पैतृक गांव में मनी आरसी बाबू की जयंती

महाकवि आरसी प्रसाद सिंह की जयंती गुरुवार को उनके पैतृक गांव एरौत में मनाया गया। इस मौके पर विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा स्थापित आरसी बाबू की प्रतिमा पर ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनकी जयंती पर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी ने उन्हें बहुआयामी प्रतिभा का धनी बताते कहा कि उनकी वीर रस की रचनाएं स्पष्ट रूप से राष्ट्रभक्ति को दर्शाती हैं।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने उनकी हिदी और मैथिली की रचनाओं को आज भी प्रासंगिक बताते हुए इसे सहेजने की जरूरत बताई। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि वैसे तो आरसी बाबू ने हिन्दी एवं मैथिली दोनों ही भाषाओं में समानांतर रचनाएं की लेकिन मैथिली में उनकी अनमोल कृतियां उनके मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव को दर्शाती है। प्रो जीवकांत मिश्र ने उनकी रचित अप्रकाशित रचनाओं के प्रकाशन सहित उनकी पांडुलिपियों को सुरक्षित व संरक्षित किए जाने को सच्ची श्रद्धांजलि बताई।
प्रवीण कुमार झा ने कहा कि आरसी बाबू की कविताओं में मुखरित प्रकृति चित्रण, संस्कृति व राष्ट्रीय एकता की भावना उन्हें विशेष कवि होने का दर्जा प्रदान करती है। जय कुमार झा, डाॅ महेन्द्र नारायण राम, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, विनोद कुमार झा, प्रो विजय कांत झा, डॉ उदय कांत मिश्र, डॉ गणेश कांत झा, दुर्गानंद झा, मिथिलेश कुमार झा, आशीष चौधरी, चंदन सिंह आदि ने भी उनकी जयंती पर उन्हें कृतज्ञ नमन किया।
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