बुखार, सर्दी व अन्य शारीरिक समस्या होने पर अनावश्यक रूप से लोग ले लेते तनाव
बुखार, सर्दी व अन्य शारीरिक समस्या होने पर कोरोना हो यह जरूरी नहीं- डॉ उमाशंकर प्रसाद
हमेशा मानसिक रूप से सुदृढ़ रहकर बिमारी को दे सकते मात
टायफाइड व कोरोना के कुछ लक्षण होते समान
चिकित्सक जांच के आधार पर बिमारी की करते पुष्टि

दरभंगा. 13 मई. कोरोना की दूसरी लहर के बीच टाइफायड के भी कई मामले सामने आ रहे है. ऐसे में कई लोग कोरोना और टाइफाइड के बुखार में अंतर नहीं कर पा रहे. वहीं, कुछ लोगों तो टाइफाइड को कोरोना के नए लक्षण के तौर पर भी मानने लगे है. साधारण शारीरिक समस्या होने पर आमलोग कोरोना को लेकर शशंकित हो जाते हैं. मन में डर समा जाता है. लेकिन ऐसी किसी प्रकार का बुखार, शर्दी अन्य बिमारी के लक्षण भी हो सकते हैं. इस स्थिति मे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र मे जाकर चिकित्सक से परामर्श लेनी चाहिये. बेगैर जांच किये कोरोना एवं टायफाइड में विभेद नहीं किया जा सकता है. क्योंकि दोनों बिमारियों के कुछ लक्षण समान पाये जाते हैँ. बिमारी की पहचान को लेकर चिकित्सक भी बेगैर जांच किये पुष्टि नहीं करते. लेकिन ऐसा देखा जाता है कि आमजन साधारण बुखार, सर्दी या अन्य समस्या होने पर घबरा जाते हैँ. वो खुद को कोरोना संक्रमित समझने लगते हैँ. इसस दौरान लोग अनावश्यक रूप से तनाव की स्थिति में आ जाते हैँ. इस स्थिति में मानसिक रूप से सबल रहने की जरूरत है. इस संबंध में सदर पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ उमाशंकर ने कहा कि कोरोना काल में लोग डर जाते है. लेकिन किसी भी स्थिति में भयभित होने की जरूरत नहीं है. कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को निरंतर बेहतर सुविधा प्रदान की जा रही है. कहा कि इसके अलावा आमजनो को भी जागरूक रहना चाहिये. सभी बुखा, सर्दी व अन्य शारीरिक समस्या कोरोना ही हो, यह जरूरी नहीं. लोगों को बुखार व अन्य शिकायत टायफाइड का लक्षण हो सकता है. इसलिये तुरंत चिकित्सक से सलाह लें. डॉक्टर जांच व परीक्षण के आधार पर कोरोना या टायफाइड की पुष्टि करेंगे. कहा कि इस दौरान मरीजों को किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिये. कोरोना हो या न हो हमेशा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्ज है.
कोरोना और टायफाइड में अंतर
डॉ प्रसाद का कहना है कि टाइफाइड और कोरोना आपस में बिल्कुल अलग बीमारी है. टाइफाइड पानी और फूड जनित बीमारी है. जबकि, कोरोना वायरस पूरी तरह से संक्रमित वायरल बीमारी है. हालांकि, दोनों के कुछ लक्षण आपस में मिलते है जैसे बुखार आना, उल्टी लगना, बदन दर्द व कमजोरी लगना. लेकिन टाइफाइड एक प्रकार के बैक्टीरिया से फैलता है जिसे साल्मोनेला टाइफी के नाम से जाना जाता है. जबकि कोरोना वायरस पूरी तरह से वायरल बीमारी है. इसलिये दोनो मे विभेद करते हुये आचरण आवश्यक है. लोग सही जानकारी के अभाव में गलत कर बैठते हैँ. गांव के अयोग्य चिकित्सक की सलाह लेकर जान को जोखिम में डाल देते हैँ. कहा कि लोगों को किसी प्रकार की भ्रांतियों से दूर रहकर सही उपचार करावें.
कैसे होता है टाइफाइड
डॉ प्रसाद ने कहा कि टायफाइड आसपास में स्वच्छता नहीं होने के कारण फैल सकता है. ज्यादातर यह दूषित या गंदे पानी व खाने के जरिये शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है. दरअसल, टाइफाइड का बैक्टीरिया जल या सूखे मल में सप्ताह भर जिंदा रहता है. जिसके संपर्क में आते ही कोई भी संक्रमित हो सकता है.
क्या है इसके लक्षण
डॉ प्रसाद ने कहा कि टायफाइड होने पर मरीजों को कमजोरी होने लगती है, भूख कम हो जाती है, सिर दर्द की शिकायत रहती है, शरीर में दर्द रहता है, ठंड के साथ बुखार आ सकता है. दस्त की भी समस्या हो सकती है. मरीज सुस्ती व आलस्य का अनुभव करते हैं. पाचन तंत्र बिगड़ जाता है. इसके अलावा मरीजों को 102 से 104 डिग्री का बुखार हो सकता है. वहीं कोरोना में बदन दर्द, उल्टी होना, कमजोरी, कफ व खांसी व नाक बहने की शिकायत होने लगती है. इन सब के लक्षण के आधार पर कोरोना या टायफाइड मे विभेद करना मुश्किल हो जाता है. इसलिये चिकित्सक भी बेगैर जांच किये कोरोना की पुष्टि नहीं कर सकते है. लेकिन लोग जांच से पहले ही कोरोना के भय से भयभित हो जाते हैँ.
टाइफाइड वाले रोगी बरतें ये सावधानी
o स्वच्छता का रखें ध्यान
o गर्म पानी और साबुन से हाथ धोएं
o गर्म पानी पीएं
o कच्चा आहार का सेवन न करें, फल के छिलके हटाकर खाएं
o अधपका भोजन न ग्रहण करें, हमेश पूरी तरह से पका भोजन ही खाएं
o घरेलू कार्यों न करें, नहीं तो संक्रमण और लोगों को फैल सकता है
o अपना खाना किसी से शेयर न करें, अपने बर्तन में किसी और को खाने न दें
o मक्खन, पेस्ट्री, घी, तले हुए आहार व मिठाईयां आदि खाने से बचें, कुल मिलकार बाजार की बनी चीजों को खाने से बचें
o भारी भोजन जो देर से पचता हो जैसे मांसाहारी आहार व अन्य भूंजे-तेल युक्त चीजें खाने से बचें,
दारु-शराब, सिगरेट का सेवन भूल कर भी न करें
सदैव कोरोना प्रोटोकॉल का करें अनुपालन
डॉ प्रसाद ने बताया कि कोरोना होने या न होने की स्थिति में भी सदैव विभाग की ओर से जारी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्ज है. इससे बचने के लिये हमेशा मास्क पहने. लोगों के बीच दो गज की दूरी बनाकर रखें. बार- बार हाथ को साफ करें. इसके अलावा अन्य सावधानी बरतनी जरूरी है।
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