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बिहार के पूर्व राज्य सचिव व चर्चित मार्क्सवादी शिक्षक काॅ. रामजतन शर्मा का निधन. पार्टी जिला कार्यालय का झुकाया गया झंडा, और दी गई श्रधांजलि

 

माले की पहली पांत के नेता, बिहार के पूर्व राज्य सचिव व चर्चित मार्क्सवादी शिक्षक काॅ. रामजतन शर्मा का निधन.

पार्टी जिला कार्यालय का झुकाया गया झंडा, और दी गई श्रधांजलि

दरभंगा भाकपा-माले आंदोलन की पहली पांत के नेता, बिहार के पूर्व राज्य सचिव व चर्चित मार्क्सवादी शिक्षक काॅ रामजतन शर्मा का आज इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान पटना हृदयाघात से निधन हो गया है। उनके निधन की खबर सुनते ही पार्टी जिला कार्यालय में झंडा झुका दिया गया। तथा श्रधांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उनके तैलीय चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर सभा की अद्यक्षता भाकपा(माले) जिला स्थायी समिति सदस्य नंदलाल ठाकुर में किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ नेता आर के सहनी, लक्ष्मी पासवान, सदीक भारती, आइसा जिला अध्यक्ष प्रिंस राज, रानी शर्मा, गंगा मंडल, भोला पासवान, उमेश साह, विनोद सिंह, किसुन पासवान, कामेश्वर पासवान, उपेंद्र राम, विजय महासेठ शामिल थे।

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता आर के सहनी में विस्तार से बताते हुए कहा कि 70 के दशक में नक्सलबाड़ी के आंदोलन से प्रेरित बिहार के ग्रामांचलों में आरंभ हुए दलित-गरीबों के राजनीतिक-सामाजिक आंदोलन ने रामजतन शर्मा को गहरे तौर पर प्रभावित किया था और वे जल्द ही सरकारी नौकरी छोड़कर इस आंदोलन के हिस्सेदार बन गए. 80 के दशक में तत्कालीन मध्य बिहार के क्रांतिकारी किसान आंदोलन के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

उन्होंने न केवल बिहार बल्कि देश के कई हिस्सों में भाकपा-माले के संगठन को खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे झारखंड-उत्तरप्रदेश पार्टी के राज्य सचिव तथा छतीसगढ़ के प्रभारी रहे. 90 के दशक में लंबे समय तक बिहार में भी पार्टी के राज्य सचिव का दायित्व संभाला. वे पार्टी की केंद्रीय कमिटी व पोलित ब्यूरो के सदस्य के साथ-साथ केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के भी चेयरमैन रहे. वे पार्टी के हिंदी मुखपत्र समकालीन लोकयुद्ध के लंबे समय तक संपादक रहे। साथ-साथ पार्टी केंद्रीय शिक्षा विभाग के प्रमुख का भी दायित्व संभाला।

छात्र-युवाओं के बीच क्रांतिकारी विचारों के प्रचार-प्रसार व उनके बीच से राजनीतिक कार्यकर्ता तैयार करने में उनकी अद्वितीय भूमिका को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

माले नेता में कहा कि जहानाबाद जिला अस्पताल में ईसीजी की मामूली व्यवस्था नहीं होने के कारण सही समय पर हृदयाघात का इलाज आरंभ नहीं हो सका. यदि ऐसा होता तो शायद उन्हें बचाया जा सकता था। हम उनके क्रांतिकारी मिशन को आगे बढ़ाते रहेंगे

भाकपा-माले दरभंगा जिला कमिटी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

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