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49 वें मिथिला विभूति पर्व समारोह में मंचासीन मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं विधान पार्षद ने एक स्वर में कहा,

49 वें मिथिला विभूति पर्व समारोह में मंचासीन मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं विधान पार्षद ने एक स्वर में कहा,

मखान मिथिला का था, है और आगे भी रहेगा.

मिथिला का मखान सदियों से यहां की सांस्कृतिक पहचान रही है.इसीलिए जीआई टैग में मिथिला मखान नाम के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. यह बात बुधवार की देर शाम विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में महाकवि कोकिल विद्यापति के निर्वाण दिवस पर आयोजित 49 वें मिथिला विभूति पर्व समारोह के अवसर पर मंचासीन मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं विधान पार्षद ने एक स्वर में घोषणा की. उन्होंने एक सुर में कहा- मखान मिथिला का था, है और आगे भी रहेगा.
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि उनका मिथिला के साथ हमेशा से चोली दामन का साथ रहा है. वे विधायक से लेकर मंत्री रहते हुए जितने विद्यापति यथोचित पर्व समारोह में शिरकत कर चुके हैं यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. उन्होंने कहा कि विद्यापति पर्व समारोह की मेहमानवाजी करते हुए उन्हें मिथिला की संस्कृति और बाबा विद्यापति की रचनाओं को काफी करीब से देखने व सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ है.इस लिहाज से कहा जा सकता है कि मिथिला ना सिर्फ विद्वानों की भूमि रही है, बल्कि यहां की कला, संस्कृति और हुनर ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम करने में सफलता हासिल की है. उन्होंने कहा की मिथिला के विकास के बिना बिहार क्या संपूर्ण देश के विकास की बात करना बेमानी होगी.
बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार मिश्र ने कहा कि दरभंगा हमेशा से मिथिला की अघोषित राजधानी रही है. लेकिन अब जल्दी ही इसकी पहचान आर्थिक राजधानी के रूप में होने वाली है. उन्होंने कहा की मिथिला में सूचना तकनीक से जुड़ी संभावनाओं को देखते हुए दरभंगा एवं इसके आसपास के इलाके को आईटी हब में बदलने का ब्लूप्रिंट तैयार है और यहां के श्रम को उचित मान सम्मान और यथोचित आर्थिक उपादान मुहैया कराने को लेकर बिहार सरकार कृत संकल्प है.
कला संस्कृति मंत्री आलोक रंजन ने कहा कि मिथिला के हुनर का जादू हमेशा से विश्व स्तर पर अपनी कीर्ति पताका लहराता रहा है. चाहे वह मिथिला पेंटिंग हो या फिर यहां की प्रसिद्ध सिकी एवं सूजनी कला, इसने विश्व स्तर पर लोगों को न सिर्फ आकर्षित किया है, बल्कि मिथिला को आर्थिक रूप से मजबूत करने में काफी प्रभावकारी भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि यहां की कला संस्कृति एवं श्रम शक्ति को जल्दी ही व्यवस्थित रूप प्रदान कर उन्हें रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएंगे.
पद्मश्री डॉक्टर सीपी ठाकुर ने मिथिला, मैथिली एवं मातृलिपि मिथिलाक्षर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अनेक उपाय सुझाते हुए मिथिला की मातृलिपि मिथिलाक्षर को जीवंत बनाए रखने के लिए आम लोगों को इसके दैनिक प्रयोग को लेकर आगे आना का आह्वान किया.

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