस्थान तथा 932 मरीज प्राइवेट क्लीनिक से चिन्हित किए गए। वहीं वर्ष 2019 में सरकारी संस्थानों से 2305 मरीज तथा प्राइवेट क्लीनिक से 42 मरीज चिन्हित किया गया है।सभी मरीजों को आवश्यक जांच के बाद दवा उपलब्ध कराया जा रहा है।

टीबी (क्षयरोग) के लक्षण:

• लगातार 3 हफ्तों से खांसी का आना और आगे भी जारी रहना
• खांसी के साथ खून का आना
• छाती में दर्द और सांस का फूलना
• वजन का कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना
• शाम को बुखार का आना और ठंड लगना
• रात में पसीना आना

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