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नाहक अस्पताल में न बढ़ाये भीड़, घर पर ही चिकित्सकीय सलाह से करें कोरोना का उपचार: डॉ अहसन हमीदी

नाहक अस्पताल में न बढ़ाये भीड़, घर पर ही चिकित्सकीय सलाह से करें कोरोना का उपचार: डॉ अहसन हमीदी

•केवल 20 प्रतिशत लोगो को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत
•संयम व सावधानी बरतने से अन्य गंभीर मरीज़ों को मिल सकता अस्पतालों में बेड
•कोरोना के हल्के लक्षण वाले 80 प्रतिशत लोगहोम आइसोलेशन में हो सकते हैं स्वस्थ
•घर मे मानसिक स्थिति को रखे मज़बूत, परिवार के सदस्य दें साथ

दरभंगा. 18 मई. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर इतनी तेज है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी में भी चुनौतियों आ रही है। इस स्थिति में घबराने की ज़रूरत नहीं है. डीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अहसन हमीदी का कहना है कि केवल 20 प्रतिशत क्रिटिकल मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है, जबकि अन्य 80 प्रतिशत मरीज होम आइसोलेशन में रह कर दिशा- निर्देशों का सही से पालन कर स्वस्थ हो सकते हैं. अगर लोग इस पर ध्यान दें और संयम बरतें तो बेहद गंभीर मरीजों को अस्पतालों में आसानी से बेड भी उपलब्ध हो सकेगा. इस प्रकार अस्पताल पर मरीज़ो का भार कम किया जा सकेगा.

डॉ हमीदी के अनुसार हल्के लक्षण वाले मरीज़ होम आइसोलेशन में कोरोना को मात दे सकते है. इस दौरान वह अपने स्वास्थ्य की ख़ुद निगरानी करते रहें व चिकित्सक के संपर्क में बने रहें. सेहत में सुधार नहीं होने व ऑक्सीजन लेवेल कम होने पर डॉक्टर अस्पताल में भर्ती होने की सलाह देते है. उन्होंने कहा इस दौरान मरीज़ों को अपने मानसिक स्थिति को मजबूत रखना होगा. इसमे परिवार के सदस्यों का साथ जरूरी है. डॉ हमीदी ने बताया कि किसी प्रकार के हल्के सर्दी या बुखार होने पर घबराने की ज़रूरत नहीं है. ऐसा देखा जाता है कि शुरुआत में ही लोग डर के कारण बिना चिकित्सक की सलाह से दवा दुकानदारों के कहने पर एंटीबीबीओटिक वे स्ट्रॉइड का सेवन करने लगते है, जो शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि किसी प्रकार का लक्षण होने पर तुरन्त कोरोना की जांच कराए. पॉज़िटिव आने पर चिकित्सक की सलाह से घर पर आइसोलेटेड रह हम कोरोना को मात दे सकते है. उन्होंने बताया कि हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीज़ 5 दिन में ठीक होने लगते है. इस दौरान संयम बरतने की आवश्यकता है.

क्या है होम आइसोलेशन

डॉक्टर की दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए घर पर बाकी सदस्यों से अलग रहकर मरीज का इलाज ‘होम आइसोलेशन’ कहलाता है. यहां ध्यान रखना जरूरी है कि कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति में कोई गंभीर लक्षण न हों.

•घर पर दो जरूरी तैयारियां

घर में कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के लिए अलग हवादार कमरा और अलग शौचालय हो.

•घर में कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति की 24 घंटे देखभाल करने के लिए कोई व्यक्ति हमेशा मौजूद हो.

होम आइसोलेशन में रोगी क्या करें:

• घर के अन्य सदस्यों से दूरी रखें और हवादार कमरे में रहें, जहां तक संभव हो खिड़कियां खुली रखें.
अपने घरवालों से अलग शौचालय व बाथरूम काम में लें.

•हमेशा ट्रिपल लेयर मास्क पहनें और मास्क को 6 से 8 घंटे बाद बदलें. इसे पेपर बैग में लपेटकर 72 घंटे के बाद ही सामान्य डस्टबिन में डालें.

•हैंडवॉश व पानी से हाथों को 40 सेकेंड तक अच्छी तरह धोएं या 70 प्रतिशत एल्कोहल युक्त सैनेटाइजर का उपयोग करें.

•छींकते या खांसते समय रूमाल, टिश्यू या कोहनी से नाक-मुंह को ढंकें.
•ज्यादा छुई जानेवाली सतहों को छूने व उपकरणों का इस्तेमाल करने से बचें. मोबाइल व दैनिक उपयोग की अन्य चीजों को सैनेटाइज करें.
•अपने बर्तन, तौलिया, चादर आदि को अलग रखें.
•पर्याप्त मात्रा में पानी, ताजा जूस, सूप जैसे तरल पदार्थ पीए
•अन्य रोग (शूगर, ब्लड प्रेशर आदि) का इलाज जारी रखें.
•आइसोलेशन के दौरान शराब, धूम्रपान व अन्य किसी नशीली चीज का सेवन बिल्कुल न करें तथा पालतू जानवरों से दूर रहें.

डॉक्टर द्वारा दी गयी सलाह का पालन करें व नियमित दवाइयां लें.

•घर पर अतिथियों को न बुलाएं और न ही किसी से मिलें. स्कूल, बाजार, सार्वजनिक स्थान या सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम में न जाएं.

ऐसे में लें डॉक्टर की सलाह।

डॉ हमीदी के अनुसार बुखार अगर तीन दिनों से ज्यादा रह जाये या बार-बार आ रहा हो और कोविड-19 के नीचे दिये गये लक्षण दिखायी दें, तो डॉक्टर की सलाह लें.

•सांस लेने में कठिनाई व छाती में लगातार दर्द या दबाव
•मानसिक भ्रम या होठों या चेहरे का नीला पड़ जाना
•बुजुर्गों, गर्भवती व बच्चे को रोगी से रखें दूर
•यदि परिवार में 60 साल से अधिक उम्र का कोई बुजुर्ग हैं या कोई गर्भवती है या छोटे बच्चे हैं या फिर किसी गंभीर बीमारी जैसे – कैंसर, अस्थमा, सांस की बीमारी आदि से ग्रसित हों तो उन्हें कोविड-19 के मरीज से दूर रखें.

इस तरह करें स्वास्थ्य की जांच

डॉ हमीदी ने बताया दिन में दो बार (सुबह और रात) स्वास्थ्य की जांच करें. इसके अलावा जब भी बुखार या बेचैनी महसूस हो तो निम्न जांच जरूर करें.

•थर्मामीटर से तापमान चेक करें. (100 फॉरेनहाइट से ज्यादा न हो.)
•ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर देखें. (SpO2 लेवल यानी ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल 94 प्रतिशत से कम न हो.)
•जांच के बाद ये सभी नोटबुक पर डेट और टाइम के साथ नोट कर लें.

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