कोरोना के मरीजों को नहीं लिखी जाएगी रेमडेसिविर इंजेक्शन
• एनएमसीएच ने आदेश जारी किया, आइएमए ने की है अपील
• इंजेक्शन को लेकर भागदौड़ सही नहीं, कालाबाजारी से बचें
•कोविड ईलाज को लेकर सिविल सर्जन सहित पांच चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण

मधुबनी बिहार में कोरोना से जारी मौत के बीच पिछले कई दिनों से रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मारामारी चल रही है। कोरोना मरीजों को देने के लिए यह इंजेक्शन नहीं मिल रहा है और परिजन इंजेक्शन के लिए अस्पताल से लेकर दवा दुकानों तक खाक छानते फिर रहे हैं। अब पटना के एनएमसीएच अस्पताल ने इसको लेकर बड़ा फैसला किया है। वहीं इंडियन मेडिकल काउंसिल ने भी प्रेस रिलीज जारी कर रेमडेसीविर के इस्तेमाल को लेकर आवश्यक जानकारी दी है.
एनएमसीएच के अधीक्षक डॉ. विनोद सिंह ने आदेश जारी कर दिया है कि कोविड मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपयोगिता नहीं है। अधीक्षक डॉ. सिंह ने डब्ल्यूएचओ का हवाला देते हुए सभी चिकित्सकों को आदेश दिया है कि अभी से कोई डॉक्टर कोविड मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लिखेंगे , क्योंकि डब्लूएचओ ने इसकी उपयोगिता को नकार दिया है। इस बात की पुष्टि रिसर्च में भी हो चुकी है कि यह इंजेक्शन कोविड की रोकथाम के लिए कारगर नहीं है। इसके बावजूद इसे लेकर पैनिक क्रिएट हो रहा है और परिजन परेशान हो रहे हैं। दरअसल इस इंजेक्शन को लेकर लगातार बिहार में भी हाय तौबा मची हुई है और एक एक मरीज के लिए डॉक्टर 07 से 08 इंजेक्शन देने का पर्चा लिख रहे हैं। दूसरी तरफ इंजेक्शन का मिलना मुश्किल है। इंजेक्शन की जमकर कालाबाजारी भी हो रही है। पीड़ित लोग 15 से 25 हजार में एक फाइल खरीद रहे हैं।
इससे पहले शोध में यह भी साबित हो चुका है कि इस इंजेक्शन की एआरडीएस रोकने में कोई भूमिका नहीं है। डॉक्टरों की माने तो यह इंजेक्शन ऑक्सिजन लेवल घटने अर्थात 90 से नीचे आने पर ही दी जाती है ताकि मरीज की जान बचाई जा सके। अब एनएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सिंह के पत्र के बाद चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग भी इससे सम्बंधित शीघ्र आदेश जारी करेगा और चिकित्सकों को इसे लिखने की सलाह न देने की अपील करेगा।
इंडियन मेडिकल काउंसिल ने भी दी है जरूरी सलाह:
वहीं इंडियन मेडिकल काउंसिल ने भी कहा है कि रेमेडीसिविर नाम की दवा का कोविड 19 रोगियों की मृत्यु को कम करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसका केवल कुछ रोगियों में बीमारी की गंभीरता को कम करने के लिए चिकित्सक की निगरानी में उपयोग होता है. आइएमए ने कहा है कोविड लक्षणों वाले रोगियों को इम्यूनिटी बढ़ाने वाले पौष्टिक भोजन, भाप और श्वसन संबंधी व्यायाम इस बीमारी के तकलीफ को कम करने में मदद करते हैं. बताया गया है कि ज्यादातर कोविड संक्रमित लोग बिना लक्षण के अथवा साधारण लक्षण युक्त होते हैं जिनका इलाज डॉक्टरों द्वारा बताये गये कुछ दवाओं से होम आइसोलेशन में हो सकता है. जबतक कोई डॉक्टर सलाह नहीं दें तब तक अस्पताल में भरती होने की जरूरत नहीं है. साथ ही कहा गया है कि सही मास्क का प्रयोग, हाथ को बार बार धोना, दो गज की दूरी एवं टीकाकरण के द्वारा ही इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है.
कोविड ईलाज को लेकर सिविल सर्जन सहित पांच चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण:
वहीं गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जिले के सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा सहित पांच चिकित्सकों झंझारपुर के प्रसन्न कुमार मिश्रा, कोविड केयर सेंटर से डॉ. पंकज कुमार, बेनीपट्टी से डॉ. एसएन झा, जयनगर से डॉ रवि शंकर प्रसाद, डॉ सुनील कुमार झा इन सभी को जूम एप के माध्यम से राज्य समिति द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के उपरांत उपरोक्त डॉक्टर जिले के अन्य डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित करेंगे।
जिले में 2.35 लाख लोगों का हुआ वैक्सिनेशन:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एसके विश्वकर्मा ने बताया बुधवार को जिले में 41 सत्र स्थलों पर टीकाकरण किया गया. वहीं जिले में अब तक 2 लाख 35 हजार 908 लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है जिसमें 16,054 हेल्थ केयर वर्कर को प्रथम डोज,11,980 हेल्थ केयर वर्कर को सेकंड डोज, 9,111 फ्रंटलाइन वर्कर को प्रथम डोज, 4,279 फ्रंटलाइन वर्कर को सेकंड डोज, 1,23,742 लोग जो 60 वर्ष से ऊपर के हैं को प्रथम डोज, 15,300 को सेकंड डोज तथा 45 से 59 वर्ष के 50,792 लोगों को प्रथम डोज,4,650 लोगों को सेकंड डोज दिया जा चुका है।
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