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कोरोना योद्धाओं ने दिया समाज को संदेश -कोरोना से घबराएं नहीं दृढ़ आत्मबल के आगे हार गया कोरोना, घर में लौटीं खुशियां

 

 

 

कोरोना योद्धाओं ने दिया समाज को संदेश -कोरोना से घबराएं नहीं

दृढ़ आत्मबल के आगे हार गया कोरोना, घर में लौटीं खुशियां
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करने का की अपील

मधुबनी कोरोना से पूरा देश जूझ रहा है। ऐसे में कई लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे और लोग कोरोना को मात देकर सफल जिंदगी जी रहे हैं। इसलिए कोरोना के लक्षण होने पर छुपाए नहीं। नजदीक के अस्पताल में जाकर जांच कराएंऔर संक्रमित होने पर उपचार कराएं। संक्रमित होने पर अपने आत्मबल को कम ना होने दें, डरे नहीं तथा चिकित्सकों द्वारा बताए गए परामर्श का अनुपालन करते रहें| संक्रमित होने वाले ज्यादातर मरीजों ए सिंप्टोमेटिक होते हैं जिन्हें मामूली कोरोना के लक्षण होते हैं।

आइए बात करते हैं कोरोना संक्रमण को मात देकर सामान्य जीवन जीने वाले योद्धाओं की :

राजनगर प्रखंड के प्रमोद सर्राफ तीन भाई हैं और सभी कोरोना संक्रमित हो गए थे। संक्रमित होने के बाद इन्होंने अपने धैर्य से कार्य किया।उन्होंने बताया कि हम तीनों भाइयों में सभी में अलग-अलग लक्षण प्रतीत हुए। मुझे सर्दी, खांसी, बुखार, गले में इंफेक्शन, सांस लेने में कठिनाई के लक्षण प्रतीत हुआ। वहीं हमारे बड़े बलराम सर्राफ में स्वाद का चला जाना, सर्दी खांसी,बुखार , वहीं हमारे छोटे भाई राजेश में किसी तरह का लक्षण नहीं रहा। हम लोगों ने जांच करायी तीनों भाई पॉजिटिव हुए। पॉजिटिव होने के बाद मैं बेहतर इलाज तथा अपने को अलग आइसोलेट करने के उद्देश्य से कोविड केयर सेंटर में भर्ती हो गया । जहां डॉक्टरों की टीम ने हमारी हौसला अफजाई की तथा मैंने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा| साथ ही अनुलोम-विलोम म, कपालभान्ति करते रहे। ताकि हमारा ऑक्सीजन लेवल बरकरार रहे।साथ ही मैंने तीन बार भाप लेना, सुबह शाम गर्म पानी में नमक डाल गरारा किया। शाम को कोविड सेंटर से काढ़ा दिया गया| इस तरह से हमने कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए कोरोना संक्रमण को मात दिया।

भेदभाव नहीं करने की अपील:
प्रमोद ने बताया कोविड होने के बाद समाज तथा गांव के लोगों का हमारे घर के सदस्यों के प्रति सकारात्मक सोच नहीं थी| लोगों को सकारात्मक सोच बनानी होगी। कोविड किसी को, कहीं भी हो सकती है इसलिए लक्षण होने पर जांच कराएं। उन्होंने बताया कोविड मरीज को मानसिक मनोबल की जरूरत है| इसलिए आस-पास के लोगों को भी इस बात को समझने की जरूरत है| उनके प्रति सहानुभूति रखने की आवश्यकता है| किसी के कोरोना से संक्रमित होने की बात भी सामने आती है तो उसके साथ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार नहीं किया जाये|कोरोना वायरस से संक्रमित या संदिग्ध व्यक्तियों को सोशल सिटग्मा के साथ देखना सही नहीं है| यह संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता है| आवश्यक उपायों को बता कर हम सुरक्षित रह सकते हैं|

दृढ़ इच्छाशक्ति से कोविड को दी मात:
मूल रूप से झारखंड के डाल्टनगंज के रहने वाली जीएनएम नीलम बाड़ा ने बताया
मेरी ड्यूटी कोविड केयर सेंटर रामपट्टी में लगी हुई थी| मैं समान रूप से कोविड अनुरूप बिहेवियर का पालन करते हुए कोवीड केयर सेंटर में कार्य कर रही थी लेकिन कोविड केयर सेंटर में कार्य करना काफी चुनौतीपूर्ण है| थोड़ी भी चूक हमें संक्रमित कर सकता है लेकिन हमसे कहीं चूक हुई जिससे मेरे अंदर कोरोना के कुछ लक्षण प्रतीत होने लगे, तो मैंने जांच करायी , जांच में संक्रमित पाई गई| उसके बाद मैं 14 दिनों के लिए आइसोलेट हो गई। उस दरमियान मैंने अपना इलाज करवाया। इलाज खत्म होने तथा ठीक होने के बाद मैं हार नहीं मानी| मुझे लगा अगर मैं फिर से काम पर नहीं जाती हूं तो बहुत से स्वास्थ्य कर्मी जो मेरे साथ जुड़े हुए हैं उनको लगेगा कि शायद कोरोना से ठीक होकर पुराने जीवन में लौटना आसान नहीं है लेकिन जब मैं कोरोना ठीक हुई तो एहसास हुआ मैं पहले जैसा महसूस कर रही हूं। मुझे अपना कर्तव्य पूरा करना था लोगों को सकारात्मक संदेश देना था कि कोविड संक्रमित होने के बाद पूर्व की भांति कार्य कर सकती हूं। इसी विश्वास के साथ कोविड केयर सेंटर वापस लौटी |

आत्मविश्वास बनाए रखें, कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन करते रहें:
नीलम ने बताया मेरा अनुभव है कई लोगों में कोविड संक्रमित होने के बाद आत्मविश्वास कहीं ना कहीं कमजोर होता है| आत्मविश्वास कमजोर होने के बाद जो बीमारी आसानी से ठीक हो सकता है उसमें ज्यादा समय लगता है। मेरी लोगों से अपील है कोरोना किसी को किसी व्यक्ति को, किसी भी समय हो सकता है अगर कोरोना से संक्रमित होते हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है नियमित कोविड अनुरूप प्रोटोकॉल का पालन करते रहे तो आसानी से करोना को मात दे सकते हैं ।

कोविड केयर सेंटर के कर्मियों के कार्यों के की सराहना:

राजनगर प्रखंड के किशोर गुप्ता ने बताया शुरुआती लक्षण में फीवर आया और बेहोश हो गए को दरभंगा में टेस्ट कराए पॉजिटिव हुए उसके बाद परिवार के सभी लोगों का टेस्ट करवाया और परिवार में सभी लोग संक्रमित हुए जिसमें मेरी मां, पिता, भाई, पत्नी सभी संक्रमित हुए उसके बाद मैं पारस में एडमिट होने का गया परंतु पारस में मेरे भाई को जगह मिली परंतु मुझे जगह नहीं कह कर वापस कर दिया गया उसके बाद मैं डीएमसीएच आया वहां भी मुझे नहीं लिया गया क्योंकि मैं मधुबनी से था तब मैं मधुबनी आया और कोविड केयर सेंटर में अपने आप को भर्ती किया। 8 दिनों तक ऑक्सीजन में रहने के बाद कोविड केयर सेंटर ने मुझे नया जीवन दिया मैं धन्यवाद देना चाहता हूं वहां के डॉक्टरों,एएनएम, जीएनएम तथा कर्मियों का जिन्होंने मेरा पूरा ख्याल रखा मैंने वहां देखा सभी मरीजों का काफी अच्छे ढंग से देखभाल की जाती है। मैं 21 अप्रैल को कोविड केयर सेंटर से मधुबनी आया तो पता चला जो मेरे भाई पारस में भर्ती थे वह अब इस दुनिया में नहीं रहे मेरी मां भी संक्रमण से मुक्त होकर घर आई परंतु घर पर मेरी मां की मृत्यु घर आने के बाद हुई उसके बाद दाह संस्कार में हमने अपने मित्रों को बुलाया जो हमारे अजीज मित्र थे वह भी हमसे मिलने से परहेज किया मैंने बार-बार आग्रह किया कि मैं अब निगेटिव हो चुका हूं लेकिन लोगों ने मेरा साथ नहीं दिया मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि ऐसे दुख की घड़ी में कोरोना से दूरी बनाए ना कि कोरोना संक्रमित से।

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