बाबा सिद्धेश्वरनाथ के दरबार में खूब सजी मधुश्रावणी की फूलडाली

व्यक्तिगत दूरी के लिए किया खास इंतजाम
मनीगाछी प्रखंड के टटुआर पंचायत अंतर्गत बिशौल गांव में अवस्थित अति प्राचीन सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में सावन के तीसरे सोमवारी को भक्तों और माँ गौरी के पूजन के लिए फूल चुनने वाली नव विवाहित लड़कियों एवं उनकी सहेलियों की खास चहल-पहल रही। सावन में शिव की पूजा के विशेष महत्व को देखते हुए मंदिर में जहां हर-हर महादेव, जय शिव शंकर और बोल बम के नारे लगाते भक्तों की घंटों कतार लगी रही। वहीं पति के दीर्घायु होने की कामना के साथ मधुश्रावणी व्रत करने वाली नवविवाहित स्त्रियों द्वारा गौरी पूजन के फूलों की डाली सजाना देर शाम तक लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने शिव पूजन के लिए पहुंचने वाले भक्तों को व्यक्तिगत दूरी का खास ख्याल रखते हुए पूजन कराया।
बता दें कि अति प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ महादेव की महत्ता इस इलाके में काफी प्रचलित है। भक्तों का मानना है कि निर्मल मन से बाबा सिद्धेश्वर नाथ के दरबार में हाजिरी लगाने वालों के मन की मुराद निश्चय ही पूरी होती है। मंदिर में लगे शिलापट्ट के अनुसार नर्मदा कुंड से प्राप्त शिव व गणेश की मूर्ति के साथ शिवलिंग की स्थापना 1763 शाके की चैत्र शुक्ल दशमी को महान शिव उपासक व अपने समय के प्रकांड विद्वान सिद्धेश्वर नाथ मिश्र ने की। जानकार बताते हैं कि यहां स्थापित तीनों मूर्तियों में से दो मूर्तियां गिरजापति भगवान शिव की सायुज्य मुक्ति की प्राप्ति के लिए और तीसरी गणेश की मूर्ति के साथ शिवलिंग की स्थापना सकल अभिलाषित मनोकामना की शीघ्र प्राप्ति के लिए की गई है।
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