कोरोना काल में सावधानी बरतें गर्भवती महिलाएं, रखें ध्यान
•सदर अस्पताल में जनवरी से मई तक 2041 महिलाओं का हुआ संस्थागत प्रसव
•सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद जननी योजना का मिलता है लाभ
•प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती का किया जाता है पूर्ण जांच

मधुबनी सदर अस्पताल में 1 जनवरी से 31 मई तक 2045 गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव हुआ है, जिसमे जनवरी में 441, फरवरी में 414, मार्च में 573, अप्रैल में 422 एवं मई में 195 प्रसव हुए हैं. जिसमे 577 महिलाओं को जननी योजना का लाभ भी मिला। इन आंकड़ों को देखकर लग रहा है कि कोविड-19 के दौर में भी स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं की सेहत के प्रति सजग है। ताकि गर्भवती व गर्भस्थ शिशु पर कोई आंच न आए. इसके लिए आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं का निरंतर फॉलो-अप कर रही हैं एवं आवश्यकता होने पर उनकी स्वास्थ्य जाँच भी सुनिश्चित करा रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत हर माह की 9 वीं तारीख को गर्भवती की जांच पूर्ण की जा रही। सदर अस्पताल में कोरोना संक्रमित महिलाओं के प्रसव संबंधी सारी सुविधाएँ भी उपलब्ध करायी गयी है। वहीं, कोरोना काल में भी सरकार द्वारा सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर गर्भवती महिला को जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत आर्थिक लाभ दिया जा रहा है।
ध्याान रखें संक्रमित महिलाएं:
एसीएमओ डॉ एसएस झा ने बताया कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए । ऐसे में अपने खान-पान को लेकर अपनी दिनचर्या में उन्हें भी बदलाव लाना चाहिए। वह बाहर से आने वाले लोगों से नहीं मिले तो ज्यादा ठीक रहेगा, अगर मजबूरी है तो मास्क और सामाजिक दूरी का पालन करें । इस समय जितना अपने मन को खुश रखें यह उसके और गर्भस्थ शिशु के लिए बेहतर होगा ।
कोरोना संक्रमित होने पर प्रोटोकाल का पालन करें:
गर्भवती महिला अगर कोरोना संक्रमित हो जाती है, तो उसे प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए। वह सबसे पहले खुद को आइसोलेट कर लें और किसी भी व्यक्ति से ना मिले। घर में छोटे बच्चे हैं तो उनसे भी दूरी बनाकर रखें। डाक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा लें। तनावमुक्त होकर उपचार कराएं। किसी महिला को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो ऐसे में उसे अपनी गर्भावस्था के दौरान सचेत रहने की बहुत जरूरत है। कई बार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को हाइपरटेंशन की वजह से झटके आने लगते हैं। इसे प्री एक्लेमीशिया कहते हैं । ऐसे में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो सकती है। इसका उपचार जरूरी है।
उच्च जोखिम में सावधानी बहुत जरूरी:
सदर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवृत्ति मिश्रा ने बताया उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था वह अवस्था है, जिसमें महिला या उसके भ्रूण के स्वास्थ्य या जीवन को खतरा होता है। किसी भी गर्भावस्था में जहां जटिलताओं को संभावना अधिक होती है, उस गर्भावस्था को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी या उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में रखा जाता है. इस तरह की गर्भावस्था को प्रशिक्षित चिकित्सक की विशिष्ट देखभाल की आवश्यकता होती है। घर में यदि कोई सदस्य कोरोना संक्रमित है तो गर्भवती के संपर्क में न आएं। खानपान की रूटीन का पालन करना जरूरी है । डाइट में विटामिन को जरूर शामिल करें जिससे कि डाइट लेने में किसी प्रकार की समस्या ना हो ऐसे में तेल, घी और मसालेदार खाने से परहेज करें ।
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जननी बाल सुरक्षा योजना के आर्थिक लाभ:
सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण एवं शहरी दोनों प्रकार की गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने के बाद अलग-अलग प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा प्रदान की जाती है जिसमें ग्रामीण इलाके की गर्भवती महिलाओं को 1400 रूपये . एवं शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. साथ ही इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों पर संदर्भित करने के लिए आशा कार्यकर्ता को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है जिसमें प्रति प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में आशा को 600 रूपये .एवं शहरी क्षेत्रों के लिए आशा को 400 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव पर आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है।
ऐसे रखें ख्याल
•संतुलित आहार लें।
•डाइट में विटामिन शामिल करें
•तेल, घी मसालेदार खाने से परहेज़ करें
•बुखार होने पर घबराएं नहीं
•इम्युनिटी का विशेष खास ख्याल
•कोरोना के लक्षण है तो तुरन्त डाक्टर से संपर्क करें
•पैरासिटामोल, विटामिन सी, फोलिक एसिड, जिंक और बी कांप्लेक्स दवा जरूर रखें
•हर दिन हल्का व्यायाम जरूर करें
•तनाव न लें।
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