दिलीप कुमार के निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने शोक जताया।
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सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने वृहस्पतिवार को शोक जताया। अपने शोक संदेश में संस्थान के महासचिव डाॅ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने उनके निधन को हिन्दी सिनेमा जगत के लिए अपूर्णीय क्षति बताते कहा कि आज भले ही दिलीप साहब दुनिया को अलविदा कह गए हों लेकिन वो अपनी दमदार शख्सियत और बेहतर अदाकारी को लेकर हमेशा सभी के दिलों में जिंदा रहेंगे। उन्होंने अपने गुजरे जमाने को याद करते कहा कि तब युवाओं के दिलों में दिलीप कुमार राज किया करते थे। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा पर लगातार 58 साल तक राज करने वाले दिलीप कुमार ने ‘दाग’ से लेकर ‘देवदास’ और ‘मुगल-ए-आजम’ से लेकर ‘शक्ति’ और ‘सौदागर’ तक कलाकार के ऐसे रूप को दिखाया, जैसा अब शायद ही कभी कोई दिखा सकेगा।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि उनकी अदाकारी में एक अद्भुत स्वाभाविकता थी,जिससे उनके किरदार दर्शकों पर एक गहरा असर छोड़ते थे। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि
दिलीप कुमार के निधन के साथ ही हिंदी सिनेमा की उस तिकड़ी का भी अंत हो गया जिसने 50 और 60 के दशक में राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार के रूप में हिन्दी सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सचिव प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि दिलीप कुमार भारतीय सिने जगत के एक ऐसे स्थापित अभिनेता थे, जिनकी फिल्मों ने तत्कालीन समाज और उस वक्त की युवा पीढ़ी पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के पहले महानायक थे। खास बात यह कि वे महानायक से पहले एक महामानव थे। अभिनय की उनकी शैली किसी से प्रभावित नहीं थी। उनका अपना स्टाइल था। उनकी ठहर–ठहर कर संवाद प्रस्तुति की शैली ने कई दशक तक सिनेप्रेमियों को अपना दीवाना बनाए रखा। उनके निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने वाले अन्य लोगों में डाॅ महेन्द्र नारायण राम, हरिश्चंद्र हरित, डॉ गणेश कांत झा, विनोद कुमार झा, प्रो विजयकांत झा, हीरा कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढा भाई, डॉ उदय कांत मिश्र, आशीष चौधरी, चंदन सिंह, चौधरी फूल कुमार राय, दुर्गानंद झा, श्याम किशोर राम आदि शामिल थे।
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