विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सांसद गोपालजी ठाकुर ने कहा,
मिथिला व मैथिली के विकास के लिए एकीकृत सांगठनिक प्रयास समय की मांग

मिथिला और मैथिली के प्रति पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को विशेष लगाव था।
खंडित मिथिला को एक सूत्र में बांधने के लिए कोसी नदी पर महासेतु के निर्माण और मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने में स्वर्गीय बाजपेयी के दिए योगदानों से यह साबित होता। है उक्त बातें दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने सोमवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में अटल बिहारी वाजपेयी की तीसरी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कही।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वर्गीय वाजपेयी के सपनों का मिथिला बनाने के लिए संगठित होकर मिथिला-मैथिली के विकास की मांगों को सही प्लेटफार्म पर रखा जाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अष्टम अनुसूची में शामिल भाषा के अधिकारों का चिंतन करते हुए मिथिला को विकास की पटरी पर लाने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि जब हमें संवैधानिक अधिकार मिले हैं, तो प्राथमिक शिक्षा में मैथिली की पढ़ाई, धरोहर लिपि मिथिलाक्षर के संरक्षण व संवर्धन सहित राजकाज की भाषा मैथिली निश्चित रूप से बनेगी। लेकिन इसके लिए मिथिला में रहने वाले सभी मैथिलों को अपने अधिकार एवं कर्तव्य का बोध करना होगा । अपने संबोधन में उन्होंने बदले हालातों में मिथिला ने क्या खोया और क्या पाया इस पर विचार विमर्श करने की जरूरत पर बल दिया।
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि मिथिला क्षेत्र को लेकर बाहर के लोगों की मानसिकता में अब बड़ी ही तेजी से बदलाव आ रहे हैं। बदली मानसिकता के कारण दो दशक पूर्व तक पलायन को मजबूर मिथिला क्षेत्र में नित नए रोजगार की संभावना पैदा हो रही है। दरभंगा एयरपोर्ट के शुरू होने से न सिर्फ श्रम और समय में बचत संभव हो रहा है बल्कि इससे रोजगार और कारोबार के नित नये दरबाजे खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के तहत दरभंगा में शुरू हुआ हवाई अड्डा नित नई मिसाल गढने के साथ-साथ मिथिला क्षेत्र के 17 विभिन्न जिलों सहित पड़ोसी देश नेपाल को भी एक सूत्र में बांध रहा है। उन्होंने विभिन्न योजनाओं की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जल्दी ही मिथिला क्षेत्र भारत के मानचित्र पर विकास के मामले में अव्वल होगा। उन्होंने कहा कि बहुत जल्दी ही इस क्षेत्र को बाढ़ की त्रासदी से निजात मिलेगा जबकि सुखार की समस्या का भी स्थाई निदान संभव हो सकेगा। उन्होंने मैथिली भाषा के विकास के लिए जनगणना में अधिक से अधिक लोगों द्वारा अपनी मातृभाषा मैथिली दर्ज कराए जाने को काफी महत्वपूर्ण बताया
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने वाजपेयी जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें मैथिली व मिथिला के विकास का पैरोकार बताया। उन्होंने कहा कि मिथिला और मैथिली के विकास के लिए जो भी मसले उनके समक्ष ले जाये गये, वे हमेशा इसके निदान के लिए तैयार बैठे मिले। इससे पूर्व विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा0 बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने सांसद के समक्ष सात सूत्री प्रस्ताव रखा। इसमें कोसी महासेतु का नामकरण अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने, मिथिला की राजधानी दरभंगा में अटल जी की प्रतिमा लगाये जाने के लिए जगह उपलब्ध कराने, प्राथमिक शिक्षा में मैथिली माध्यम से पढ़ाई शुरू किए जाने, द्वितीय राजभाषा के रूप में मैथिली को दर्जा देकर राजकाज की भाषा के रूप में मैथिली को स्थापित करने, आकाशवाणी के गीत एवं नाटक प्रभाग को पुनर्जीवित करने, दूर संचार माध्यमों में अन्य भाषाओं के साथ-साथ मैथिली में भी उद्घोषणा शुरू किया जाना आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।
विद्यापति सेवा संस्थान के सचिव प्रो जीवकांत मिश्र के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में मारवाड़ी कालेज के प्राचार्य डॉ फूलो पासवान, विनोद कुमार झा, चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, डाॅ राम सुभाग चौधरी, प्रवीण कुमार झा आदि ने भी अपने विचार रखे। डाॅ सुषमा झा के गाये गोसाउनि गीत से शुरू हुई श्रद्धांजलि सभा में मणिकांत झा एवं हरिश्चंद्र हरित ने स्वर्गीय वाजपेयी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित कविताएं पढ़ी।
अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ बुचरू पासवान ने मातृभाषा मैथिली के प्रति मिथिला के लोगों में कम हो रहे भावनात्मक आकर्षण के प्रति चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के धनी इस क्षेत्र के लोगों को पढ़ाई, दवाई और कमाई के लिए आज भी पलायन करना पड़ रहा है, यह गंभीर चिंतन का विषय है। धन्यवाद ज्ञापन एमएमटीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ उदय कांत मिश्र ने किया । इस अवसर पर वैद्य गणपति झा, मिथिलेश झा, हरिकिशोर चौधरी मामा, चन्द्रकांत झा, श्याम किशोर राम, संतोष कुमार झा, प्रेम कुमार झा, दीपक कुमार झा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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