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कोरोना व टायफाइड में अंतर समझ, ससमय उचित चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक- डॉ उमाशंकर प्रसाद

गर्मी के दिनों में टायफाइड से अधिक नुकसान, जानकारी ज़रूरी

•कोरोना व टायफाइड में अंतर समझ, ससमय उचित चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक- डॉ उमाशंकर प्रसाद
•टायफाइड का आयुर्वेदिक उपचार सम्भव

दरभंगा कोरोना काल में वायरस के साथ टायफाइड के मरीज भी सामने आने लगे हैं। एक साथ वायरस और टायफाइड के लक्षण लोगों को असमंजस की स्थिति में डाल रहे हैं। गर्मियों के दिनों में टायफाइड से अधिक डर रहता है। वायरस और टायफाइड के कुछ लक्षण एक जैसे हैं तो कुछ अलग हैं। कैसे कोरोना वायरस और टायफाइड के बीच के अंतर को समझना जरूरी है। सदर पीएचसी प्रभारी डॉ उमाशंकर प्रसाद के अनुसार कोरोना काल में बुखार होने की स्थिति में लोग अनावश्यक रूप से घबरा जाते हैं। कोरोना के भय से सही उपचार को लेकर कोताही बरतते हैं। इस स्थिति में सामान्य बुखार, टायफाइड व कोरोना की समझ रख कर सही व उचित चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है। इसके लिए व्यक्ति निकट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क कर सकते हैं। वहां 24 घंटे डॉक्टर की उपलब्धता रहती है। किसी प्रकार की जांच व चिकित्सा को लेकर वहां निःशुल्क सभी व्यवस्था मौजूद है। लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए। इस दौरान किसी प्रकार के बिचौलियों से सम्पर्क नहीं करना चाहिए। यह नुकसानदायक साबित हो सकता है।

सबसे पहले कोरोना की कराएं जांच:
डॉ प्रसाद ने कहा टायफाइड के लक्षण में सिर दर्द, पेट दर्द होता है, ज्यादा बुखार रहता है, भूख नहीं लगना, कमजोरी लगना। वहीं कोरोना के लक्षण में सर्दी-जुकाम, तेज बुखार, गले में दर्द, बदन दर्द, सुगंध नहीं आना, स्वाद नहीं आना, कमजोरी लगना। दोनों के लक्षण में समानता कम है और अंतर ज्यादा है। उस अंतर को समझना जरूरी है। हालांकि कई लोग डर के कारण भी जांच नहीं करा रहे हैं कि अगर उन्हें कोरोना हो गया तो क्या करेंगे।
सबसे पहले आप कोरोना की जांच कराएं। इसके बाद टायफाइड की जांच कराएं। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने पर आप और आपका परिवार निश्चिंत रहेगा। इसके बाद आप आराम से टायफाइड का इलाज करा सकते हैं। डॉ प्रसाद का कहना है कोरोना का इलाज सही समय पर शुरू करना जरूरी है, एक तय समय होता है जिसमें ठीक से ट्रीटमेंट और केयर करना जरूरी है। डर की वजह से कोरोना जांच नहीं होने पर परिवार में भी संक्रमण फैल सकता है। साथ ही मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है।

गांव में अभी भी जागरूकता ज़रूरी :
डॉ प्रसाद ने कहा आज के वक्त में शहरों के साथ गांव में भी उतनी ही जागरूकता की जरूरत है। लोग नहीं समझते कोरोना कैसी बीमारी है? गांवों में अभियान का माध्यम बहुत सीमित दायरे तक है। सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है लेकिन वह अधिकतर भ्रमित करता है, दूसरा टीवी और तीसरा समाचार पत्र। समाचार पत्र के माध्यम से लोग जागरूक होते हैं लेकिन बहुत अधिक नहीं। पिछले साल गांवों में किसी प्रकार की जागरूकता नहीं थी। वे नहीं समझते कोरोना क्या होता है| भारत को गांवों का देश कहा जाता है लेकिन गांवों मे बीमारी को लेकर अभी भी जागरूकता का अभाव है। इसलिए कोरोना के बाद टायफाइड की जांच कराएं। इन दिनों कोरोना के साथ टायफाइड भी हो रहा है इसलिए सावधानियां बरतना जरूरी है।

क्या होता है टायफाइड:
टायफाइड पाचन तंत्र और ब्लडस्ट्रीम में इंफेक्शन के कारण होता है। टायफाइड में सलोमोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाती है। सबसे पहले यह दूषित पानी और खाने के जरिए होता है। यह पाचन तंत्र को काफी हद तक प्रभावित करता है।

टायफाइड के लक्षण:

•ठंड लगकर बुखार आना।
•संक्रमण होने से भूख नहीं लगना।
•शरीर में दर्द होना।
•शरीर पर लाल चकत्ता ( रैशेज) होना।
•आलस बना रहना।
•टायफाइड में मरीज को 102 से 105 डिग्री तक बुखार हो जाता है।

टायफाइड होने पर बरते सावधानियां :
•साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
•गर्म पानी पीएं।
•दूसरों से दूरी बनाकर रखें।
•कच्चा खाना नहीं खाएं, पके हुए खाने का सेवन करें।
•अलग कमरे में रहें ताकि संक्रमण नहीं फैलें।
•तरल पदार्थ का अधिक सेवन करें।
•गिले कपड़ें से अपने शरीर का पोछ लें,नहाएं नहीं।
•बुखार नहीं उतरने पर ठंडे पानी की पट्टी रखें।

टायफाइड का इलाज: एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए संभव है। सही समय पर ट्रीटमेंट मिलने पर हफ्ते भर में आराम मिल जाता है। हालांकि खाने-पीने का परहेज रखना जरूरी है। टायफाइड करीब 15 दिन तक रहता है। इसलिए सावधानियां रखने पर जल्द ठीक भी हो सकते हैं।

टायफाइड में घरेलू उपचार का उपयोग भी कर सकते हैं:

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. विनय के अनुसार गिलोय का पानी से टायफाइड में लाभ मिलता है। बताया गिलोय को रात भर पानी में भिगोकर रख दें। चार कप पानी डालकर भिगोएं। सुबह काढ़े को इतना उबालें कि एक कप पानी रह जाएं। आधा -आधा कप सुबह -शाम पीयें ।

लहसुन – लहसुन की तासीर गर्म होती है लेकिन एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। इसलिए इसे घी में सेक लें और सेंधा नमक डालकर एक कली को पानी से दे दें।

तुलसी और सूरजमुखी – दोनों का अच्छे से रस निकालकर पी जाएं। साथ ही आप एक बर्तन में तुलसी की कुछ पत्तियां डालकर अच्छी तरह से उबाल लें और दिन में थोड़ा – थोड़ा 3-4 बार पीयें।

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