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कोरोना काल मे स्कूल खुलने पर अभिभावक रखें बच्चों का ध्यान

कोरोना काल मे स्कूल खुलने पर अभिभावक रखें बच्चों का ध्यान
-कोरोना प्रोटोकॉल के अनुपालन को दें सीख, डराएं नहीं: डॉ उमाशंकर प्रसाद


दरभंगा  आखिरकार तमाम चर्चाओं के बीच स्कूल फिर से खुल गए। कोरोना महामारी के आने के बाद से देशभर में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए थे। बीच में कुछ समय बड़ी कक्षाओं के लिए स्कूल खोले गए थे, लेकिन संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण फिर बंद कर दिए गए। अब एक सितंबर से फिर देश के कई राज्यों में स्कूल खुल गए हैं। शासकीय स्तर पर यह निर्णय बहुत सोच- विचार के साथ लिया गया है। महामारी की तीसरी लहर को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। वयस्कों का टीकाकरण अब भी जारी है, लेकिन सभी बच्चों के लिए वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूल खोलना भी जरूरी है, क्योंकि बच्चों का नुकसान तो हो ही रहा है। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी बातों का ख्याल रखना ज़रूरी है।
पूरी सेहत का मामला
सदर पीएचसी प्रभारी डॉ उमाशंकर प्रसाद ने बताया यह समझना जरूरी है कि बच्चे के स्कूल जाने से भी उसकी इम्ययुनिटी और सेहत जुड़ी हुई है। सामान्य तौर पर जब एक बच्चा स्कूल जाता है तो वहां उसे बहुत अलग अलग परिवेश से आने वाले अलग-अलग तरह के बच्चे और बड़े मिलते हैं| वह धूप, खुली हवा और धूल में खेलता है|, कक्षा में क्रियाकलापों और पढ़ाई में दिमाग लगाता है। इससे उसका शरीर और दिमाग दोनों ही अच्छी तरह विकसित होते हैं।
स्कूल जाना बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिहाज से सही है –
पढ़ाई के अलावा खेलों के द्वारा व दोस्त बनाकर वह सामाजिक स्थिति को भी जीना सीखता है। जीवन के शुरुआती दौर की यह स्थिति आगे उसके पूरे स्वास्थ्य पर असर डालती है। अलग-अलग तरह के बच्चों के साथ ही वह अलग-अलग तरह के संक्रमणों और कीटाणुओं के संपर्क में भी आता है। इससे उसकी इम्ययुनिटी और बढ़ती है। इसलिए स्कूल जाना बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिहाज से सही है। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ कोरोना काल में ज्यादा दिन तक स्कूल बंद करने के पक्ष में नहीं थे।
इन बातों का रखें ध्यान
अब जब कई बातों को ध्यान में रखते हुए पूरी गाइडलाइंस का पालन करते हुए स्कूल खोले जा रहे हैं, तब अभिभावक की भी जिम्मेदारी बन जाती है कि वे बच्चों को इस स्थिति से लड़ना और जीतना सिखाएं।
वायरस को लेकर बच्चों को डराएं नहीं
चूंकि अभी सभी कक्षाओं के लिए स्कूल नहीं खुल रहे हैं, इसलिए छोटे बच्चों को लेकर यह नहीं करना होगा कि वे हाथ धोने और मास्क पहनने जैसी चीजों का ध्यान कैसे रखेंगे। यही समय है जब छोटे बच्चों को घर में ही आने वाले दिनों के लिए तैयार कर सकते हैं। बच्चों से बात करें, उन्हें बिना डराए आज की स्थिति के बारे में बताएं और यह भी बताएं कि स्वच्छता (हाइजीन) का ध्यान सामान्य दिनों में भी रखना क्यों जरूरी है। इससे उनके दिमाग में हाइजीन को लेकर डर नहीं होगा और वे इसे रूटीन की चीज समझकर हमेशा ध्यान रखेंगे। बच्चों के साथ मास्क, सैनिटाइजर आदि जरूर रखें।
बाहर खानपान को करें इनकार
डॉ प्रसाद ने कहा टिफिन और पानी घर से ही साथ रखें। उन्हें बाहर का कुछ भी खाने- पीने को मना करें। अगर आपके बच्चे पहले दिन की क्लास अटैंड करके घर आए हैं तो उन्हें तुरंत अपना सामान एक तरफ रखकर, कपड़े तुरंत धुलने में डालने और हाथ पैर अच्छी तरह धोने या नहाने के लिए कहें। बच्चों का स्कूल शुरू होते ही उनकी व्यस्तता बढ़ गई है। ऐसे में उनके लिए एक तय रूटीन होना जरूरी है। उनकी पर्याप्त नींद, खुराक और फिजिकल फिटनेस का भी ध्यान रखें।
बच्चों को व्यायाम से जोड़ें
-बच्चों को पूरी सावधानी के साथ साइकिलिंग करने, प्राणायाम, योगासन करने, रस्सी कूदने, जैसी गतिविधियों से जोड़ें। अगर आपके घर के पास कोई गार्डन हो तो वहां कोरोना गाइडलाइंस का ध्यान रखते हुए बच्चे को खेलने के लिए ले जाएं। यदि नहीं है तो घर की छत, बरामदे या किसी हवादार कमरे में बच्चे को एक्सरसाइज करवाएं। जंक फूड, बहुत ज्यादा मीठा, आर्टिफिशियल कलर वाले खाद्य पदार्थ खाने से बच्चे को रोकें।
अस्वस्थ बच्चों को नहीं भेजें स्कूल
डॉ प्रसाद ने कहा ऐसे बच्चे जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्यगत समस्या है, जैसे कि डायबिटीज, अधिक मोटापा, इम्ययुनिटी संबंधी कोई डिसऑर्डर, अस्थमा, एलर्जी या कोई गंभीर समस्या जैसे कैंसर आदि है| उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के स्कूल न भेजें। सबसे बड़ी बात यह ध्यान में रखें कि बच्चों पर कोरोना के असर का अब तक कोई प्रमाण नहीं है। इसलिए ये सोचना कि आने वाले समय मे केवल बच्चों को ही समस्या होगी, गलत है। इसके उलट सामान्य तौर पर बच्चों को समस्या कम से कम होगी। इसका उदाहरण हम पहले भी देख चुके हैं। हां, वे बच्चे जो पहले से किसी समस्या से गुजर रहे हैं उन्हें तकलीफ ज्यादा हो सकती है। इसलिए बिना डरे और बिना डराए, पूरी सावधानी का पालन करते हुए अपने बच्चे को स्कूल भेजें। इससे उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर होगा।

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