रमेश रंजन के निधन से शोक की लहर, विद्यापति सेवा संस्थान ने जताई शोक संवेदना
मैथिली

धरोहर सांस्कृतिक मंच के मजबूत स्तंभ रमेश रंजन झा का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन की सूचना पाते ही कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने शोक जताया। अपने शोक संदेश में संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मिथिला की पारंपरिक लोक संगीत उनके आत्मा में बसती थी। इसके संरक्षण के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदम हमेशा ही सराहनीय व अनुकरणीय बने रहेंगे। मैथिली के धरोहर गीत संगीत को व्यवहारिक रूप में जीवंत रखने वाले कला अनुरागी के रूप में उनकी अनुपस्थिति हमेशा खलेगी।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा उनके निधन को मैथिली कला संस्कृति के क्षेत्र के लिए अपूर्णीय क्षति बताया। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि मैथिली के धरोहर पारंपरिक गीत संगीत को पुनर्जीवित करते हुए इसकी व्यवहारिकता कायम करने के लिए वे हमेशा यादों में बने रहेंगे। प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि उनके निधन से मैथिली के धरोहर सांस्कृतिक मंच को सजाने संवारने वाला मजबूत स्तंभ हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गया।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि मातृभूमि एवं मातृभाषा की विरासत के प्रति गहरी आस्था रखने वाले स्वाभिमानी कलाकार के रूप में उनकी कमी हमेशा खलेगी। डाॅ महेन्द्र नारायण राम ने कहा कि जीवट प्रवृत्ति के मृदुभाषी एवं लगनशील कला प्रेमी के रूप में वे अपने कृतित्व में हमेशा जीवंत बने रहेंगे।
इनके निधन पर प्रो विजयकांत झा, विनोद कुमार झा, हीरा कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढाभाई, डॉ गणेश कांत झा, आशीष चौधरी, चंदन सिंह, चौधरी फूल कुमार राय, नवल किशोर झा, डाॅ सुषमा झा, मिथिलेश चौधरी, दुर्गानंद झा, माधव राय, केदारनाथ कुमर आदि ने भी अपनी शोक संवेदना प्रकट की।
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