सी एम कॉलेज,दरभंगा के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित
‘कालिदास के काव्य की पर्यावरणीय प्रासंगिकता’ विषयक बेवीनार का हुआ आयोजन
कालिदास की रचनाओं में वर्णित पर्यावरण जीवन्त एवं मनोरम- प्रो विश्वनाथ
2000 वर्ष बाद भी कालिदास की पर्यावरणीय अवधारणा प्रासंगिक- डा विकास सिंह

स्वच्छ पर्यावरण हमारे जीवन का आधार,कालिदास का पर्यावरण चित्रण सर्वोत्कृष्ट- डा चौरसिया
संस्कृत साहित्य के अमर कवि कालिदास की रचनाएं कालजयी हैं।उन्होंने अपनी सातों रचनाओं में पर्यावरणीय संवेदना का वृहत वर्णन किया है।उनके सभी पात्र मूर्तिमान होकर जीवनोपयोगी संदेश प्रदान करते हैं।उक्त बातें सी एम कॉलेज,दरभंगा के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में ‘कालिदास के काव्य की पर्यावरणीय प्रासंगिकता’ विषयक वेबीनार में मुख्य वक्ता के रूप में मारवाड़ी महाविद्यालय,दरभंगा के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा विकास सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि कालिदास के अनुसार हमारा सतत भौतिक विकास हो जो आने वाली पीढी के लिए भी पर्यावरण को सुरक्षित रख सके। कालिदास की रचनाओं में प्रकृति हमेशा मानविकृत रूप में दृष्टिगोचर होता है,जहां उसका उदात्त रूप हमें दिखता है। 2000 वर्ष के बाद भी कालिदास की पर्यावरणीय अवधारणा प्रासंगिक है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि कालिदास की रचनाओं में वर्णित पर्यावरण जीवन्त एवं मनोरम है। स्वच्छ पर्यावरण हमारे लिए अमृत तुल्य है,जिसकी रक्षा व विकास हमारा पुनीत कर्तव्य है। मानवीय सौंदर्य के मूल में प्रकृति है,जिसका कवि ने मानवीकीकरण किया है। कालिदास का साहित्य मानव को आदर्श इंसान बनाने में समर्थ है। उनकी रचनाएं हमारे अंदर पर्यावरणीय उत्तम भाव को जागृत करता है।
इस अवसर पर संगोष्ठी का संचालन एवं विषय प्रवेश कराते हुए महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण हमारे जीवन का मूल आधार है,जिसकी अनुकूलता ही हमारे स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन की आधारशिला है। प्रकृति हमारी सहगामिनी है जो सुख-दु:ख में हमारे साथ रहती है। कालिदास भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि कवि हैं,जिनके पात्रों में भारतीय आदर्श मूर्तिमान हो उठा है। कालिदास का प्रकृति-चित्रण अप्रतिम एवं रमणीय है,जहां प्रकृति सजीव जान पड़ती है।
अवसर पर डा शंभू मंडल, बालकृष्ण सिंह,गिरधारी झा, अजय कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
बेवीनार में गोपालगंज कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो जीतेंद्र द्विवेदी,स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डा ममता स्नेही,डा अंजू कुमारी,डा शंभू मंडल,डा ममता कुमारी,अजय कुमार,गिरधारी झा,योगेश किशोर,बालकृष्ण कुमार सिंह, बाबू साहेब,अरबाज खान,आशीष कुमार,संगम जी झा,दिव्या कुमारी,दीप शिखा,रेखा कुमारी, डा राजेश्वर पासवान,कुमारी नेहा, रानी कुमारी,उमाशंकर व त्रिलोकनाथ चौधरी आदि ने सक्रियता पूर्वक भाग लिया।
आगत अतिथियों का स्वागत विजय कुमार पंडित ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा वीरेंद्र कुमार झा ने किया।
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