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सी एम कॉलेज के संस्कृत विभाग तथा डा प्रभातदास फाउंडेशन,दरभंगा के द्वारा ‘विश्व परिवार दिवस’ पर वेबीनार आयोजित

सी एम कॉलेज के संस्कृत विभाग तथा डा प्रभातदास फाउंडेशन,दरभंगा के द्वारा ‘विश्व परिवार दिवस’ पर वेबीनार आयोजित

प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में ‘कोविड-19 और हमारा परिवार’ विषयक कार्यक्रम में केवटी विधायक सहित जुड़े अनेक विद्वान

कोविड-19 ने समाज की मूल इकाई परिवार तथा जीवनदातृ प्रकृति की अहमियत बताया- डा मुरारी मोहन

प्रत्येक सफल शख्सियत के पीछे उनके परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण- प्रो विश्वनाथ झा

परिवार हमारे चरित्र व व्यक्तित्व निर्माण की सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशाला- डा जयशंकर

कोरोना ने बताया कि हम धरती के मेहमान मात्र हैं,मालिक नहीं- डा ममता स्नेही

परिवार मानवीय मूल्य व संस्कार प्रदानकर करता है हमारा सामाजिकीकरण- डा विकास सिंह
विश्व में लगभग 100 वर्ष बाद कोरोना जैसी महामारी आती है। कोरोना ने हमें अपने परिवार की महत्ता से बखूबी अवगत कराया है,जो हमें सुरक्षा व विकास प्रदान कर मानवीय मूल्य और संस्कृति की सीख देता है।मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति एवं उसका सर्वांगीण विकास पारिवारिक जीवन में ही संभव है। यह समाज की सबसे छोटी एवं मूलभूत इकाई है। कोविड-19 ने परिवार तथा प्रकृति की अहमियत को बखूबी सिद्ध किया है। संयुक्त परिवार टूटने से हमारी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। उक्त बातें केवटी (दरभंगा) के विधायक डा मुरारी मोहन झा ने सी एम कॉलेज के संस्कृत विभाग तथा डा प्रभात दास फाउंडेशन,दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में ‘विश्व परिवार दिवस’ के अवसर पर “कोविड-19 और हमारा परिवार” विषयक सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में कहा। विधायक ने कोरोनाकाल में लोगों को हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए शैक्षणिक एवं सामाजिक रूप से सक्रियता के लिए सी एम कॉलेज की प्रशंसा करते हुए कहा कि फाउंडेशन अपने सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यों द्वारा महिलाओं,दलितों,पिछड़ों,बच्चों तथा अल्पसंख्यकों के लिए अनेक प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय कार्य करता रहा है। उन्होंने सरकार तथा प्रशासन द्वारा कोविड-19 नियंत्रण में किए गए कार्यों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हम सबों को मिलकर पारिवारिक सदस्य के रूप में कोरोना से लड़ाई लड़कर जीतना है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि परिवार के बिना मनुष्य अकेला नहीं रह सकता है।चाहे वह कितना भी धन कमा लें या आराम की वस्तुओं को जूटा लें।परिवार में आपसी भावात्मक लगाव होता है, जिसके बिना हमारा जीवन अधूरा है।प्रत्येक सफल शख्सियत के पीछे उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।आज जरूरत है कि हम अंधेरे को न कोसते हुए दीप जलाना शुरू करें। त्याग और सेवा से हमारा हौसला बढ़ता है। संकट को हम शक्ति में बदलें तथा सदा प्रसन्न रहते हुए दूसरों को प्रसन्नता प्रदान करें।परिवार की महत्ता को बताने के उद्देश्य से ही संस्कृत साहित्य में ‘मातृदेवो भव,पितृदेवो भव’ जैसे आदर्श वाक्य उल्लिखित हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के अवकाश प्राप्त प्राध्यापक डा जयशंकर झा ने कहा कि परिवार हमारे चरित्र व व्यक्तित्व निर्माण की सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशाला है। हम जीवनदायी प्रकृति तथा पूरी मानवता के प्रति गैर जिम्मेदार हो गए थे,जिसका परिणाम हमें कोरोना महामारी के रूप में झेलना पड़ रहा है। इसने हमें परिवार के महत्व को बताने का काम किया है। वेद सहित पूरे संस्कृत साहित्य में परिवार की महत्ता वर्णित है जो आज भी प्रासंगिक है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में मारवाड़ी महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा विकास सिंह ने कहा कि परिवार मानवीय मूल्य व संस्कार प्रदान कर हमारा सामाजिकीकरण करता है। कोरोना जैसी आपदा को कोई भी व्यवस्था नहीं झेल सकती है। इस समय हमें शादी,उपनयन जैसे सामूहिक आयोजनों से दूर रहकर मानसिक सपोर्ट देने वाले परिवार की शरण में रहना चाहिए।
विषय प्रवेश कराते हुए विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डा ममता स्नेही ने वेबीनार के विषय को महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक बताते हुए कहा कि कोरोना ने बता दिया है कि हम धरती के मात्र मेहमान हैं,मालिक नहीं।यूँ परिवार प्राचीन काल से ही रहा है,पर कोविड-19 ने परिवार की महत्ता को अधिक सिद्ध किया है।परिवार में रहकर हम एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हुए आपसी सहयोग को सीख पाते हैं। कोरोना काल में नई कला एवं प्रतिभाओं को उभरने का मौका मिला है।कार्यक्रम में डा अमरनाथ प्रसाद,डा मयंक श्रीवास्तव,डा शंभू मंडल,डा दीनानाथ साह,डा सुशांत कुमार,डा शशि शेखर, राघव झा,राजकुमार गणेशन, अनिल सिंह,राहुल कुमार महतो,नलिन झा,नीली रानी,अजीत झा,सुधांशु गुप्ता,प्राची पराशर,बंदना, शिवानी,अमित,राकेश,राजन शशिधर झा,रामशंकर,आकांक्षा निधि,नूतन रोजी,अरबाज खान, दीपक कुमार,कुमार अनुराग, दीपशिखा,आशीष रंजन,प्रियंका कुमारी,श्रेया बोहरा,रानी कुमारी राखी,रंजना,रितु झा,रोहित राय, संतोष यादव,राकेश मेहता,मोहित कुमार,मो.जफर,शशि सोनी, सत्यम कुमार,शशिधर सहित 70 से अधिक व्यक्तियों ने भाग लिया।
वेबीनार का प्रारंभ संस्कृत छात्र संगम जी झा के स्वस्तिवाचन से हुआ।संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत सी एम कॉलेज के संस्कृत प्राध्यापक डा संजीत कुमार झा ने किया,जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया।

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