असम के डीटेंशन कैंपों में हो रही मौतों के खिलाफ भाकपा-माले का प्रतिवाद
पोलो मैदान से लहेरियासराय टावर तक निकला प्रतिवाद
भारत भर में एनआरसी लागू करने की कोशिश में है मोदी सरकार, यह नागरिकता पर हमला है।

दरभंगा असम के डीटेंशन कैंपों में 27 लोगों की मौतों के खिलाफ डीटेंशन कैंप को बंद करने और नागरिकता संशोधन बिल वापस करने की मांग पर आज भाकपा-माले के देशव्यापी आह्वान के तहत दरभंगा में पोलो मैदान से दरभंगा टावर तक भाकपा(माले) कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च व सभा का आयोजन किया। विरोध -प्रदर्शन के दौरान माले कार्यकर्ता डीटेंशन कैंप में हुई मौतों के जिम्मेवार मोदी-शाह जवाब दो, देश भर में एनआरसी को थोपना बंद करो, डीटेंशन कैंपों को बंद करो, नागरिकता पर हमला नहीं सहेंगे आदि नारे लगा रहे थे।
पोलो मैदान में नगर सचिव सदीक भारती की अध्यक्षता में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि असम के डीटेंशन कैंपों में अब तक 27 लोगों की मौत हो गई है. फाइनल सूची के पहले 25 लोग मारे गए और उसके बाद दो लोगों की मौत हुई है. इन दो लोगों में 70 वर्षीय फालू दास और 65 वर्षीय दुलाल चंद्र पाल शामिल हैं. दुलाल पाल और फालू दास के परिवार ने उनके शव लेने से इंकार करते हुए कहा है कि अगर वे बांग्लादेशी थे, तो बांग्लादेश में उनके परिवार को तलाशिये, और शव को बांग्लादेश भेजिए. नहीं, तो मानिये कि वे भारत के नागरिक थे जिनकी हत्या सरकार द्वारा डीटेंशन कैम्प में हुईं. इन मौतों के लिए पूरी तरह से मोदी-शाह की जोड़ी जिम्मेवार है। भाजपा ने असम के लगभग 19 लाख लोगों की नागरिकता को खतरे में डाल दिया है। इन लोगों को डीटेंशन कैंपों में डाला जा रहा है जहां लोगों की लगातार मौतें हो रही हैं.
आगे कहा कि आज भाजपा-आरएसएस के लोग पूरे देश में एनआरसी थोपना चाहते हैं. अमित शाह अब देश भर में एनआरसी लागू करवाने पर आमादा हैं, जिसमें हर किसी को कागजात के जरिए साबित करना होगा कि 1951 में उनके पूर्वज भारत में वोटर थे. हर राज्य में डीटेंशन कैम्प खुलवा रहे हैं- महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में ऐसे कैम्प बन रहे हैं. गरीब तो बीपीएल की सूची, वोटर लिस्ट, आधार आदि से भी बाहर रह जाते हैं. वे 1951 के अपने पूर्वजों के कागजात कहाँ से लाएंगे? अगर न ला पाएं तो उन्हें डीटेंशन कैम्प में डाल दिया जाएगा. मोदी – शाह कह रहे हैं कि अगर आप मुसलमान हैं तो आपको देश से निकाल दिया जाएगा, पर अगर आप हिन्दू या गैर मुसलमान हैं, तो हम नागरिकता कानून में संशोधन करके आपको शरणार्थी मान लेंगे. इस तरह आज नागरिकों की नागरिकता पर भाजपा-आरएसएस ने खतरा पैदा कर दिया है. उन्हें या तो डीटेंशन कैम्प में मारा जाएगा, या नागरिक के बजाय शरणार्थी बना दिया जाएगा.
भाकपा-माले भाजपा-आरएसएस की इन कोशिशों को कभी कामयाब नहीं होने देगी. आने वाले दिनों में एनआरसी को वापस करने की मांगों पर और भी जोरदार आंदोलन किए जाएंगे।
कार्यक्रम में भाकपा(माले) जिला स्थायी समिति सदस्य नंद लाल ठाकुर, हरि पासवान,ललन पासवान, भोला पासवान, प्रो ऋषिकेश झा, प्रिंस राज, गजेंद्र नारायण शर्मा, प्रो कामेश्वर पासवान, प्रो कल्याण भारती, रविंद्र कुमार सहित दर्जनों लोग शामिल थे।
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