बेतरतीब विकास के कारण जलजमाव, विशेषज्ञ के हाथ मे हो विकास की कमान:बेसा

साधारण वर्षा के फलस्वरूप जलजमाव पर प्रतिक्रया देते हुए बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के महासचिव डा सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि शहरी जलजमाव
बिना किसी निश्चित योजना के बेतरतीब तरीके से हो रहे विकास का परिणाम है। प्रतिवर्ष विकास मद में करोड़ों खर्च के बाद भी लोगों की समस्या कम नहीं हो रही है। इसके पीछे बिना किसी प्लान के मकानों का जैसे-तैसे नक्शा पारित किया जाना ,अतिक्रमण,गैर जरूरी योजनाओ का क्रियान्वयन एवं बिना नक्शा के मकानों का बनना तधा बिना ड्रेनेज एवं सिवरेज सिस्टम विकसित किए हुए भवन और सड़क निर्माण किया जाना है।
बेतरतीब विकास के कारण शहर में सिवरेज व ड्रेनेज समस्या विकराल रूप ले रही है। बरसात के समय इसकी भयावहता सामने आती है। अब तो शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में भी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से जलजमाव की समस्या उत्पन्न होती है। शहरो एवं गांवो मे विशालकाय तालाबों को पाट कर उन पर सरकारी व निजी इमारतें बुलंद कर दी गईं है,तालाबों की संख्या दिनानुदिन कम होती जा रही है जहा पानी का ठहराव होता है।
90 के दशक मे शहरो के निचले इलाके खाली थे जिससे पानी फैल जाता था। हाल के वर्षों में इन इलाकों में आबादी तेजी से बढ़ी है और बेहद बेतरतीब विकास हुआ है। लेकिन, इस बसाहट के कारण होनेवाली दिक्कतों को सरकार ने गंभीरता से नहीं ली।
‘डा चौधरी ने कहा कि पानी का फैलाव जितना अधिक होगा, बाढ़ की भयावहता उतनी कम होगी। लेकिन, शहर का निचला हिस्सा, जो कभी ग्रामीण क्षेत्र हुआ करता था, वहां शहरीकरण तेजी से हुआ। ग्रामीण इलाको से लोग शहर आए और उन्हें मुख्य शहर में जगह नहीं मिली, तो निचले हिस्से में ही बस गए।
ऐसे मे बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ मांग करता है कि सरकार विशेषज्ञों के साथ बैठक कर नए सिरे से विचार कर समस्या का समाधान निकाले एवं शहरी विकास की कमान अभियंताओ के हाथ मे सौप देनी चाहिए ताकि आमजन को शहरी जलजमाव की समस्या से निजात मिल सके।
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