90 दिनों के बाद आशिक़-ए-रसूल को सीजेएम कोर्ट से मिली ज़मानत
आशिकान-ए-रसूल आज़माइशों का जुर्रत और हौसले के साथ मुक़ाबला करते हैं: नज़रे आलम

दरभंगा ठीक तीन महीनों के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के शेरदिल सदर जनाब नज़रे आलम और उनके दरभंगा ज़िला के युवा इकाई के छात्र नेता मोo तालिब को सीजेएम कोर्ट ने ज़मानत दे दिया।
आपको बता दें कि पूरा मामला गुस्ताख़-ए-रसूल नरसिंहानंद के अभद्र बयान के ख़िलाफ़ बेदारी कारवां द्वारा दरभंगा में 12 अप्रैल 2021 को निकाले गए विरोध मार्च से जुड़ा हुआ है जिसके माध्यम से पापी नरसिंहानंद को फांसी देने की मांग की गयी थी।
मगर उल्टा बिहार की सत्ता में स्थापित संघी मानसिकता वाली सरकार ने विरोध में उठने वाली लोकतांत्रिक आवाज़ को कुचलने की नीयत से शांतिपूर्ण और कोरोना प्रोटोकॉल का पूर्ण रूप से पालन करने वाले मार्च के मुखिया नज़रे आलम और उनके साथियों पर 147, 188, 269, 270, 271, 283, 353 के साथ 51 डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 और 2/3 एपिडेमिक एक्ट 1897 जैसी गंभीर धाराओं में गलत और मनमाने तरीके मुक़दमा दर्ज कर दिया ताकि इन्हें ज़मानत न मिल सके और प्रशासन अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो जाए।
मगर “जिसका हामी हो ख़ुदा उसको मिटा सकता है कौन” सीनियर वकील इरफ़ानूर रहमान बिस्मिल, वकील अफ़रोज़ आलम खान की कड़ी मेहनत और मज़बूत दलीलों के आगे झूठे तर्कों का टिकना मुश्किल था और आखिर बेल मिली और विरोधियों का मुँह काला हुआ।
नजरे आलम ने कहा हम सदा न्यायपालिका पर विश्वास करते आये हैं और हमें ऐसे ही परिणामों की उम्मीद थी हम अपने शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करते हैं जो इन मुश्किल परिस्तिथियों में हमारे साथ लगातर बने रहे साथ ही हम माले, पॉपुलर फ्रंट और बाकि पार्टियों का भी शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने हमारे लिए आवाज़ उठायी। ज़मानत के समय वकील अफरोज खान के अलावा हाजी मोहम्मद कलाम, जफीर अहमद, बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष मधुबनी मास्टर नूर आलम, बिहार राज्य मदरसा एसोसिएशन के प्रदेश संरक्षक जकी अहमद पममु, वकील इरफान अहमद पैदल आदि भी मौजूद थे।
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