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विश्व थैलेसीमिया दिवस पर विशेष 2 वर्ष से कम आयु के शिशु के अधिक पीड़ित होने की संभावना एनीमिया के लक्षणों की नहीं करें अनदेखी

विश्व थैलेसीमिया दिवस पर विशेष
2 वर्ष से कम आयु के शिशु के अधिक पीड़ित होने की संभावना
एनीमिया के लक्षणों की नहीं करें अनदेखी
जिले में थैलेसीमिया के 12 मरीज

मधुबनी, 7 मई थैलेसीमिया एक रक्त जनित रोग है जो मानव शरीर में हीमोग्लोबिन के उत्पादन को कम करता है और हीमोग्लोबिन द्वारा ही पूरी शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन को पहुँचाने का काम होता है। हीमोग्लोबिन का कम स्तर शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की कमी करता है। इससे ग्रसित व्यक्ति के शरीर में रक्ताल्पता या एनीमिया की शिकायत हो जाती है। शरीर का पीलापन,थकावट एवं कमजोरी का एहसास होना इसके प्राथमिक लक्षण होते हैं। तुरंत उपचार ना होने पर थैलेसीमिया के मरीज के शरीर में खून के थक्के जमा होने लगते हैं। थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया थैलिसिमिया एक गंभीर रोग है जो वंशानुगत बीमारियों की सूची में शामिल है। इससे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है जो हीमोग्लोबिन के दोनों चेन( अल्फा और बीटा) के कम निर्माण होने के कारण होता है।

जिले में थैलेसीमिया के 12 मरीज:
अभी भारत में लगभग 1 लाख थैलेसीमिया मेजर के मरीज हैं। प्रत्येक वर्ष लगभग 10000 थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चे का जन्म होता है। अगर केवल बिहार की बात करें तो लगभग 2000 थैलिसीमिया मेजर से ग्रस्त मरीज हैं। वहीं ही मधुबनी जिले में थैलेसीमिया से ग्रस्त 12 मरीज हैं जो नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूज़न पर हैं। जिन्हें उचित समय पर उचित खून न मिलने एवं ब्लड ट्रांसफ्यूज़न से शरीर में होने वाले आयरन ओवरलोड से परेशानी रहती है और इस बीमारी के निदान के लिए होने वाले बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के महंगे होने के कारण इसका लाभ नहीं ऊठा पाते हैं। इसलिए खून संबंधित किसी भी तरह की समस्या पति, पत्नी या रिश्तेदार में कहीं हो तो सावधानी के तौर पर शिशु जन्म के पहले थैलेसीमिया की जांच जरूर करायें।
लक्षण- थैलेसीमिया से ग्रसित शिशु या व्यक्ति में ये प्रारंभिक लक्षण नजर आते हैं-
• शरीर एवं आँखों का पीलापन
• पीलिया से ग्रसित होना
• स्वभाव में चिडचिडापन
• भूख न लगना
• थकावट एवं कमजोरी का महसूस होना
क्या है उपचार- बीटा थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को चेकअप के उपरांत उपचार किया जाता है। मरीज के शरीर में रक्ताल्पता के स्तर के अनुसार इलाज बताया जाता है और एनीमिया की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें खून चढ़ाने की सलाह दी जाती है। ज्यादा गंभीर स्थिति ना होने पर मरीज को दवा खाने की सलाह दी जाती है एवं अत्याधिक गंभीर स्थिति वाले मरीज को मज्जा प्रतिरोपण ( Bone Marrow Transplant ) की सलाह दी जाती है।
सदर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवृति मिश्रा बताती हैं बीटा थैलेसीमिया मूलतः अनुवांशिक होता है एवं पति- पत्नी को शिशु के बारे में सोचने के समय पूरा रक्त जांच करवाना चाहिए जिससे आने वाले समय में किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके| डा. मिश्रा बताती हैं अगर एनीमिया के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें व नजरअंदाज बिलकुल न करें| साथ ही अगर किसी गर्भवती स्त्री में मधुमेह के लक्षण हों तो उन्हें और सतर्कता बरतनी चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए|

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