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दरभंगा यूनेस्को क्लब द्वारा आयोजित परिचर्चा कोरोना की चुनौतियां और समाधान

दरभंगा यूनेस्को क्लब द्वारा आयोजित परिचर्चा
कोरोना की चुनौतियां और समाधान
कोविड-

दरभंगा news24live अजित कुमार सिंह

19 महामारी के संदर्भ में सबसे बड़ी चुनौती तीसरी लहर के रूप में अब आने वाली है। भारत जैसे विशाल देश में हर व्यक्ति तक टीका पहुंचाना और उन्हें इसे लगाने के लिए तैयार करना सबसे बड़ी मुश्किल साबित हो सकती है। अभी तक लगभग 21 करोड़ देशवासियों का टीकाकरण हुआ है बकाया देश के करोड़ो लोगों को 12 महीनों में सुरक्षित करना बड़ी चुनौती है। अगर हम इसमें सफल रहते हैं तो दुनिया में देश की छवि बेहतर होगी, जिसका सकारात्मक असर निवेश पर होगा। कोरोना की चुनौतियां और समाधान के संदर्भ में दरभंगा यूनेस्को क्लब द्वारा आयोजित एक घंटे की वेबीनार में ऐसी विचारधारा सामने आई जिसमें वरिष्ठ लोगों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि डॉक्टर मुस्ताक अहमद, कुलसचिव , ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा ने कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को देखते हुए देश में स्वास्थ्य का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की अपील की|ऐसे में बजट में हेल्थ पर सरकार का बड़ा फोकस होना चाहिए। हेल्थ से जुड़ी सरकारी स्कीमों का दायरा बढ़ाने के साथ उन्हें लेकर भी कुछ अहम एलान हो सकते हैं। इसमें आयुषमान भारत योजना और प्रधानमंत्री जनऔषधि जैसी योजनाएं हैं। इकोनॉमिक सर्वे से भी यह संकेत मिल रहे हैं कि इस बार हेल्थ बजट जीडीपी का 2.5 से 3 फीसदी रह सकता है जो लंबे समय से जीडीपी का 1 फीसदी ही बना हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा की सब कुछ सरकार पर निर्भर न रहकर हमें स्वयं को मजबूत बनाना होगा ,अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

प्रोफेसर समीर वर्मा, कुलपति , संदीप विश्वविद्यालय, सुजौल ने बताया कि  महामारी का शिक्षा पर पहले से ही गहरा प्रभाव पड़ा है क्योंकि दुनिया में लगभग सभी जगह स्कूल बंद हैं, यह हमारे जीवनकाल में सभी शिक्षा प्रणालियों के लिए सबसे बड़ा झटका है। स्वास्थ्य आपात स्थिति के एक गहरे वैश्विक मंदी में तब्दील हो जाने पर यह क्षति और गंभीर हो जाएगी। बहुत सी परीक्षाएं लंबित है, डिजिटलाइजेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव है।

क्लब के  अध्यक्ष बिनोद कुमार पंसारी  ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा की महामारी एवं लॉकडाउन की वजह से उद्योग से लेकर व्यापार तक को काफी आर्थिक क्षति हुई है एक उद्योग मजदूर से लेकर उपभोक्ता पर निर्भर करता है। वर्तमान में 59% लघु उद्योग आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं जिस पर पुणः सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा की कोरोना की तीसरी लहर का सामना बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन, टीकाकरण एवं सरकार के दिशा निर्देश- मास्क का उपयोग, 2 गज की दूरी एवं हाथ की साफ सफाई द्वारा कर सकते हैं। हम होंगे कामयाब किंतु हमें संयम रखना होगा।

क्लब के  महासचिव राघवेंद्र कुमार  , निर्देशक, माउंट समर कन्वेंट स्कूल, लहरियासराय ने कहा कि  ऑनलाइन शिक्षा ग्रामीण भारत की पहुंच से बहुत दूर और गैर- व्यावहारिक है। ये भी सच है कि कक्षा की तुलना ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली से की जाए तो इससे भारत के बहुसंख्यक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले वंचित समुदाय के बच्चों के लिए पर्याप्त साधन और इंटरनेट डाटा जुटाना मुश्किल है।

डॉ रंजना रानी मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल में निजी स्कूलों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है लगभग 250 स्कूल बंदी के कगार पर आ चुके हैं इस और भी सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है।

उपाध्यक्ष मनोरंजन प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि निजी क्षेत्रों में बहुत से लोगों की नौकरी चली गई है इसलिए जितना जल्द हो सके सरकारी एवं निजी क्षेत्र में खाली जगहों पर नौकरी देकर रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।

उपाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार ने कहा कि छोटे बच्चों पर इस काल में माता पिता को ही गुरु बनना पड़ेगा एवं कई ऐप के माध्यम से उन्हें शिक्षित करना पड़ेगा।

वेबीनार की संचालिका श्रीजा अग्रवाल ने कहा कि कोरोना सिर्फ एक स्वास्थ्य की समस्या नहीं है बल्कि इसका प्रभाव हमारी जिंदगी के हर क्षेत्र में पड़ेगा। हम लोगों से कैसे मिलते हैं, हम व्यवसाय कैसे करते हैं ,हम पढ़ते कैसे हैं। एक संपर्क रहित इकोनामी का विकास हो रहा है जिसमें टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका होगी। उद्यमी अपने बिज़नेस मॉडल और अन्य कार्यों का पुनर्खोज करेंगे जिसे इस महामारी ने पीछे छोड़ दिया है।  टेक्नोलॉजी और बिज़नेस ऑटोमेशन प्रत्येक कार्य की रीढ़ होगी जिसका हम व्यवसाय में उपयोगी करते हैं।  ईआरपी टूल्स का उपयोग पहले से कहीं अधिक किया जाएगा ताकि आमने-सामने बात-चीत और अपडेट कम से कम करने पड़ें.

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