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दरभंगा आइसा संदीप कुमार चौधरी ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की मान्यता बहाली को लेकर सांसद को दिया ज्ञापन।

आइसा के संदीप कुमार चौधरी ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की मान्यता बहाली को लेकर सांसद को दिया ज्ञापन।

दरभंगा:- आइसा के राज्य सचिव संदीप कुमार चौधरी के नेतृत्व में दरभंगा आइसा के जिला उपाध्यक्ष मो.शम्स तबरेज,मो. आमिर अखलाक ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की मान्यता बहाली को लेकर राज्य सभा सांसद प्रो.मनोज झा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री कार्यालय में आज ज्ञापन दिया है। अपने ज्ञापन में श्री चौधरी ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा अवसर की समानता के उद्देश्य से सतत शिक्षा, कार्यरत व्यक्ति, प्रौढ़, घरेलू तथा कार्यरत महिलाओं आदि के शैक्षिक विकास को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उक्त उद्देश्य की पूर्ति हेतु केंद्रीय खुला विश्वविद्यालय, राज्य खुला विश्वविद्यालय एवं विश्वविद्यालय अंतर्गत दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गई। उक्त संस्थानों की उन्नयन, विकास गुणात्मकता की निरीक्षण एवं संबद्धता के लिए दूरस्थ शिक्षा परिषद की स्थापना 1991 में इग्नू अधिनियम 1985 की धारा 5(2) के साथ पठित धारा 16(7) के तहत स्थापित की गई थी। नियम 28 के खंड (2)(ए) के अनुसार, दूरस्थ शिक्षा परिषद जिम्मेदार है। देश में मुक्त और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के प्रचार और समन्वय के लिये परिषद के स्थान पर वर्ष 2012 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अंतर्गत दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो की स्थापना के पश्चात सिर्फ रेगुलेशन 2017, 2018, 2020 पुनः संशोधन 2021 ही आती रही। विकास अनुदान भी बंद कर संस्थानों का नियमित निरीक्षण भी नहीं किया गया। उक्त समय से दूरस्थ शिक्षा के संस्थानों से संबंधित रेगुलेशन 2017 के प्रथम संशोधन में नैक की बाध्यता भी स्पष्ट नहीं किया गया तथा जनवरी 2020 ई० एवं कई संस्थानों को तो 2022 ई० तक मान्यता विस्तार भी प्रदान किया गया।
अचानक रेगुलेशन 2020 जारी कर राज्य के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालय के अधीन संचालित दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को नैक मूल्यांकन के सर्वोत्तम ग्रेड प्वाइंट A+ तथा ग्रेड अंक 3.26 होना अनिवार्य कर दिया जाना सिर्फ राजतंत्र के फरमान की तरह संचालित संस्थानों को बंद कर सरकार द्वारा प्रदत संवैधानिक उद्देश्य “अवसर की समानता” के अधिकार को अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त करना ही दिखता है। जहां तक राज्य के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों का सवाल है तो नैक के दूसरे साईकिल में भी कई प्रदेशों में ग्रेड प्वाइंट B++ अंक प्वाइंट 2.76-3.0 तक प्राप्त नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करनेवाली पूर्व विधान से स्थापित संस्था के रुप विश्वविद्यालय की मान्यता विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा बरकरार है, किंतु उसी के अधीन संचालित दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को यूजीसी डेब के रेगुलेशन 2020 में नियम स्थापित कर मान्यता से बाधित कर दिया जाय यह किस प्रकार का न्याय है? वर्ष 2020 में कोरोना काल की त्रासदी से गुजर रहे कई विश्वविद्यालयों द्वारा नैक के आगामी साइकल मूल्यांकन हेतु एस० एस० आर० भी समर्पित नहीं किया गया है।
उपरोक्त तथ्यों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए 10 वर्षों से अधिक समय से संचालित सभी दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को पूर्व से (जुलाई 2020) के सत्रों में नामांकन की स्वीकृति प्रदान करते हुए आगामी 5 वर्षों तक मान्यता विस्तार कर राज्य के अंतर्गत विश्वविद्यालय के अधीन संचालित दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को स्वतंत्र इकाई के रूप में नैक एक्रिडेशन की प्रथम साइकल कराए जाने की अनिवार्यता तथा उन्नत ग्रेड प्वाइंट B++ अंक प्वाइंट 2.76-3.0 की शर्त पर आगामी मान्यता विस्तार दिए जाने से जहां एक ओर दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन के साथ संस्थान के संचालन में उपस्थित व्यवधान भी समाप्त होगा।
उन्होंने सांसद से अनुरोध किया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो द्वारा पारित रेगुलेशन 2020 तथा संशोधित रेगुलेशन 2021 की धारा 3 में किए गए उपबंधों में संशोधन करते हुए संस्थान के संचालन से संबंधित उपस्थित दोहरी मानदंडों को समाप्त करते हुए उस क्षेत्र जहाँ दूरस्थ शिक्षा निदेशालय संचालित है। वहां के लाभान्वित समाज कार्यरत कर्मचारियों के समक्ष उपस्थित समस्याओं का समाधान हो सके।प्रो.मनोज झा ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तुरत केंद्रीय शिक्षा मंत्री से बात करने और आगामी सत्र में मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया।

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