इलाज़ के नाम पर लूट और कालाबाजारी से कब मुक्त होगा बिहार—-आप

आम आदमी पार्टी,बिहार के मुख्यप्रवक्ता डॉ शशिकान्त ने बक्सर के निकट गंगा नदी में तैरते सैंकड़ो लावारिश लाश की घटना पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आशंका जताई है कि सरकार के नाकामी का ये प्रतिफल तो नहीं ? कहीं ये सरकारी आंकड़ों का खेल तो नहीं ? न खाता न बही, जो सरकार कहे वही सही।
उन्होंने कहा कि दिनों दिन कोरोना महामारी से सूबे की स्थिति बिगड़ती ही जा रही है। उन्होंने भागलपुर की घटना को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया जिसमें एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा है और हॉस्पिटल के अंदर फैली कुव्यवस्था को उज़ागर कर रही है। उन्होंने लूट,कालाबाजारी शीर्षक से रंगे अखबारों का हवाला देतु हुए कहा कि इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है । लोगों के अंदर इलाज के नाम से भय और आतंक जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसके बजह से वे न तो सरकारी हॉस्पिटल और न ही प्राइवेट हॉस्पिट जाना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि पिछले लॉक डाउन ने बिहार वासियों के कमर तोड़ डाली है जिनके पास खाने के पैसे तो है नहीं इलाज़ की बात कौन करेगा ?परिणामस्वरूप अधिकांश लोग घर में ही दम तोड़ दे रहे हैं । डॉ शशिकान्त ने कोरोना से निबटने के लिए एक राज्यस्तरीय प्लान बनाने का सुझाव दिया है । लॉक डाउन से उत्पन्न स्थिति से निबटने के लिए भी एक योजना बनाई जाय ताकि प्रभवित लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने सरकार को यह भी आगाह किया है कि सरकार की ओर से जो भी सहायता राशि दी जाय वो नगद के रूप में सीधे लाभान्वित के खाते में स्थानांतरित की जाय ।
उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सहायता पहुंचाने के सिस्टम को समाप्त करने की भी अपील मुख्यमंत्री से किया है। इस सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे सरकारी राशि का बन्दर बाँट ज्यादा और आम जनता का लाभ कम होता है ।
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