महिला एवं बाल विकास प्रकल्प,भारत विकास परिषद् ,भारती-मंडन शाखा,दरभंगा के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित
अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर “भारतीय नारी के उत्थान में अंबेडकर का योगदान” विषयक वेबीनार आयोजित
डा अंबेडकर नारी को सम्मानीय स्थान दिलाने हेतु जीवन भर रहे संघर्षरत- डा अंजू कुमारी
अंबेडकर के गहन चिंतन-मनन के फलस्वरूप ही आज नारी को अधिकार और सुविधाएं प्राप्त- अनिल कुमार
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डा अंबेडकर विद्वान् परिवर्तनकारी नेता,संविधान निर्माता तथा मानवता के पूजारी- डा चौरसिया
डॉ भीमराव अंबेडकर ने नारियों के उत्थान के लिए अनेकानेक कार्य किए।अंबेडकर कालीन समाज में नारियों की स्थिति अत्यंत दयनीय एवं दोयम दर्जे का था।उन्होंने महसूस किया कि नारी उत्थान के बिना समाज की खुशहाली तथा राष्ट्र की प्रगति असंभव है।वे नारी को आगे बढ़ाने हेतु जीवन भर संघर्षरत रहे। उक्त बातें भारत विकास परिषद् की भारती-मंडल शाखा, दरभंगा के ‘महिला एवं बाल विकास प्रकल्प’ की संयोजिका डा अंजू कुमारी ने बांगलागढ़,दरभंगा में अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर “भारतीय नारी के उत्थान में अंबेडकर का योगदान” विषयक वेबीनार की अध्यक्षता करते हुए कहा।उन्होंने कहा कि आज नारी शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं और पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान कर रही हैं। नारियों के अधिकारों की रक्षा हेतु अनेकानेक कानून बनाए गए हैं। हमारी संस्था महिलाओं के उत्थान हेतु अनवरत कार्य करती रहेगी।
मुख्य अतिथि के रूप में परिषद् की भारती-मंडन शाखा के अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि अंबेडकर के गहन चिंतन-मनन के फलस्वरूप ही आज भारतीय नारी को अधिकार,सम्मान और सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। अंबेडकर ने भारत को ऐसा संविधान दिया है,जिसमें जाति, मत या लिंग आदि के आधार पर भेदभाव किए बिना समानता का प्रावधान है और संपूर्ण भारत के लिए समान नागरिक संहिता बनाने की दिशा में कोशिश करने का संकल्प निहित है।बहुमुखी प्रतिभा के धनी अंबेडकर ने 1929 ईस्वी से ही नारी उत्थान के लिए कार्य प्रारंभ किया।उन्होंने नारी की शिक्षा एवं समानता हेतु भी कार्य किया।
मुख्य वक्ता के रूप में भारत विकास परिषद् , दरभंगा के सचिव डा आर एन चौरसिया ने कहा कि डा अंबेडकर विद्वान् परिवर्तनकारी नेता,संविधान निर्माता तथा मानवता के पूजारी थे,जिन्होंने समाज में हर तरह की असमानताओं को दूर करने का कार्य किया था।उन्होंने भारतीय नारी की स्थिति पर गहराई से विचार किया और माना कि नारियां शिक्षा ग्रहण करने और समझने में पूर्णता सक्षम और अनुशासन प्रिय हैं।नारी को ज्ञानप्राप्ति से वंचित रखना अन्याय है,क्योंकि ज्ञानप्राप्ति प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। डा अंबेडकर सामाजिक क्रांति के पुरोधा एवं नैतिकता के प्रबल पक्षधर थे।
कोषाध्यक्ष श्रीरमण अग्रवाल ने कहा कि भीमराव अंबेडकर ने भारतीय समाज में नारी को पुनः प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से हिंदू कोड बिल प्रस्तुत किया था। कानून मंत्री के रूप में वे नारी की दयनीय व उपेक्षित स्थिति को सुधारने एवं उसे समाज का स्वस्थ व शक्तिशाली अंग बनाने हेतु कानून बनाने का भी प्रयास किया।
वेबीनार में ज्योति अग्रवाल,डा प्रेम कुमारी,निर्मला अग्रवाल, प्रेरणा नारायण सहित अनेक लोगों ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रीय गीत– वंदे मातरम् से किया गया,जबकि समापन राष्ट्रगान- जन गण मन के सामूहिक गायन से हुआ। प्रारंभ में अतिथियों ने अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। नूतन कुमारी के संचालन में आयोजित वेबीनार में अतिथियों का स्वागत आकाश अग्रज ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन अनुराग अग्रज ने किया।
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