संगोष्ठी में कोरोना के दूसरे लहर के खट्टे-मीठे अनुभवों की अविरल बही भाव सरिता
आलेखों के पुस्तककार का किया गया विमोचन

संपूर्ण विश्व अभी भी आशंका और संशय की स्थिति से गुजर रहा है. कब किस देश से एक बार फिर से कोरोना की दस्तक की खबर आ जाएगी इसकी संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई है. हालांकि भारत सहित संपूर्ण विश्व कोरोना के प्रभाव से मुक्त हुआ सा जान पड़ता है लेकिन जिस प्रकार से लोग हाथ पर हाथ धरे इसके समूल नाश की प्रतीक्षा में है इससे कभी भी अनचाही स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. उक्त बातें दरभंगा हवाई अड्डा के मुख्य सुरक्षा पदाधिकारी संजीव कुमार ने बृहस्पतिवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘कोरोनाक दोसर लहरिक प्रभाव’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कही. उन्होंने कहा कि कोरोना के पहले लहर के बाद दूसरे लहर में इसके विकराल रूप को देखते हुए हमें तीसरे लहर के प्रति अभी से सतर्क रहने की जरूरत है.
बतौर मुख्य अतिथि दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ केएन मिश्र ने कोरोना के दूसरे लहर के दरमियान डीएमसीएच द्वारा सामना की गई चुनौतियों को बयां करते हुए हर व्यक्ति को तीसरे लहर के प्रति अभी से ही सचेत रहने की सलाह दी. सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक अधिकारी विवेकानंद झा ने कोरोना के पहले एवं दूसरे लहर की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए अनेक रोचक अनुभव साझा किए.
वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ओम प्रकाश ने कोरोना के दूसरे लहर के दौरान मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि लोगों को जागरूक करने में इसने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने कोरोना के संकट के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों की भूमिका को रेखांकित किया.
संगोष्ठी के संयोजक मणिकांत झा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू, 49 वें मिथिला विभूति पर्व समारोह की आयोजन समिति के स्वागत अध्यक्ष प्रजेश कुमार झा एवं मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने मिलकर किया.
कार्यक्रम के दौरान संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने अपने संस्मरण आधारित आलेख पढ़े. जिससे खट्टे-मीठे अनुभवों की भाव-सरिता निरंतर बहती रही। संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अपने विचार रखते कहा कि साल 2020 के आगमन के साथ आये कोरोना नाम के महामारी की विषबिस्सी पहले के मुकाबले दूसरे लहर मे कहीं ज्यादा रही. जिसने भारत सहित संपूर्ण विश्व की जीवन लीला की वर्षों से लिखी जा रही पटकथा को एकदम से उलटफेर करके रख दिया। एक ओर इसने संपूर्ण विश्व के मानव जीवन की दिनचर्या को सिरे से बदल कर रख दिया। वहीं, इसके कारण प्रकृति के मनोहारी वास्तविक रूप मुखर होने के साथ ही विभिन्न प्रकार के प्रदूषण में भारी कमी स्पष्ट रूप से देखी गई । संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों के संस्मरण-आलेखों के पुस्तकाकार स्वरूप का सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने मिलकर विमोचन किया. वरिष्ठ कवि डाॅ जयप्रकाश चौधरी जनक ने कोरोना काल में होने वाले साहित्य सृजन की विस्तार से चर्चा करते हुए इसे बहुभाषा साहित्य के सुंदर भविष्य के लिए सुखद बताया।
अध्यक्षीय संबोधन में पीजी राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो जितेंद्र नारायण ने कहा कि जीवन में संस्मरण का बहुत महत्व है। चूंकि आज के भागम भाग की जिंदगी मे लोगों के मस्तिष्क को खुराक नहीं मिल पा रहा है इसलिए विस्मरण की स्थति उत्पन्न होती जा रही है। वहीं विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कोरोना काल के संस्मरण पर आधारित आलेखों के पुस्तकाकार संकलन को उपयोगी बताते हुए इसे प्रकाशित करने में पुस्तक के संपादक मणिकांत झा एवं सह-संपादक प्रवीण कुमार झा की खुले मन से प्रशंसा की।
गंधर्व कुमार झा की वेद ध्वनि से शुरू हुई संगोष्ठी में डॉ सत्येंद्र कुमार झा, डॉ रमेश झा, नीलम झा, हीरेंद्र कुमार झा, शंभू नाथ मिश्र आसी, आभा झा, स्वर्णिम किरण झा, मोहन मुरारी अखिलेश कुमार झा, अमित मिश्र, साहेब कुमार ठाकुर, दीपक कुमार झा, मुशर्रफ परवेज, हीरा कुमार झा, रामचंद्र राय, सोनी चौधरी, विनोद कुमार झा आदि ने आलेख प्रस्तुत करते हुए अपने संस्मरण साझा किए. कार्यक्रम में डाॅ गणेश कांत झा, प्रो चन्द्र शेखर झा बूढाभाई, पं विष्णु देव झा विकल, नीतीश सौरभ, संतोष कुमार झा, भीम झा, हर्षवर्धन मिश्र आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही. सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति प्रतीक प्रदान करने के साथ ही पाग, चादर एवं कलम भेंट कर सम्मानित किया गया।
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal