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डीएमसीएच में नवजात की देखरेख को ले चिकित्सक व नर्सो को दिया जा रहा देख रेख का प्रशिक्षण

डीएमसीएच में नवजात की देखरेख को ले चिकित्सक व नर्सो को दिया जा रहा
-जन्म के बाद मां का दूध नवजात के लिए सर्वोत्तम आहार -डॉ के एन मिश्रा
-जन्म के तुरन्त बाद शिशु की चिकित्सकीय जांच ज़रूरी

दरभंगा डीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में गुरुवार से एफबीएनसी के तहत चिकित्सक एवं नर्सों को नवजात की देखरेख को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत जन्म के बाद चिकित्सकीय पहलु के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। बतौर प्रशिक्षक डॉ के एन मिश्र, डॉ अशोक कुमार, डॉ रिज़वान ने बताया कि जब बच्चा जन्म लेता है तो वह बहुत ही संवेदनशील होता है। ऐसे में उसे सही जांच और देखभाल की जरूरत होती है। इसमें जरा-सी भी लापरवाही बच्चे के स्वास्थ्य के लिए दिक्कत हो सकती है। इसलिए नवजात के शुरुआती चौबीस घंटे में उचित जांच और देखभाल की जानी चाहिए। प्रशिक्षक ने जानकारी देते हुए बताया जन्म लेने के बाद शुरुआती चौबीस घंटे शिशु के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान उसे विशेष देखभाल की जरूरत होती है। भले ही प्रसव सामान्य हो या ऑपरेशन। जब बच्चा इस संसार में आंखें खोलता है तो उसे सुरक्षित महसूस कराने और सबसे पहले गर्मी देने के लिए मां के सीने पर रखा जाता है, जिससे वह अपनी मां की त्वचा को महसूस कर सके। इसके बाद उसे मां के पहले दूध और नींद की जरूरत होती है। फिर उसका वजन किया जाता और विटामिन के इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। ताकि रक्त स्राव को रोका जा सके। इसके अलावा भी जन्म के पहले 24 घंटों में कई तरह की जांच करनी होती हैं। इन जांचों में शामिल हैं-

सांस की गति को जांचे
डॉ के एन मिश्रा ने बताया कि जैसे ही बच्चा जन्म लेता है, डॉक्टर उसके मुंह और नाक से म्युकस और एमनियोटिक फ्ल्यूड को साफ करने के लिए सक्शन करते हैं, जिससे बच्चा खुद से सांस लेना शुरू कर सके। जन्म के एक मिनट और पांच मिनट के बाद सांसों की गति मापी जाती है। इसके उपरांत जन्म के बाद बच्चे का एप्गार स्कोर चेक करते हैं। यह टेस्ट बताता है कि जन्म के बाद नई दुनिया से बच्चा कैसी गतिविधि कर रहा है। इसका मापन जन्म के 1 मिनट बाद, 5 मिनट बाद और कभी-कभी 10 मिनट के बाद किया जाता है। जब बच्चा अपनी मां की छाती पर होता है। इस जांच में बच्चे की हार्ट बीट, सांसें, स्किन अपीयरेंस, मसल्स टोन और रिफ्लेक्सेस की माप की जाती है। उच्चतम स्कोर 10 है। अगर यह स्कोर 7 या उससे अधिक आता है तो समझना चाहिए आपका बच्चा नॉर्मल एक्ट कर रहा है।
पहला मेडिकल चेकअप:
प्रशिक्षण देते हुए डॉ अशोक ने बताया जन्म के एक घंटे बाद डॉक्टर शिशु के सांस की दर, तापमान, हृदय गति और मसल्स मूवमेंट के अलावा उसके रिएक्शंस, बाई बर्थ डिजीज और जॉन्डिस की भी जांच करते हैं। जन्म के 24 घंटे के भीतर शिशु को यूरिन और स्टूल जरूर डिस्चार्ज करना चाहिए। अगर इसमें जरा भी देर हो या फिर उसके यूरिन या स्टूल में गड़बड़ी दिखाई दे तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।
पहला आहार माँ का दूध
-प्रतिभागियों को जानकारी देते हुए प्रशिक्षक ने बताया बच्चे का सबसे पहला भोजन, प्रसव के बाद मां का पहला दूध होता है। यह थोड़ा-सा चिपचिपा और पीले रंग का होता है। मां के पहले दूध को कोलेस्ट्रम कहते हैं। इसमें कईं एंटीबायोटिक्स होते हैं, जो बीमारियों से बच्चे को बचाते हैं और बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने में सहायता कर उसे विभिन्न इंफेक्शंस से बचाते हैं। बताया भरपूर माँ का दूध नवजात शिशु के लिए एक सर्वोत्तम आहार माना जाता है। यह बच्चे को सिर्फ पोषण ही नहीं सुरक्षा भी प्रदान करता है। जन्म के एक घंटे के भीतर ही यह बच्चे को दे देना चाहिए।
कंगारू देखभाल
प्रशिक्षण में बताया गया कि शिशु को जन्म के बाद गर्म रखना ज़रूरी है। इसके लिए डॉक्टर शिशु को मां की सीने पर रखते हैं। इसे कंगारू देखभाल भी कहा जाता है। इससे उसका रोना कम होगा, वह फीडिंग शुरू करेगा और उसका बॉडी टेंप्रेचर बैलेंस रहेगा। आंकड़े बताते हैं कि यह तकनीक समय से पहले पैदा होने वाले या जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की डेथ रेट को 51 प्रतिशत कम कर सकती है।

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