
किसान सभा ने 11 सूत्री मांगो के समर्थन में दिया महाधरना
किसानों के मांगो को अविलंब पूरा करें सरकार अन्यथा और तेज होगा आंदोलन:- राजीव चौधरी

दरभंगा राज्यव्यापी आवाह्न के तहत पूर्व घोषित कार्यक्रम के आलोक में अखिल भारतीय किसान सभा के द्वारा 11 सूत्री मांगों को लेकर जिला समाहर्ता के समक्ष पोलो मैदान स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय महाधरना का आयोजन किया गया। महाधरना का नेतृत्व व अध्यक्षता संगठन के जिला अध्यक्ष व पंचोंभ मुखिया राजीव कुमार चौधरी ने किया। अध्यक्षीय भाषण में चौधरी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के किसानों ने अपने संगठन की एकता एवं संघर्ष के बल पर भारत सरकार के तीनों काला कृषि कानून वापस लेने के लिए बाद्ध्य कर दिया। प्रधानमंत्री ने अपनी गलती भी स्वीकार की फिर भी भारत सरकार एवं बिहार सरकार किसानों की समस्या का समाधान इमानदारी पूर्वक नहीं कर रही है। सरकार किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। केंद्र व राज्य सरकार खेती-किसानी को कारपोरेटो के हाथों में गिरवी रखने की रणनीति बना रही थी। जिसे किसान एकता ने ध्वस्त कर दिया। वहीं किसान अपने खेती-किसानी को बचाने के लिए अपने मांगों के साथ देश और आज के अलग-अलग जगहों पर संघर्षरत है। उन्होंने एमएसपी के दर पर धान खरीद सहित बाढ़ सूखा के अस्थाई निदान, कोसी, कमला एवं बागमती नदी के उद्गम स्थल पर हाय डैम का निर्माण, वर्तमान वर्ष के बाढ में हुए खरीफ एवं धान की फसल की बर्बादी की भरपाई, सरकारी घोषणा के अनुसार फसल क्षति का अविलंब भुगतान, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय फसल बीमा योजना लागू करने, पैक्सो के द्वारा एमएसपी की दर पर धान की खरीद, रासायनिक खाद्य संकट का अविलंब निदान, कृषि बाजार समिति को फसलों के लिए जिला स्तरीय क्रय केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, दूध उत्पादकों को प्रति लीटर ₹10 सब्सिडी दिया जाए, जिला किसान उद्योग केंद्र की स्थापना किया जाए, रैयती किसानों का सहकारिता फसल बीमा का भुगतान किया जाए, कृषि को मनरेगा से जोड़ा जाए आदि मांग है। वही किसान सभा के पूर्व जिला महासचिव नारायण जी झा ने कहा कि किसानों को यह निकम्मी मोदी सरकार कमजोर आंक ली है। लेकिन इस सरकार को किसानों ने धूल चटाया है और आगे भी चटायेगा। कल पंजाब के अंदर अखिल भारतीय किसान सभा सहित विभिन्न किसान संगठनों का संयुक्त आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आंदोलन कर रहे थे। मगर मोदी सरकार ने उसी रास्ते से होकर अपने काफिला निकालने को आतुर थे। किसान संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन को कुचलने के लिए मोदी सरकार की पूरी तंत्र वह गृह मंत्रालय आक्रामक रूप से लगी हुई थी। लेकिन किसानों की एकता को देखकर मोदी को वापस आना पड़ा और मोदी सहित इनके सारे मंत्री संत्री किसानों को पूरे देश के अंदर बदनाम कर रही है। जिसका हम कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं। इस देश को किसान मजदूर और मेहनतकश लोग ने मिलकर बनाया है। जिसे कारपोरेट के हाथ की कठपुतली इस मोदी सरकार खत्म करना चाहती हैं। जिसे हम किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे। वही धरना को संबोधित करते हुए किसान सभा के पूर्व जिला अध्यक्ष अहमद अली तमन्ने ने कहा कि सरकार देश के अंदर अघोषित आपातकाल लागू कर दी है। जिसमें सबसे ज्यादा किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान व मेहनत करने वाले लोग पीड़ित हो रहे हैं। सरकार के लोग दिन में बड़ी रैलिया करते है और रात में कर्फ्यू लगाते हैं। सरकार पूरी तरह से दिवालिया हो गई है। सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल हो गई है। इस देश के अंदर सत्ता परिवर्तन होना अति आवश्यक है। वही धरना को किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष विश्वनाथ मिश्र, आशुतोष मिश्र, मोहम्मद कलाम, राम पुकार पासवान सरपंच, मणिकांत झा, लाल बच्चा दास, हर्ष राजवर्धन, गौतम कांत चौधरी, अभिषेक आनंद, सरोज मिश्र, शरद कुमार सिंह, सुजीत कुमार पासवान आदि ने संबोधित किया।
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