Darbhanga ;- भाकपा(माले) के राज्यव्यापी आवाहन पर आज जिला में दर्जनों जगह प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित

 

लोकतंत्र के विमर्श को पलटने का काम किया है नीतीश कुमार ने- आर के सहनी

पंचायतों का कार्यकाल नहीं बढ़ाने का निर्णय आत्मघाती साबित होगा – बैद्यनाथ

भाकपा(माले) के राज्यव्यापी आवाहन पर आज जिला में दर्जनों जगह प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित

यदि कार्यकाल बढ़ाने का नियम नहीं था तो सरकार को अध्यादेश ला सकती थी

दरभंगा न्यूज़ 24live अजित कुमार सिंह

दरभंगा  पंचायत चुनाव को 6 महीना आगे बढ़ाओ, पंचायतों को भंग करने का फैशला वापस लेने, परामर्शी समिति बनाने का फैशला वापस लेने, पंचायत को नौकरशाह के हाथ मे सौपना बंद करने, लोकतंत्र व संविधान पर हमले के खिलाफ आज भाकपा(माले) के राज्यव्यापी आवाहन पर आज जिला में दर्जनों जगह प्रतिवाद कार्यक्रम किया गया।
इस अवसर पर भाकपा(माले) जिला कार्यालय में वरिष्ठ नेता आर के सहनी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस अवसर पर अबधेश सिंह, गंगा मंडल, रानी शर्मा, शिवन यादव, आइसा जिला अध्यक्ष प्रिंस राज शामिल थे।
वही केवटी में भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव प्रतिवाद कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस अवसर पर भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता आर के सहनी ने कहा नीतीश सरकार मोदी सरकार के तर्ज पर लोकतंत्र के विमर्श को पलट देने निर्णय लेने वाले निर्वाचित जनप्रतिनिधि अब परामर्शी समिति में सलाह देने वाले बन जाएंगे, और जनप्रतिनिधियो के निर्णय को लागू करने वाले अफसर पंचायतों, ग्राम कचहरियों के मामले में निर्णय लेने वाले बन जाएंगे। यह लोकतंत्र के साथ धोखा हैं इससे बिहार पंचायती और ग्राम कचहरी से लाभान्वित होने वाली जनता कभी स्वीकार नही करेगी। उन्होंने कहा कि पंचायतों को अगले चुनाव तक विस्तार देना ही एक मात्र पंचायत और ग्राम कचहरी में लोकतंत्र को जिंदा रखने का रास्ता हैं।

वही भाकपा(माले) जिला सचिव बैधनाथ यादव पंचायतों को भंग किये जाने के सरकार के निर्णय की कड़ी आलोचना की हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता की मांग को सरकार में अनसुना किया है। जनप्रतिनिधि की भूमिका को कम कर इस दौर में आत्मघाती साबित होगा।
उन्होंने कहा कि कोविड के प्रति जागरूकता अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों के अनुभव का बेहतर इस्तेमाल हो सकता हैं। लेकिन सरकार इसपर तनिक भी ध्यान नही दिया।
उन्होंने कहा कि यदि पंचायतों के कार्यकाल बढ़ाने का कोई नियम नही था तो क्या सरकार अध्यादेश नही ला सकती थी। उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार की मंशा ही कुछ और है।

वही कार्यक्रम बिरौल, हनुमाननगर, केवटी, बिरौल, हायाघाट, बहादुरपुर, सहित कई प्रखंडों में आयोजित किया गया।

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